हाइलाइट्स
- मूंगफली की फसल आमतौर पर 100 से 120 दिन में तैयार हो जाती है, उसके बाद गेहूं बोया जा सकता है.
- सीमित सिंचाई और कम खाद वाले खेतों के लिए सुजाता और C-306 जैसी देसी किस्में सुझाई गई हैं.
- पर्याप्त पानी वाले खेतों के लिए HD-2932, पूसा तेजस और HI-1544 किस्मों का नाम लिया गया.
- देसी किस्मों में ज़्यादा सिंचाई या खाद देने से फसल गिरने यानी लॉजिंग का खतरा रहता है.
Wheat Farming Tips : शिवपुरी (एमपी) में मूंगफली की फसल कटने के बाद किसान खेत खाली छोड़ने की जगह गेहूं की खेती कर सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक बुवाई से पहले किस्म का चुनाव सबसे अहम है. यह फैसला खेत में सिंचाई की सुविधा और जमीन की स्थिति देखकर लेना चाहिए.
मूंगफली की फसल आमतौर पर 100 से 125 दिन में तैयार हो जाती है. डॉ. सिंह का कहना है कि इसके बाद कम लागत में गेहूं लेकर खेत का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है.
कम पानी वाले खेत में कौन सी किस्म?
जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा सीमित है और किसान कम खाद डालना चाहते हैं, वहाँ डॉ. सिंह ने गेहूं की देसी किस्में सुझाई हैं. उन्होंने सुजाता और C-306 का नाम लिया. इन किस्मों की रोटी और खाने की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है.
इस किस्म के लिए कुछ सावधानियाँ बरतने की भी सलाह दी है. ज़्यादा सिंचाई या खाद देने पर फसल गिर सकती है. इसे लॉजिंग कहते हैं. इसलिए इन किस्मों में पानी और खाद का हिसाब रखना होगा.
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पर्याप्त पानी हो तो क्या बोएँ?
जिन किसानों के पास सिंचाई का पर्याप्त पानी और बेहतर संसाधन हैं, उन्हें डॉ. सिंह ने गेहूं की नई अर्धबौनी किस्मों पर विचार करने को कहा. उन्होंने HD-2932, पूसा तेजस और विश्वविद्यालय की HI-1544 किस्म का नाम लिया.
| खेत की स्थिति | सुझाई गई किस्में | ध्यान रखने की बात |
|---|---|---|
| सीमित सिंचाई, कम खाद | सुजाता, C-306 (देसी) | ज़्यादा पानी या खाद से लॉजिंग का खतरा |
| पर्याप्त सिंचाई, बेहतर संसाधन | HD-2932, पूसा तेजस, HI-1544 (नई अर्धबौनी) | स्थानीय जलवायु और बुवाई का समय देखें |
किस्म चुनते समय और क्या देखें?
डॉ. सिंह के मुताबिक किस्म तय करते समय स्थानीय जलवायु, बुवाई का समय और मिट्टी की स्थिति की जानकारी लेना ज़रूरी है. किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और बाज़ार की मांग भी समझनी चाहिए, ताकि खेती में उचित लाभ मिल सके. सही किस्म से बेहतर उत्पादन की संभावना रहती है.
किसान गेहूं बुवाई की सही तारीख, बीज की मात्रा, खाद की मात्रा और अलग-अलग किस्मों की पैदावार की जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी ले .
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(डिस्क्लेमर : खेती या पशुपालन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले स्थानीय कृषि/पशु विशेषज्ञ से सलाह लें.)










