कृषि यंत्र अनुदान हाइलाइट्स
- सुपर सीडर की खरीद पर अधिकतम 1.20 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाता है.
- स्मार्ट सीडर पर 90,200 रुपये और हैप्पी सीडर पर 86,350 रुपये तक सब्सिडी है.
- आवेदन मध्यप्रदेश के ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल farmer.mp.gov.in पर ऑनलाइन करना होगा.
- आवेदक को बैंक खाते से 4,500 रुपये की धरोहर राशि का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा.
- आवेदनों के आधार पर तय लक्ष्य के हिसाब से लॉटरी की सूचना प्रकाशित होगी.
Super Seeder Subsidy: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के किसान नरवाई प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर खरीदें, तो राज्य सरकार नियमानुसार सब्सिडी दे रही है. सुपर सीडर पर अधिकतम 1.20 लाख रुपये, स्मार्ट सीडर पर 90,200 रुपये और हैप्पी सीडर पर 86,350 रुपये तक अनुदान है. आवेदन ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल farmer.mp.gov.in पर ऑनलाइन करना होगा.
इन यंत्रों से धान की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेष, यानी नरवाई, बिना जलाए संभाले जा सकते हैं. योजना का मकसद नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देना है. अनुदान पात्र किसानों को शासन के नियमों के मुताबिक मिलेगा.
तीनों यंत्रों पर कितना अनुदान मिलेगा?
| यंत्र | अधिकतम अनुदान | तकनीक | जुताई-बुवाई की लागत में कमी |
|---|---|---|---|
| सुपर सीडर | ₹1.20 लाख | जुताई और बुवाई एक साथ | करीब 40% तक |
| स्मार्ट सीडर | ₹90,200 | जीरो टिलेज | करीब 50% तक |
| हैप्पी सीडर | ₹86,350 | जीरो टिलेज | करीब 60% तक |
तीनों में सबसे ज्यादा अनुदान सुपर सीडर पर है, जबकि लागत घटने का सबसे बड़ा आँकड़ा हैप्पी सीडर के लिए बताया गया है. असल अनुदान राशि किसान की पात्रता और तय नियमों पर निर्भर करेगी.
ये यंत्र बुवाई कैसे करता है?
सुपर सीडर एक ही बार में खेत की जुताई और बीज की बुवाई कर देता है. खेत में पड़ी नरवाई मिट्टी में मिल जाती है और जैविक पदार्थ के रूप में मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में काम आ सकती है.
हैप्पी सीडर जीरो टिलेज तकनीक पर चलता है, यानी बुवाई के लिए पारंपरिक जुताई नहीं करनी पड़ती. यह नरवाई को काटकर सतह पर बिछाता है और उसी दौरान बीज बो देता है. सतह पर बिछे अवशेष मल्चिंग का काम करते हैं और मिट्टी की नमी टिकी रहती है.
स्मार्ट सीडर भी जीरो टिलेज पर आधारित है. इसमें बीज की कतार में जरूरी जुताई होती है और नरवाई खेत में दबा दी जाती है. अवशेष भी संभलते हैं और नमी भी बनी रहती है.
नरवाई जलाने के नुकसान
धान की कटाई के बाद खेत में बची नरवाई को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है. मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ता है और आगजनी का खतरा भी रहता है. इन यंत्रों के इस्तेमाल से नरवाई जलाने की जरूरत घटती है और रबी फसलों की बुवाई समय पर करने में मदद मिलती है.
आवेदन कैसे करें और कौन से कागज लगेंगे?
कृषि विभाग के अनुसार आवेदन मध्यप्रदेश के ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल farmer.mp.gov.in पर ऑनलाइन होगा. किसान के अपने नाम की जमीन की बी-1, बैंक पासबुक और ट्रैक्टर की आरसी जरूरी है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पात्र किसानों को जाति प्रमाण पत्र भी देना होगा.
आवेदक को अपने बैंक खाते से 4,500 रुपये की धरोहर राशि का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना है. मिले आवेदनों के आधार पर तय लक्ष्य के हिसाब से लॉटरी की सूचना प्रकाशित की जाएगी. उसके बाद शासन के नियमों के मुताबिक आगे की प्रक्रिया होगी.
किसान को अपने लिए लागू अनुदान राशि और पात्रता की जानकारी विभाग से लेनी होगी. पोर्टल पर उपलब्ध दिशा-निर्देश और जरूरी दस्तावेज भी आवेदन से पहले जाँच लेने चाहिए.
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