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सरसों किसानों को सलाह! DAP की जगह डालें SSP… 3:1 के फॉर्मूले से होगी रबी की बुवाई

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हाइलाइट्स

  • विभाग की सलाह: डीएपी की जगह 3 बैग एसएसपी और 1 बैग यूरिया
  • गंगापुर सिटी क्षेत्र में 1500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत, उपलब्धता सिर्फ़ 100 मीट्रिक टन
  • 3:1 फॉर्मूले से करीब 24 किलो फास्फोरस, 16 किलो सल्फर, 23 किलो नाइट्रोजन
  • सल्फर से सरसों जैसी तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है

DAP Alternative: रबी की बुवाई के बीच डीएपी की किल्लत झेल रहे किसानों को कृषि विभाग ने एक सीधा विकल्प बताया है. विभाग के मुताबिक DAP की जगह 3 बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और 1 बैग यूरिया डाला जा सकता है, यानी 3:1 का अनुपात. गंगापुर सिटी क्षेत्र में 1500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, जबकि उपलब्ध सिर्फ़ 100 मीट्रिक टन बताई जा रही है.

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बता दें कि सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी, दोनों जगह विभाग ने यही सलाह दी है. असल में सरसों की बुवाई (Mustard sowing) इन दिनों चल रही है और डीएपी की मांग तेज है. खास बात ये है कि विभाग किसानों को घबराने के बजाय खेत की जरूरत के हिसाब से खाद चुनने को कह रहा है. किसानों के लिए बड़ी सलाह: DAP छोड़ें, कम लागत में SSP से बढ़ाएं फसल की पैदावार

1500 टन मांग, 100 टन सप्लाई: पेच कहां?

सूत्रों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और गेहूं की बुवाई के लिए गंगापुर सिटी क्षेत्र को करीब 1500 मीट्रिक टन डीएपी चाहिए. मौजूदा उपलब्धता सिर्फ़ 100 मीट्रिक टन है. यानी जरूरत का करीब 7% ही हाथ में है. ऐसे में हर किसान को DAP मिल पाना मुश्किल है.

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DAP Alternative

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कमी की वजह रूस-यूक्रेन युद्ध बताई गई है, जिससे इस साल मांग के मुकाबले डीएपी पर्याप्त नहीं पहुंचा. वहीं हरीश मीणा ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को पत्र लिखकर पर्याप्त डीएपी देने की मांग की. उन्होंने वितरकों द्वारा थोपी जा रही अनिवार्यता हटाने की भी मांग रखी.

DAP की जगह क्या डालें किसान?

कृषि विभाग का कहना है कि किसान सिर्फ़ डीएपी के भरोसे न रहें. सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू लाल मीना ने बताया कि एसएसपी डीएपी का उपयोगी विकल्प है. फसल और मिट्टी की जरूरत के हिसाब से दूसरे उर्वरक (Fertilizer) भी वैज्ञानिक तरीके से डाले जा सकते हैं.

सवाई माधोपुर में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) लखपत लाल मीणा ने 3:1 का फॉर्मूला दिया है. यानी एसएसपी के 3 कट्टे और यूरिया का 1 कट्टा. विभाग के मुताबिक यह मिश्रण पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करता है. मिट्टी की उर्वरता (soil fertility) बनाए रखने में भी मदद करता है.

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प्रति हेक्टेयर, यानी करीब 4 बीघा खेत के लिए यही 3 बैग एसएसपी और 1 बैग यूरिया की सलाह है. लखपत लाल मीणा ने किसानों से डीएपी की उपलब्धता को लेकर अनावश्यक चिंता न करने की अपील भी की.

डीएपी बनाम एसएसपी-यूरिया: कितना पोषण?

पिन्टू लाल मीना के मुताबिक 50 किलो के एक बैग डीएपी (18:46:0) से करीब 9 किलो नाइट्रोजन और 23 किलो फास्फोरस मिलता है. इसके मुकाबले 50-50 किलो के 3 बैग एसएसपी और करीब 1 बैग यूरिया देने पर तस्वीर बदल जाती है. पूरा हिसाब नीचे टेबल में देखिए.

पोषक तत्व1 बैग डीएपी (50 किलो)3 बैग एसएसपी + 1 बैग यूरिया
फास्फोरसकरीब 23 किलोकरीब 24 किलो
नाइट्रोजनकरीब 9 किलोकरीब 23 किलो
सल्फर–करीब 16 किलो
कैल्शियम–करीब 30 किलो

खास बात ये है कि फास्फोरस लगभग बराबर रहता है. फर्क सल्फर और कैल्शियम का है, और नाइट्रोजन भी ढाई गुना के आसपास (9 बनाम 23 किलो) मिलती है. हालांकि बैग की संख्या 4 हो जाती है, यानी ढुलाई और खर्च का हिसाब अलग से लगाना होगा.

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सरसों में सल्फर से तेल बढ़ेगा क्या?

विभाग के अनुसार एसएसपी में करीब 16% फास्फोरस और 11% सल्फर होता है, साथ में 21% कैल्शियम. सल्फर खासकर तिलहनी फसलों के लिए उपयोगी माना जाता है. सरसों में इसके इस्तेमाल से तेल की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है.

वहीं फास्फोरस पौधों की जड़ों के विकास और फसल की बढ़त के लिए जरूरी पोषक तत्व है. सवाई माधोपुर के कृषि विभाग ने सरसों और चना, दोनों फसलों में इस विकल्प को उपयोगी बताया है. यानी एक ही खाद से दो काम.

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किन खेतों में आजमाएं यह फॉर्मूला?

विभाग ने उन खेतों का खास जिक्र किया है, जहां इस बार बाजरा, उड़द या तिल की खेती हुई थी और अब सरसों या चना बोना है. ऐसे खेतों में किसान एसएसपी और यूरिया का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी.

विभाग का कहना है कि एसएसपी डीएपी की तुलना में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. राजस्थान में जिंक और बोरॉन से संवर्धित एसएसपी भी मिलती है. हालांकि पोषक तत्वों की मात्रा उत्पाद के ग्रेड के अनुसार अलग हो सकती है.

खाद खरीदते वक्त क्या ध्यान रखें?

सहायक निदेशक कृषि सियाराम मीणा की अपील है कि किसान अधिकृत विक्रेता से ही खाद खरीदें और पक्का बिल जरूर लें. बैग पर लिखा ग्रेड और पोषक तत्वों की मात्रा देखना भी जरूरी है. उर्वरक प्रबंधन मृदा परीक्षण और फसल की असल जरूरत के आधार पर होना चाहिए.

डीएपी न मिलने पर किसान एसएसपी, यूरिया या एनपीके के विकल्प अपना सकते हैं. तकनीकी मार्गदर्शन के लिए निकटतम कृषि पर्यवेक्षक या कृषि अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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