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धान कटाई के बाद गेहूं की बुवाई में न करें जल्दबाजी, कृषि वैज्ञानिकों से जानें सही समय

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हाइलाइट्स

  • शाहजहांपुर के कई किसान अक्टूबर के दूसरे-तीसरे सप्ताह में गेहूं बोने की योजना बना रहे हैं.
  • कृषि वैज्ञानिकों ने बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह में करने की सलाह दी है.
  • अक्टूबर की गर्मी में पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं और कल्ले कम बनते हैं.
  • नवंबर के पहले सप्ताह में बोई फसल की पहली सिंचाई 22 से 25 दिन बाद होती है.

Wheat Sowing: शाहजहांपुर में धान की कटाई के बाद कुछ किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने उन किसानों को गेहूं की बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है. सलाह है कि बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह में हो, ताकि पहली सिंचाई के समय ठंड मिले और पौधों में ज्यादा कल्ले निकलें. अक्टूबर की गर्मी गेहूं की बुवाई उचित समय नहीं है.

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यदि आप भी अक्टूबर के दूसरे और तीसरे सप्ताह में ही गेहूं बोने की योजना बना रहे हैं. तो आपको कृषि वैज्ञानिकों की ये सलाह अवश्य माननी चाहिए ताकि आप गेहूँ की अच्छी पैदावार ले सकें.

अक्टूबर में बुवाई से क्या नुकसान?

शाहजहांपुर के किसान अजय कुमार ने ई मंडी रेट्स को बताया कि धान कटते ही गेहूं बोना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक अक्टूबर में तापमान थोड़ा ज़्यादा रहता है और गर्म मौसम में बोने से पौधों की ग्रोथ बिगड़ती है.

गर्मी में गेहूं के पौधे तेज़ी से सीधे ऊपर की तरफ बढ़ने लगते हैं. कल्ले यानी जड़ के पास से निकलने वाली नई शाखाएँ बहुत कम बनती हैं. पौधे कमज़ोर रह जाते हैं और एक-दो कल्ले ही बन पाते हैं. कल्ले कम होने का सीधा असर पैदावार पर पड़ता है. अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बुवाई से फसल को भारी नुकसान की आशंका जताई गई है.

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नवंबर के पहले सप्ताह की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करनी चाहिए. जबकि अजय कुमार के मुताबिक किसानों को अक्टूबर के अंत तक रुकना चाहिए.

नवंबर तक तापमान में गिरावट आती है और मौसम में ज़रूरी नमी आ जाती है. नवंबर का पहला सप्ताह गेहूं की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है. समय पर बोई फसल की ग्रोथ अच्छी रहती है और पौधे मौसम के हिसाब से मजबूत बनते हैं. कृषि वैज्ञानिकों कि माने तो सही समय पर और सही विधि से बुवाई करने पर ही अच्छी पैदावार और बेहतर लाभ मिल सकता है.

ज्यादा कल्ले से क्या फायदा?

गेहूं में कल्ले ज़्यादा बनने के ये फायदे बताए गए हैं:

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  • फसल का फैलाव बेहतर होता है.
  • बालियां ज़्यादा संख्या में निकलती हैं.
  • घनी और मजबूत फसल में प्रति एकड़ कुल उत्पादन बढ़ता है.
  • जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं, इसलिए तेज़ हवा में फसल गिरने का खतरा काफी कम होता है.

गेहूँ में पहली सिंचाई का सही समय

नवंबर के पहले सप्ताह में बोई गेहूँ की फसल की सिंचाई करीब 22 से 25 दिन बाद की जाती है. नवंबर के अंत तक अच्छी ठंड शुरू हो जाती है, जो गेहूं के विकास के लिए फायदेमंद है. ठंड में पहली सिंचाई मिलने पर पौधे तेज़ी से कल्ले निकालना शुरू कर देते हैं.

