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Onion Price: 35 रुपये किलो की दर से 10 दिन में बिकी 4000 टन प्याज, 17 शहरों को मिली राहत

Jagat Pal

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Onion Price: प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए शुरू हुई सरकारी सब्सिडी बिक्री का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है. उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने रविवार को बताया कि सब्सिडी वाली प्याज बिक्री के पहले दस दिनों में 17 शहरों में करीब 4,000 टन बफर प्याज बेची जा चुकी है. यह जानकारी उन्होंने PTI को दी. केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों NCCF और NAFED के जरिए 2026 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखे हुए है.

खास बात ये है कि इन एजेंसियों ने भंडारित प्याज को उत्पादक राज्यों से उपभोक्ता केंद्रों तक पहुंचाने के लिए रेल और सड़क, दोनों रास्तों का इस्तेमाल किया है. ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम की स्पेशल मालगाड़ी और ट्रकों के जरिए चुनिंदा शहरों में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज बेची जा रही है.

कांदा एक्सप्रेस से कहां-कहां पहुंची प्याज?

रेल के जरिए सप्लाई की रफ्तार अच्छी बनी हुई है. कांदा एक्सप्रेस के जरिए अब तक बल्क खेप दिल्ली और चेन्नई पहुंच चुकी है.

निधि खरे के मुताबिक तीसरी रेक अब गुवाहाटी भेजने के लिए लोड की जा रही है और आने वाले दिनों में यह रवाना होगी. यानी सप्लाई का दायरा उत्तर से पूर्वोत्तर भारत तक बढ़ रहा है, जिससे उन शहरों को भी राहत मिलने की उम्मीद है जहां अब तक प्याज महंगी बिक रही थी.

अब तक कितनी राहत मिली, आंकड़े क्या कहते हैं?

खरे के मुताबिक बफर प्याज की बिक्री से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है और कीमतों में हल्की गिरावट आई है। NCCF की प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्रा के मुताबिक अकेले NCCF ने अब तक 1,500 टन बफर प्याज बेची है।

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उन्होंने बताया- “हमने अब तक देशभर के अलग-अलग शहरों में 1,500 टन बफर प्याज बेची है। फोकस रिटेल बिक्री और 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने पर है।” चंद्रा के मुताबिक सब्सिडी बिक्री की वजह से कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई है।

प्रमुख शहरों में आज प्याज का क्या रेट है?

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त को जब सब्सिडी बिक्री शुरू हुई थी, तब देशभर का औसत रिटेल प्राइस 48.5 रुपये प्रति किलो था। 5 सितंबर तक यह औसत बढ़कर 50.79 रुपये प्रति किलो हो गया, हालांकि गिरावट का असर अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिखा है।

शहर5 सितंबर का रिटेल रेट
दिल्ली₹58 प्रति किलो
मुंबई₹53 प्रति किलो
चेन्नई₹63 प्रति किलो
रांची₹40 प्रति किलो
औसत होलसेल रेट (देशभर)₹42.79 प्रति किलो

बता दें कि देशभर का औसत रिटेल भाव भले ही बढ़ा हुआ दिख रहा है, लेकिन जिन शहरों में बफर प्याज सीधे बिक रही है, वहां NCCF और चंद्रा के मुताबिक रिटेल स्तर पर 2-3 रुपये की गिरावट दर्ज हो चुकी है।

किन राज्यों में चल रही है बिक्री और कौन संभाल रहा है व्यवस्था?

NCCF का रिटेल इंटरवेंशन फिलहाल दिल्ली-NCR, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पंजाब, ओडिशा और कुछ अन्य राज्यों में चल रहा है। चंद्रा के मुताबिक कई राज्य सरकारों ने इस योजना में दिलचस्पी दिखाई है।

NCCF ने कुछ राज्यों के साथ करार किया है, जिसके तहत उनके स्टोर, मोबाइल वैन, सहकारी समितियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किए गए दूसरे प्लेटफॉर्म से बिक्री की जा रही है। नोडल एजेंसी सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) इन राज्यों तक बफर प्याज की छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और आवाजाही की जिम्मेदारी संभाल रही है।

रबी फसल को नुकसान क्यों हुआ?

सचिव निधि खरे ने एक अहम बात भी बताई। आमतौर पर बाद में रिलीज करने के लिए भंडारित रखी जाने वाली रबी प्याज की फसल को इस बार बेमौसम बारिश के चलते कटाई के दौरान कुछ नुकसान पहुंचा है।

दरअसल यही वजह है कि सप्लाई साइड पर पहले से मौजूद दबाव और बढ़ गया, जिसका असर कीमतों पर पड़ा। हालांकि खरे के मुताबिक सरकार के बफर स्टॉक की क्वालिटी और साइज प्राइवेट ट्रेडर्स द्वारा बेची जा रही प्याज के बराबर ही है।

आम खरीदार के लिए क्या मायने रखता है यह डेटा?

जिन 17 शहरों में सब्सिडी बिक्री चल रही है, वहां रहने वाले लोग सरकारी आउटलेट या मोबाइल वैन से 35 रुपये किलो के भाव पर प्याज खरीद सकते हैं।

  • अपने शहर में NCCF या NAFED का नजदीकी आउटलेट या मोबाइल वैन पता करें.
  • दिल्ली, चेन्नई जैसे शहरों में खुले बाजार का भाव अभी भी 55-65 रुपये के बीच है, सब्सिडी विकल्प चुनना फायदेमंद रहेगा.
  • रबी फसल को नुकसान का मतलब है कि अगली कुछ हफ्तों तक सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है.
  • खरीदारी करते वक्त क्वालिटी जरूर जांचें, सरकार का दावा है कि स्टॉक बाजार जैसा ही है.

प्याज की कीमतों में राहत के आसार

अधिकारियों के मुताबिक नई खरीफ प्याज फसल की तस्वीर उम्मीद जगाने वाली है। इसकी आवक मध्य अक्टूबर से बाजार में शुरू होने की उम्मीद है, जिससे सप्लाई का दबाव कम होगा और कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। तब तक बफर स्टॉक से बिक्री कितनी बढ़ेगी और कांदा एक्सप्रेस की अगली खेप कब-कब चलेंगी, इसे लेकर फिलहाल इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं है।

जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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