ताज़ा खबरें:

एग्रीस्टैक से जुड़ेगी फसल बीमा योजना, कागजी झंझट होगा खत्म

Jagat Pal

Follow Us

रांची (झारखंड) : फसल बीमा (Crop Insurance) कराने वाले किसानों के लिए अब एक नया नियम लागू होने जा रहा है. भारत सरकार में निदेशक (फसल बीमा) चंद्रजीत चटर्जी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव, कृषि सचिव और कृषि निदेशकों को जानकारी दी है कि फसल बीमा के लिए अब किसान आईडी (Farmer ID) अनिवार्य की जा रही है. उनके मुताबिक इसका सबसे बड़ा फायदा वास्तविक किसानों को मिलने की उम्मीद है.

असल में यह कदम फसल बीमा व्यवस्था को ज्यादा सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में उठाया गया है. एग्रीस्टैक स्कीम के तहत किसानों का पहचान पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसमें हर किसान की पूरी विवरणी दर्ज होगी.

किसान आईडी अनिवार्य होने से क्या बदलेगा?

खास बात ये है कि इसके जरिए किसान की पहचान को डिजिटल व्यवस्था से सीधे जोड़ा जा सकेगा. इससे फसल बीमा में गलत तरीके से शामिल होने वाले या गलत पहचान के आधार पर बीमा कराने वाले लोगों को बाहर करने में मदद मिलेगी.

दरअसल जब किसान की पहचान व्यवस्था में स्पष्ट होगी, तो बीमा प्रक्रिया की दक्षता भी बढ़ने की संभावना है. यानी असली किसानों तक बीमा का फायदा पहुंचने में देरी और गड़बड़ी दोनों कम होंगी.

अब किन-किन कागजातों से मिलेगी राहत?

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा कागजी झंझट कम होना है. वास्तविक किसानों को फसल बीमा कराने के लिए अलग-अलग दस्तावेज जुटाने की जरूरत अब नहीं पड़ेगी.

---विज्ञापन---

किसान आईडी के आधार पर पंजीकरण को पेपरलेस बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. इससे किसानों को बीमा के लिए आवेदन करते समय दस्तावेज तैयार करने और जमा करने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.

पुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था (किसान आईडी आधारित)
अलग-अलग दस्तावेज जुटाने पड़ते थेकिसान आईडी से पंजीकरण पेपरलेस होगा
पहचान की पुष्टि मुश्किलडिजिटल पहचान से सत्यापन आसान
फर्जी दावों की गुंजाइशगलत पहचान वालों पर रोक
हर योजना का अलग रिकॉर्डएकीकृत डिजिटल विवरणी

किसान आईडी को किसान-केंद्रित डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जाएगा

बता दें कि किसान आईडी अब केवल फसल बीमा तक सीमित नहीं रहेगी. कृषि क्षेत्र में आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और पीएम किसान को भी इससे जोड़ा जा सकता है.

संबंधित चर्चा में किसान आईडी को एग्रीस्टैक के लाइव उपयोग से जोड़ने की संभावना भी सामने आई है. इससे किसान-केंद्रित डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.

भविष्य में किसान से जुड़ी विभिन्न सेवाओं को एक ही डिजिटल पहचान से जोड़ने की संभावना बन रही है. इसे सेवाओं की ज्यादा लक्षित और पारदर्शी डिलीवरी की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया गया है.

एक और अहम पहलू किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ से जुड़ाव का है. किसान आईडी के उपयोग को एफपीओ के डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर भी चर्चा हुई है, जिससे एफपीओ स्तर पर किसान संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी.

किसानों के लिए अभी क्या करना जरूरी है?

किसान आईडी अनिवार्य होने की दिशा में कदम बढ़ने के बाद हर किसान के लिए समय रहते तैयारी करना फायदेमंद रहेगा.

  • जिन किसानों की किसान आईडी अभी नहीं बनी है, वे जल्द इसे बनवा लें.
  • एग्रीस्टैक के तहत अपनी विवरणी सही तरीके से दर्ज कराएं, ताकि बीमा में दिक्कत न आए.
  • अगली बार फसल बीमा कराते वक्त किसान आईडी साथ रखें.
  • एफपीओ से जुड़े किसान अपनी सदस्यता की जानकारी भी अपडेट रखें.

यह व्यवस्था कब से लागू होगी?

निदेशक चंद्रजीत चटर्जी ने सभी राज्यों को जानकारी भेज दी है, लेकिन किसान आईडी अनिवार्य होने की सटीक तारीख और राज्यवार लागू होने का शेड्यूल किसे लेकर फिलहाल इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं है. एग्रीस्टैक के लाइव उपयोग से जुड़ाव और एफपीओ डेटाबेस के साथ इंटीग्रेशन को लेकर भी अभी विचार-विमर्श ही चल रहा है. किसानों को आने वाले महीनों में राज्य सरकारों की तरफ से इस बारे में औपचारिक दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है.

नमस्ते! मैं जगत पाल ई-मंडी रेट्स का संस्थापक, बीते 7 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती-किसानी, मंडी भाव की जानकारी में महारथ हासिल है । यह देश का पहला डिजिटल कृषि न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो बीते 7 सालों से निरन्तर किसानों के हितों में कार्य कर रहा है। किसान साथियों ताजा खबरों के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now