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गेहूं में कल्ले बढ़ाने के उपाय, सरसों की खली से लेकर सिंचाई तक जानें सही तरीका

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हाइलाइट्स

  • गेहूं के कल्ले बढ़ाने के लिए खेत की तैयारी के समय 20 से 30 किलो सरसों की खली प्रति एकड़ मिलाने का सुझाव है.
  • बुवाई पर खली न दी हो तो पहली या दूसरी सिंचाई से पहले डाल सकते हैं.
  • कल्ले बनने की अवस्था यानी 20 से 35 दिन में समय पर सिंचाई जरूरी बताई गई है.
  • ह्यूमिक एसिड, माइकोराइजा, NPK 19:19:19 और माइक्रो न्यूट्रिएंट के लिए अलग-अलग मात्रा बताई गई है.

Wheat Farming Tips: खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी, खेतों में खरीफ फसलों की कटाई का काम जोरो पर है. ऐसे में गेहूँ की बुवाई के लिए खेतों को तैयार किया जा रहा है. गेहूं की फसल में अधिक कल्ले विकसित हो इसके लिए शुरुआती अवस्था से ही पोषण और सिंचाई का ध्यान रखना जरूरी है. इसके लिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा सरसों की खली, ह्यूमिक एसिड, माइकोराइजा और संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह दें रहे है. इन उपायों का इस्तेमाल करते समय मिट्टी की स्थिति, फसल की अवस्था और कृषि विभाग की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए.

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गेहूं में कल्ले यानी टिलर (Wheat Tillers) वे शाखाएं हैं, जिन पर आगे चलकर बालियां विकसित होती हैं. मजबूत कल्ले फसल के उत्पादन में योगदान देते हैं. किसानों के लिए केवल इनकी संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों का स्वस्थ विकास और सही समय पर सिंचाई भी जरूरी है. तो आइए जाने इसके बारे में.

Wheat Tillers
Image Source: ocj.com

गेहूं की बुवाई में सरसों की खली का इस्तेमाल क्यों व कैसे करें?

सरसों की खली (Mustard oil cake) को गेहूं की खेती में जैविक पोषण (Organic Nutrition) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसका इस्तेमाल मिट्टी में जैविक पदार्थ जोड़ने के लिए भी किया जाता है. हालांकि, इसका असर मिट्टी की स्थिति और खाद की गुणवत्ता पर निर्भर कर सकता है.

कृषि वैज्ञानिकों ने खेत की तैयारी के दौरान सरसों की खली को मिट्टी में मिलाने का सुझाव दिया है. इसकी बताई गई मात्रा 20 से 30 किलो प्रति एकड़ है. यदि बुवाई के समय खली का इस्तेमाल नहीं किया गया हो, तो पहली या दूसरी सिंचाई से पहले इसे बारीक करके डालने की भी सलाह दी है.

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खली की मात्रा और इस्तेमाल का तरीका तय करते समय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. खासकर तब, जब खेत में पहले से रासायनिक खाद या दूसरी जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा हो.

मिट्टी की अच्छी सेहत से बढ़ते हैं गेहूं के कल्ले

सरसों की खली गेहूं के लिए सस्ता, टिकाऊ और जैविक विकल्प है. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर पाए जाते हैं. सल्फर दानों में चमक लाता है और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है. खली मिट्टी में धीरे-धीरे घुलती है, इसलिए फसल को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है.

मिट्टी पर भी इसका असर पड़ता है. खली से मिट्टी भुरभुरी होती है और जड़ें गहराई तक फैल पाती हैं. मजबूत जड़ों वाले पौधे ज्यादा पानी और पोषक तत्व सोखते हैं और उनके गिरने का खतरा भी घटता है. कल्लों की संख्या और मजबूती पर इसका सीधा असर पड़ता है.

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सर्दियों में खली की तासीर गर्म मानी जाती है. दिसंबर-जनवरी में जब पाला पड़ता है, तब यह फसल को कुछ हद तक सुरक्षा देती है. इससे बालियां बेहतर विकसित होती हैं और दानों का वजन बढ़ता है.

ह्यूमिक एसिड और माइकोराइजा का क्या काम है?

गेहूं की फसल में सरसों की खली के अलावा ह्यूमिक एसिड और माइकोराइजा के उपयोग का भी सुझाव दिया गया है. ह्यूमिक एसिड का इस्तेमाल मिट्टी की स्थिति और जड़ों के विकास में सहायता के उद्देश्य से किया जाता है. इसकी बताई गई मात्रा 1 से 2 किलो प्रति एकड़ है.

माइकोराइजा ऐसे लाभकारी कवक हैं, जो पौधों की जड़ों के साथ संबंध बनाकर कुछ पोषक तत्वों और पानी के अवशोषण में मदद कर सकते हैं. इसकी मात्रा 4 से 6 किलो प्रति एकड़ बताई गई है. वास्तविक मात्रा उत्पाद के प्रकार, उसकी सांद्रता और उपयोग के निर्देशों के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए पैकेट पर दिए निर्देश और कृषि विशेषज्ञ की सलाह देखना जरूरी है.

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NPK और माइक्रोन्यूट्रिएंट का उपयोग

गेहूं की फसल को संतुलित पोषण देने के लिए NPK 19:19:19 का पत्तियों पर छिड़काव की भी सलाह दी गई है. इसे प्रति लीटर पानी में 4 से 5 ग्राम मिलाकर फसल पर छिड़काव किया जाता है. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए मिक्स माइक्रोन्यूट्रिएंट की 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल करें . जिससे पौधों की समग्र वृद्धि और उपज में सुधार होगा.

इन मात्राओं को हर खेत के लिए एक जैसा निर्देश नहीं मानना चाहिए. किसानों द्वारा मिट्टी की अवस्था के अनुसार फसल में पोषक तत्वों की कमी, मिट्टी की जांच, उत्पाद के लेबल और इस्तेमाल की विधि के आधार पर सही मात्रा तय की जानी चाहिए. जरूरत के बिना खाद या पोषक तत्व डालने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है.

सिंचाई का सही समय क्यों जरूरी है?

गेहूं में कल्ले बनने की अवस्था के दौरान पानी की उपलब्धता पौधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है. कल्ले बनने की अवस्था 20 से 35 दिन की है और इस दौरान समय पर सिंचाई जरूरी है. वहीं मिट्टी में मौजूद दीमक, निमाटोड (जड़ों में लगने वाले सूक्ष्म कृमि) और कुछ फंगल रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सरसों की खली की तीखी गंध से इनका प्रकोप कम होता है, जिससे कल्लों का विकास बिना रुकावट चलता है.

सिंचाई का समय मिट्टी की नमी, मौसम, बुवाई की तारीख और खेत की स्थिति के अनुसार तय करना चाहिए. जरूरत से ज्यादा या कम पानी देने से फसल का विकास प्रभावित हो सकता है. इसलिए केवल दिन गिनने के बजाय खेत की वास्तविक स्थिति का भी आकलन करें.

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नोट: किसानों के लिए बेहतर तरीका यही है कि खाद, पोषक तत्व और सिंचाई का प्रबंधन फसल की जरूरत के अनुसार करें. किसी भी रसायन, उर्वरक या कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग से मार्गदर्शन लें.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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