गेहूं की किस्म, बीज की मात्रा, खाद और बुवाई की विधि का ब्योरा सलाह में नहीं है. यह भी नहीं बताया गया कि तापमान कितना होने पर बुवाई सही रहेगी. साफ़ नहीं है कि यही समय शाहजहांपुर के बाहर के इलाकों पर भी लागू होगा या नहीं.

किसान इन बातों को ध्यान में रखकर किस्म चुनें?

शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) में गेहूं की किस्म का चयन किसान मुख्य रूप से बुआई का समय, सिंचाई की उपलब्धता, मिट्टी की स्थिति, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उपज क्षमता के आधार पर करें।

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आधारविवरण
बुआई का समयसमय से (अक्टूबर अंत से 15-25 नवंबर), विलंब से (25 नवंबर के बाद से दिसंबर), या अगेती
सिंचाईसिंचित (पूरी सिंचाई उपलब्ध) या असिंचित/सीमित सिंचाई
रोग प्रतिरोधपीला रतुआ (Yellow rust) और भूरा रतुआ (Brown rust) के प्रति प्रतिरोधक किस्में प्राथमिकता दें
मिट्टीउपजाऊ मैदानी भूमि; ऊसर/लवणीय भूमि पर विशेष किस्में (जैसे KRL श्रृंखला)
उपज व गुणवत्ताउच्च उपज क्षमता + अच्छी चपाती गुणवत्ता
स्थानीय परीक्षणKVK शाहजहांपुर या जिला कृषि अधिकारी की सिफारिश
  • DBW-187 (करण वंदना): KVK शाहजहांपुर में परीक्षण में HD-2967 से लगभग 10% अधिक उपज (औसत 60+ क्विंटल/हेक्टेयर)। NWPZ के लिए अनुशंसित।
  • DBW-303 (करण वैष्णवी), DBW-222 (करण नरेंद्र), HD-3086 (पूसा गौतमी), HD-2967
  • पुरानी लेकिन अभी भी उपयुक्त: UP-2338, WH-542, PBW-343, K-9107 (देवा), K-307 (शताब्दी), PBW-550, DBW-17

विलंब से बुआई (25 दिसंबर तक) + सिंचित:

  • DBW-14, DBW-16, Raj-3765, PBW-373, K-9162, UP-2425, Naina (K-9533), HD-3298 आदि।

असिंचित/सीमित सिंचाई:

  • K-8027 (मगहर), K-8962, K-9465, K-9351, HD-2888 आदि।

नई/उच्च उपज वाली (NWPZ के लिए ICAR-IIWBR):

  • अगेती/समय से: DBW-327, DBW-370 (करण वैदेही), DBW-371, DBW-372 आदि (औसत उपज 74-81 क्विंटल/हेक्टेयर तक संभावित)।

व्यावहारिक सलाह

  • प्रमाणित बीज ही लें – राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगम, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK शाहजहांपुर) या अधिकृत डीलर से।
  • बुआई से पहले बीज उपचार जरूर करें।
  • मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक दें।
  • नवीनतम सिफारिश के लिए KVK शाहजहांपुर या जिला कृषि अधिकारी से संपर्क करें, क्योंकि हर साल नई किस्में आती रहती हैं।
  • एक ही किस्म पर निर्भर न रहें:- 2-3 किस्मों का मिश्रण बोना जोखिम कम करता है।

ये भी पढ़े – सरसों किसानों को सलाह! DAP की जगह डालें SSP… 3:1 के फॉर्मूले से होगी रबी की बुवाई

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स्रोत: ICAR-IIWBR, उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की क्षेत्रवार सिफारिशें, KVK शाहजहांपुर के ऑन-फार्म ट्रायल और CSAUAT कानपुर।

डिस्क्लेमर : गेहूँ की किस्म का चयन स्थानीय मौसम और मिट्टी के अनुसार थोड़ा बदलाव संभव है, इसलिए नवीनतम सलाह के लिए कृषि विभाग/KVK से पुष्टि कर लें।

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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