हाइलाइट्स
- हाइड्रोपोनिक्स में बिना मिट्टी के करीब 7 से 8 दिन में हरा चारा तैयार होता है.
- ICAR के अनुसार एक ट्रे में 1 से 1.25 किलो बीज से 5.5 से 7.5 किलो चारा बन सकता है.
- अजोला में 23 प्रतिशत से अधिक कच्चा प्रोटीन पाया जा सकता है.
- ICAR के अध्ययन में रोज़ एक किलो अजोला से गायों का दूध करीब 0.6 लीटर बढ़ा.
- महाराष्ट्र सरकार ने दोनों तकनीकों को बढ़ावा देने और पशुपालकों को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है.
Hydroponic Fodder: पशुपालक अब बिना खेत और बिना मिट्टी के भी हरा चारा उगा सकते हैं. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में मक्का, जौ, गेहूं या ज्वार के बीज सिर्फ़ पानी की मदद से करीब 7 से 8 दिन में चारे की चटाई बन जाते हैं. अजोला के लिए छोटा टैंक या क्यारी काफ़ी है. सूखे और पानी की कमी वाले इलाकों में चारा उगाना और खरीदना दोनों महंगा पड़ता है, ऐसे में ये तरीके राहत दे सकते हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने चारे की कमी दूर करने के लिए हाइड्रोपोनिक और अजोला उत्पादन को बढ़ावा देने का फैसला किया है. पशुपालकों को चारा उत्पादन, संरक्षण और प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देने पर भी जोर है.
बिना मिट्टी के हाइड्रोपोनिक चारा कैसे बनता है?
हाइड्रोपोनिक्स में पौधे मिट्टी की जगह सिर्फ़ पानी के सहारे उगाए जाते हैं. मक्का या जौ के बीज इसके लिए आम तौर पर लिए जाते हैं. पूरी प्रक्रिया इस क्रम में चलती है:
- अच्छी गुणवत्ता के बीज चुनें और टूटे, खराब या फफूंद लगे बीज हटा दें.
- बीजों को साफ पानी से धोकर मिट्टी और कचरा निकालें, फिर करीब 8 से 12 घंटे भिगोएं. बीज की प्रकृति के हिसाब से समय बदल सकता है.
- पानी निकालकर बीज साफ प्लास्टिक ट्रे में फैलाएं. ट्रे में एक्स्ट्रा पानी निकलने के छेद होने चाहिए.
- ट्रे रैक में रखें और नियमित अंतराल पर पानी का छिड़काव करते रहे . बीज नम रहें, लेकिन ध्यान रखे पानी जमा न होने पाए.
- 7 से 8 दिन में जड़, तना और पत्तियों की चटाई बन जाएगी. उसे छोटे टुकड़ों में काटकर पशुओं को खिलाएं.
ICAR के अनुसार 46×83 सेंटीमीटर की एक ट्रे में 1 से 1.25 किलो बीज डालने पर लगभग 5.5 से 7.5 किलो हरा चारा तैयार हो सकता है. उत्पादन बीज की गुणवत्ता और वातावरण पर निर्भर करता है.
कम जगह में अजोला की खेती
अजोला पानी में तैरने वाला छोटा जलीय फर्न है. पशुओं को इसे प्रोटीन वाले पूरक आहार के तौर पर दिया जाता है. इसमें विटामिन और खनिज भी होते हैं. ICAR के अनुसार अजोला में 23 प्रतिशत से अधिक कच्चा प्रोटीन मिल सकता है.
घर या पशुशाला के पास छायादार जगह पर छोटा गड्ढा या टैंक बनाएं. उसमें PVC लाइनिंग या मज़बूत प्लास्टिक शीट लगाई जा सकती है. टैंक में साफ पानी भरें, वर्षा जल भी चलेगा. फिर अच्छी गुणवत्ता का अजोला कल्चर डालें, जो कृषि विज्ञान केंद्र या किसी भरोसेमंद कृषि संस्थान से लेना चाहिए.
टैंक को मच्छरदानी से ढकें, ताकि पत्तियां और गंदगी पानी में न गिरें. बढ़वार पर नज़र रखें और तैयार होने पर जालीदार बर्तन से कटाई करें. निकाले गए अजोला को साफ पानी से धोकर दें. शुरुआत में थोड़ी मात्रा सामान्य दाने में मिलाकर खिलाएं.
ICAR के एक अध्ययन में वर्षा जल वाले अजोला टैंक में करीब 10 दिन में अच्छी बढ़वार दिखी. एक टैंक से रोज़ लगभग एक किलो ताज़ा अजोला मिला.
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पशुपालकों को क्या फायदा मिल सकता है?
हाइड्रोपोनिक्स से कम ज़मीन और कम समय में हरा चारा बनता है. पानी की बचत होती है और मौसम पर निर्भरता घटती है. अजोला कम जगह में तैयार होने वाला प्रोटीन वाला पूरक आहार है, जो पशु के आहार में पोषक तत्व बढ़ाने में मदद कर सकता है.
ICAR के एक अध्ययन में गायों को रोज़ एक किलो ताज़ा अजोला खिलाने पर औसत दूध उत्पादन में करीब 0.6 लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी दर्ज हुई. नतीजा पशु की नस्ल, सेहत और पूरे आहार पर निर्भर करता है.
सावधानियाँ और बाकी सवाल
हाइड्रोपोनिक चारे की ट्रे और पानी की नियमित सफाई ज़रूरी है. फफूंद लगा या बदबूदार चारा पशुओं को न खिलाएं. अजोला के टैंक में साफ पानी रखें और दूषित कल्चर का इस्तेमाल न करें. दोनों चारे संतुलित आहार के पूरक हैं. सूखे चारे और सामान्य दाने का पूरा विकल्प नहीं हैं.










