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सरकार दे रही है किसानों को आलू के उन्नत किस्मों के बीज! ऑनलाइन पोर्टल से करें बुकिंग

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Potato Seed Booking: हरियाणा सरकार ने रबी सीजन की तैयारी में जुटे आलू किसानों के लिए ऑनलाइन बीज बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा के मुताबिक करनाल के शामगढ़ स्थित पोटैटो टेक्नोलॉजी सेंटर पर कुफरी पुखराज और कुफरी मोहन समेत पाँच किस्मों का वायरस-फ्री, लैब-टेस्टेड बीज उपलब्ध है. किसान nursery.hortharyana.gov.in पोर्टल पर घर बैठे बुकिंग कर सकते हैं. किसी भी मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 9521529519 भी जारी किया गया है.

दरअसल, आलू की खेती में बीज की क्वालिटी ही पूरी फसल की नींव होती है. संक्रमित या कमज़ोर बीज से पैदावार और मुनाफा दोनों डूब जाते हैं. इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार ने अर्ली जनरेशन किस्मों और मिनीट्यूबर का बड़ा स्टॉक एक ही सेंटर पर इकट्ठा किया है, ताकि किसानों को बीज के लिए दर-दर भटकना न पड़े.

कितनी किस्में उपलब्ध हैं, कितना स्टॉक है?

पोटैटो टेक्नोलॉजी सेंटर शामगढ़ में कुफरी पुखराज अर्ली जनरेशन ईयर-3 का 1,276 क्विंटल सीड साइज बीज रखा गया है. इसके अलावा 298.5 क्विंटल अंडर साइज और 157 क्विंटल ओवर साइज भी मौजूद है. कुफरी मोहन अर्ली जनरेशन ईयर-4 में 255.5 क्विंटल सीड साइज, 9 क्विंटल अंडर साइज और 210 क्विंटल ओवर साइज का कोटा खुला है.

किस्मजेनरेशनसीड साइज (क्विंटल)अंडर साइजओवर साइज
कुफरी पुखराजEG Year-31,276298.5157
कुफरी मोहनEG Year-4255.59210
कुफरी चिपसोना-1EG Year-11
कुफरी ख्यातिEG Year-12.520.5
कुफरी उदयEG Year-10.5

इन सभी किस्मों की खासियत ये है कि ये कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं और मौसम के उतार-चढ़ाव को अच्छी तरह झेल लेती हैं. यानी फसल का रिस्क कम, मुनाफे की गुंजाइश ज्यादा. खास तौर पर जिन किसानों का इलाका बेमौसम बारिश या ठंड की मार झेलता है, उनके लिए ये किस्में और भी काम की हैं.

मिनीट्यूबर लगाओ, अगले साल का बीज खुद तैयार करो

इस बार सेंटर पर प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की बढ़ती माँग को देखते हुए मिनीट्यूबर की भी बड़ी खेप उतारी गई है. कुफरी फ्रायसोना के सबसे ज्यादा 75,000 मिनीट्यूबर उपलब्ध हैं. इसके बाद कुफरी उदय के 25,000, कुफरी हिमालिनी के 11,000 और कुफरी चिपसोना-1 के 8,000 मिनीट्यूबर स्टॉक में हैं.

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मिनीट्यूबर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जेनेटिकली प्योर होता है. मिट्टी जनित बीमारियाँ इस पर असर नहीं डालतीं. एक बार इसे खेत में लगाने के बाद किसान आने वाले कई सालों के लिए खुद अपना आलू बीज तैयार कर सकते हैं. बाहर से हर सीजन महंगा बीज खरीदने का झंझट खत्म.

चिप्स-फ्राइज कंपनियाँ सीधे खरीदती हैं, रेट पहले से तय

कुफरी चिपसोना-1 और कुफरी फ्रायसोना जैसी प्रोसेसिंग किस्मों की माँग चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने वाली कंपनियों में हमेशा बनी रहती है. ये कंपनियाँ सीधे किसानों से कॉन्ट्रैक्ट पर खरीदती हैं. मतलब मंडी में भाव गिरने की चिंता नहीं.

नार्मल आलू के मुकाबले इन किस्मों का रेट ऊँचा और पहले से तय रहता है. यह उन किसानों के लिए खास फायदे की बात है जो अपनी कमाई में स्थिरता चाहते हैं. इसीलिए फ्रायसोना का स्टॉक सबसे ज्यादा रखा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिल सके.

ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें?

बुकिंग के लिए हरियाणा बागवानी विभाग के पोर्टल nursery.hortharyana.gov.in पर जाना होगा. पहले फार्मर रजिस्ट्रेशन करें, फिर लॉगिन करके ‘पोटैटो सीड बुकिंग’ टैब खोलें. वहाँ पसंद की किस्म और ज़रूरत की मात्रा दर्ज करके फॉर्म सबमिट करते ही बुकिंग कन्फर्म हो जाती है.

बुकिंग के बाद डिजिटल रसीद और बुकिंग नंबर डाउनलोड करके अपने पास ज़रूर रखें. करनाल सेंटर से बीज उठाते वक्त यही रसीद दिखानी होगी. पोर्टल पर किसी तकनीकी दिक्कत के लिए हेल्पलाइन नंबर 9521529519 पर संपर्क किया जा सकता है.

जल्दी बुक न किया तो पसंदीदा किस्म मिलेगी या नहीं?

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से सीधी अपील की है कि बुवाई का पीक सीजन शुरू होने से पहले ही अपना स्लॉट बुक करा लें. स्टॉक सीमित है. हर कैटेगरी में क्विंटल पहले से तय हैं और एक बार स्टॉक खत्म होने पर बुकिंग बंद हो जाएगी.

खास तौर पर कुफरी उदय, कुफरी ख्याति और कुफरी चिपसोना-1 जैसी किस्मों का स्टॉक बहुत कम है. जो किसान इन्हें चाहते हैं, उनके लिए पोर्टल पर जाकर तुरंत रिजर्व करना ज़रूरी है. बुकिंग की कोई आखिरी तारीख अभी तक घोषित नहीं हुई है, इसलिए देर किए बिना पोर्टल पर जाना समझदारी होगी.

जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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