हाइलाइट्स
- जयपुर में मूंग ₹6,900/क्विंटल, हफ्तेभर में ₹300 की तेजी आई.
- राजस्थान में मूंग की फसल 50% से ज्यादा कमजोर रहने का अनुमान.
- देशभर में मूंग की बुवाई पिछले साल से 3.68% घटकर 32.68 लाख हेक्टेयर.
- टेक्निकल चार्ट पर ₹8,500 पार होते ही ₹9,000 तक तेजी संभव.
Moong Price : राजस्थान की जयपुर मंडी में मूंग का भाव ₹6,900 रुपये प्रति क्विंटल पर मजबूती से टिका हुआ है. बीते एक हफ्ते में ही दाम ₹300 उछल चुके हैं, जबकि महीनेभर में ₹100 की बढ़त दर्ज हुई है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले भाव अब भी ₹400 नीचे हैं. असल वजह है राजस्थान में मूंग की फसल के 50% तक कमजोर रहने का अनुमान, जिसने पूरे बाजार को हिला दिया है. राजस्थान की नोहर अनाज मंडी में मूंग का भाव 6700 से 7500 के आसपास बना हुआ है.
बता दें कि लंबे समय तक कम बारिश और ज्यादा तापमान की वजह से मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा है. वहीं मंडियों में मांग मजबूत बनी हुई है और सप्लाई पाइपलाइन लगभग खाली चल रही है. इसी वजह से हाल के दिनों में तेजी लौटी है, हालांकि सालाना आधार पर भाव अभी भी नीचे ही हैं.
जयपुर में मूंग में तेजी का कारण
दरअसल कर्नाटक में मूंग की आवक पहले से ही कमजोर चल रही है, और महाराष्ट्र में भी उत्पादन में गिरावट देखी गई है. इसके अलावा विदेशी और घरेलू, दोनों तरफ से सप्लाई सीमित है. इस कमी की भरपाई सरकार फिलहाल अल्पकालीन टेंडर के जरिए कर रही है, लेकिन यह स्थायी हल नहीं माना जा रहा.
खास बात ये है कि मांग और मिलों की खरीद अभी तक मजबूत बनी हुई है, जिससे आवक कम होने के बावजूद भाव नीचे नहीं आ पाए. यही वजह है कि जयपुर मंडी में भाव की मजबूती हफ्तों से बरकरार है.
राजस्थान में फसल पर 50% का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
राजस्थान मूंग उत्पादन के मामले में देश के अहम राज्यों में आता है, इसलिए यहां की फसल का हाल पूरे बाजार का रुख तय करता है. मौजूदा अनुमान के मुताबिक राज्य में इस बार 50% से ज्यादा फसल कमजोर रह सकती है, जिसकी सीधी वजह लंबे सूखे जैसे हालात और ज्यादा तापमान बताई जा रही है.
हालांकि अभी यह सिर्फ अनुमान है, असली तस्वीर तभी साफ होगी जब नई फसल मंडियों में आना शुरू होगी. तब तक व्यापारी और किसान दोनों ही अनुमानों के सहारे अपनी रणनीति बना रहे हैं.
देशभर में मूंग की बुवाई के आंकड़े क्या कहते हैं?
21 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में मूंग की कुल बुवाई 32.68 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 33.93 लाख हेक्टेयर से 3.68% कम है. यानी बुवाई का रकबा घटा है, और इसी वजह से फसल को लेकर चिंता बढ़ी है.
राज्यवार आंकड़े देखें तो तस्वीर कुछ यूं है:
| राज्य | बुवाई (लाख हेक्टेयर) | बदलाव |
|---|---|---|
| राजस्थान | 23.17 | ▼ 1.53% |
| महाराष्ट्र | — | ▼ 30.14% |
| मध्य प्रदेश | — | ▼ 27.66% |
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बुवाई का रकबा तो अलग से नहीं बताया गया, लेकिन पिछले साल के मुकाबले गिरावट का आंकड़ा साफ बताता है कि इन राज्यों में भी हालात अच्छे नहीं हैं.
सरकारी स्टॉक कितना, क्या राहत मिल पाएगी?
सरकार के पास फिलहाल एनसीसीएफ (NCCF) के पास करीब 40,000 टन, नैफेड (NAFED) के पास करीब 1.5 लाख टन और मार्कफेड (MARKFED) के पास पुराने और 2026 की खरीद को मिलाकर करीब 10 लाख टन स्टॉक मौजूद है. सरकारी टेंडर के जरिए तत्काल सप्लाई तो दी जा सकती है, लेकिन कमजोर फसल के अनुमान की वजह से यह स्टॉक तेजी को पूरी तरह रोक पाएगा या नहीं, यह आने वाली नई आवक पर ही निर्भर करेगा.
उड़द के बाजार में भी हलचल तेज
मूंग के साथ-साथ उड़द की मंडियों में भी दाम में बढ़त देखी जा रही है. प्रमुख बाजारों के ताजा भाव (रुपये प्रति क्विंटल) इस तरह रहे:
- मुंबई उड़द FAQ: ₹8,825 (▲200)
- चेन्नई उड़द FAQ: ₹8,700 (▲200)
- चेन्नई उड़द SQ: ₹9,350–9,550 (▲200)
- दिल्ली उड़द FAQ: ₹9,100 (▲125)
- कोलकाता उड़द FAQ: ₹8,850 (▲50)
- जलगांव उड़द देसी: ₹9,000 (स्थिर)
- गुंटूर कृष्णा पॉलिश: ₹9,050 (▲150)
- जबलपुर समर उड़द: ₹8,905 (▲355)
इससे साफ है कि सिर्फ मूंग ही नहीं, बल्कि दलहन के पूरे बाजार में ही मजबूती का माहौल बना हुआ है.
आगे भाव का रुख कैसा रहेगा?
टेक्निकल चार्ट के हिसाब से दिल्ली की एमपी लाइन क्वालिटी में मूंग के लिए ₹7,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है. वहीं साप्ताहिक बंद के आधार पर ₹8,500 का स्तर ब्रेकआउट लेवल है. अगर भाव इस स्तर के ऊपर टिकाव के साथ बंद होता है, तो अगला लक्ष्य ₹8,800 से ₹9,000 के बीच देखा जा रहा है.
फिलहाल बाजार का कुल रुख ‘स्टेबल टू बुलिश’ यानी स्थिर से तेजी की ओर झुका हुआ आंका जा रहा है.
किसानों और व्यापारियों के लिए रणनीति क्या होनी चाहिए?
मौजूदा तेजी में आक्रामक खरीद से बचने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि भाव पहले ही ऊपरी स्तर पर पहुंच चुके हैं. इसके बजाय गिरावट के मौकों पर खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जा रही है.
साथ ही राजस्थान की फसल, नई आवक, सरकारी टेंडर और मांग के आंकड़ों पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी. तेज उछाल आने पर मुनाफावसूली करना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी टलने वाला नहीं है.
राजस्थान की असली फसल कितनी कमजोर निकलती है, यह अभी साफ नहीं है. अगले कुछ हफ्तों में नई आवक और सरकारी टेंडर के नतीजे ही तय करेंगे कि जयपुर मंडी में मूंग ₹8,500 का स्तर पार करके नई तेजी पकड़ती है, या मौजूदा दायरे में ही टिकी रहती है.
(मंडी में सौदा करने से पहले ताजा भाव और अपने अनाज व्यापारी या मंडी सलाहकार से जरूर पुष्टि करें.)










