स्टोरी हाइलाइट्स
- खरीफ सीजन में प्रति हेक्टेयर 5 बैग यूरिया और 3 बैग डीएपी तय.
- रबी सीजन में भी प्रति हेक्टेयर निर्धारित सीमा से ही खाद मिलेगी.
- खाद लेने के लिए किसान की फार्मर आईडी होना अब जरूरी.
- नई डिजिटल व्यवस्था से कालाबाजारी और ओवर-बुकिंग पर लगेगी रोक.
Fertilizer Distribution: हनुमानगढ़ जिले के किसानों के लिए खाद लेने का तरीका अब पूरी तरह बदल गया है. भारत सरकार के निर्देश पर एफएफएस (FFS) यानी ‘प्वाइंट ऑफ सेल फॉर फर्टिलाइजर सेल्स’ व्यवस्था के तहत अब यूरिया और डीएपी खाद का वितरण डिजिटल तरीके से होगा. खरीफ सीजन के लिए सरकार ने प्रति हेक्टेयर 5 बैग यूरिया और 3 बैग डीएपी का कोटा तय किया है. इसी तरह रबी सीजन में भी प्रति हेक्टेयर तय सीमा के हिसाब से ही खाद मिलेगी.
खास बात ये है कि इस पूरी व्यवस्था की चाबी अब फार्मर आईडी के हाथ में है. जिस किसान के पास फार्मर आईडी नहीं है, उसे खाद के लिए पहले आईडी बनवानी होगी.
फार्मर आईडी से खाद कैसे मिलेगी?
डिजिटल बुकिंग व्यवस्था में किसान के पास जितनी कृषि भूमि दर्ज है, उसी के अनुरूप खाद उपलब्ध कराई जाएगी. यानी रकबा जितना, खाद उतनी ही मिलेगी.
इससे खाद वितरण को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या खत्म होगी. दरअसल एक ही किसान द्वारा जरूरत से ज्यादा खाद लेने की संभावना अब पूरी तरह कम हो जाएगी. कृषि विभाग का मकसद खाद का समान और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है.
किसे कितनी खाद मिलेगी और कब तक?
पूरी व्यवस्था को समझने के लिए कोटा, पात्रता और प्रक्रिया की जानकारी एक साथ देखना जरूरी है.
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| किसे मिलेगा | जिन किसानों का फार्मर आईडी में कृषि भूमि दर्ज है |
| खरीफ सीजन कोटा | प्रति हेक्टेयर 5 बैग यूरिया + 3 बैग डीएपी |
| रबी सीजन कोटा | प्रति हेक्टेयर निर्धारित सीमा के अनुसार (सटीक बैग संख्या फिलहाल आधिकारिक जानकारी में स्पष्ट नहीं) |
| जरूरी दस्तावेज | फार्मर आईडी |
| कैसे मिलेगा | डिजिटल बुकिंग व्यवस्था के जरिए, रकबे के अनुसार |
| कहां से बनेगी आईडी | ई-मित्र केंद्र या किसान खुद भी बना सकते हैं |
बता दें कि जिन किसानों ने अब तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, उन्हें जल्द बनवानी होगी. आईडी बनने के बाद किसान की जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज हो जाएगा, और इसी रिकॉर्ड के आधार पर खाद की पात्रता तय होगी.
कृषि विभाग को इस बदलाव से क्या उम्मीद है?
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी और जरूरत के अनुसार ही किसानों तक खाद पहुंचना आसान होगा. जिन किसानों ने पहले फार्म आईडी नहीं बनवाई है, उन्हें जल्द आईडी बनवानी होगी.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि निर्धारित मात्रा में ही खाद मिलने से किसान जरूरत के मुताबिक खाद का उपयोग कर सकेंगे. इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी. साथ ही कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक टैगिंग पर भी रोक लगेगी.
कालाबाजारी और ओवर-टैगिंग की समस्या से मिलेगी निजात
पुरानी व्यवस्था में एक दिक्कत लगातार सामने आती थी. पहले किसानों को आदान विक्रेता यूरिया-डीएपी के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचते थे, जिससे किसानों पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा था.
अब डिजिटल व्यवस्था के जरिए किसानों को तय मात्रा के अनुसार ही यूरिया और डीएपी खाद मिलेगी. इससे कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी. साथ ही अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित मात्रा में ही खाद मिलने से किसानों को खाद खरीदने पर अनावश्यक रूप से अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा.
विशेषज्ञों की राय- मात्रा वैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त
कृषि के रिटायर्ड संयुक्त निदेशक दानाराम श्योराण के मुताबिक खरीफ और रबी फसलों के लिए यूरिया और DAP की निर्धारित मात्रा वैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त है. हालांकि हनुमानगढ़ जिले में, खासकर नाली बेल्ट में, उर्वरकों का उपयोग अपेक्षाकृत ज्यादा होता है.
उन्होंने कहा- “सरकार को चाहिए कि किसानों को सब्सिडी पर निर्धारित मात्रा में उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराए. इसके साथ ही नॉन-सब्सिडी उर्वरक खरीदने की सीमा नहीं होनी चाहिए, ताकि जिन किसानों को मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त खाद चाहिए, वे उसे खरीद सकें.”
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
नई व्यवस्था में सुचारू रूप से खाद पाने के लिए किसानों को कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा.
- फार्मर आईडी अभी नहीं बनी है तो जल्द से जल्द बनवाएं.
- खेत का सही रकबा दर्ज कराएं, इसी के आधार पर कोटा तय होगा.
- गांव-गांव चल रहे जागरूकता कार्यक्रम और गोष्ठियों में शामिल हों.
- निर्धारित मात्रा से ज्यादा खाद की जरूरत हो तो नॉन-सब्सिडी वाला विकल्प देखें.
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) यशवंती के मुताबिक खाद वितरण की डिजिटल व्यवस्था लागू हो गई है और यह किसान व आमजन दोनों के हित में है. किसानों को पंजीयन के बारे में जागरूक किया जा रहा है और पर्यवेक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई है.
कृषि विभाग चला रहा जागरूकता कार्यक्रम
कृषि विभाग की ओर से किसानों को नई व्यवस्था की जानकारी देने के लिए गांव-गांव जागरूकता कार्यक्रम और गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं. इनमें फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया, तय मात्रा और डिजिटल वितरण व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई है. रबी सीजन का सटीक बैग-वार कोटा और नॉन-सब्सिडी खाद को लेकर आगे सरकार क्या रुख अपनाएगी, इसे लेकर फिलहाल इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं है.










