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ब्रोकली की खेती! जानें मल्चिंग और ड्रिप से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज बढ़ाने का तरीका

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हाइलाइट्स

  • ब्रोकली ठंडी और आर्द्र जलवायु की फसल है, 18 से 23 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है.
  • एक हेक्टेयर की नर्सरी के लिए 400 से 500 ग्राम बीज की जरूरत होती है.
  • पौधे की रोपाई चार सप्ताह बाद होती है, लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर रखें.
  • फसल 65 से 80 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है.
  • औसत उपज किस्म और खेती के तरीके के आधार पर 120 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है.

Broccoli Farming Tips : ब्रोकली की खेती सितंबर से फरवरी तक सर्दी के मौसम में की जाती है और फसल 65 से 80 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. चित्तौड़गढ़ के कृषि अधिकारी सुनील कुमार खोईवाल के मुताबिक किस्म और खेती के तरीके के आधार पर औसत उपज 120 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है. रोपाई के साथ मल्चिंग और ड्रिप लगाना फायदेमंद बताया गया है.

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ग्रीन हाउस में इसकी खेती साल भर होती है. महानगरों में पोषक तत्वों की वजह से ब्रोकली की मांग बढ़ रही है.

किस मिट्टी और मौसम में उगाएं ब्रोकली?

ब्रोकली ठंडी और आर्द्र जलवायु की फसल है. 18 से 23 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए उपयुक्त माना गया है. उचित जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसका पीएच 6 से 7.5 हो.

पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. इसके बाद मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 1 से 2 जुताई कल्टीवेटर से करें. उन्नत किस्मों में पूसा ब्रोकली-1, केटीएस-1 और लकी शामिल हैं.

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नर्सरी और रोपाई का सही तरीका क्या है?

एक हेक्टेयर की नर्सरी तैयार करने के लिए 400 से 500 ग्राम बीज चाहिए. नर्सरी प्रो ट्रे में बनती है, जिसमें मृदा रहित मीडिया कोकोपीट, वर्मीकुलाइट और परलाइट 3:1:1 अनुपात में लिया जाता है. चार सप्ताह की पौध हो जाए, तब खेत में रोपाई करें.

जानकारीडिटेल
बीज (प्रति हेक्टेयर नर्सरी)400 से 500 ग्राम
लाइन से लाइन की दूरी45 सेंटीमीटर
पौधे से पौधे की दूरी30 सेंटीमीटर
रोपाई का समयचार सप्ताह की पौध होने पर
रोपाई के बादतुरंत हल्की सिंचाई
कटाई65 से 80 दिन में

रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें. मल्चिंग के साथ ड्रिप लगाना फायदेमंद है. इससे खरपतवार नहीं होती और उपज ज्यादा होती है.

मल्चिंग किसे कहते हैं?

मल्चिंग यानी पलवार खेती की एक ऐसी विधि है, जिसमें पौधों के आसपास की मिट्टी को प्लास्टिक शीट, सूखी पत्तियों, पुआल या घास जैसी प्राकृतिक अथवा कृत्रिम सामग्री से ढक दिया जाता है। इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार की वृद्धि कम करने और पौधों की जड़ों के अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है।

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खाद और उर्वरक कितना डालें?

खाद-उर्वरक मिट्टी की जांच के आधार पर करें. प्रति हेक्टेयर 10 से 15 टन गोबर की खाद डालें. इसके साथ 120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फास्फोरस और 50 किलो पोटाश देने की सलाह है.

गोबर की खाद, फास्फोरस, पोटाश और एक तिहाई नाइट्रोजन खेत की तैयारी के समय दें. बाकी नाइट्रोजन 25 और 45 दिन में दें.

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रोग-कीट से बचाव और कटाई के बाद क्या करें?

आद्र गलन रोग ज्यादा आर्द्रता और जल भराव से होता है. इसके लिए मैंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़कें. डाउनी मिल्ड्यू में पत्तियों की ऊपरी सतह पर भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं. नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़कें.

मस्टर्ड सॉ फ्लाई पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है. इसके लिए क्विनालफास 1 एमएल प्रति लीटर की दर से छिड़कें. रसचूसक कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोरपिड 0.3 एमएल प्रति लीटर की दर से छिड़कें.

कटाई के समय मुख्य शीर्ष को 10 से 15 सेंटीमीटर तने के साथ काट लें. कटाई के बाद ब्रोकली को धूप से बचाकर ठंडी जगह पर रखें. बाजार में भेजने से पहले आकार के अनुसार ग्रेडिंग जरूर करें.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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