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Trichoderma Banane ki Vidhi: घर पर ट्राइकोडर्मा बनाकर मृदा का उपचार, फसलों की सेहत के लिए वरदान

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हाइलाइट्स

  • फसलों के रोग से होने वाले कुल नुकसान का 50% से ज्यादा मृदा जनित रोगकारकों से होता है.
  • 28 किलो कंडों में 60 ग्राम ट्राइकोडर्मा शुद्ध कल्चर मिलाकर घर पर तैयार किया जाता है.
  • ढेर करीब 28 से 30 दिन में पूरी तरह हरा दिखने लगता है.
  • बुवाई से पहले 20 किलो प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिलाया जाता है.

Trichoderma Banane ki Vidhi : किसान घर पर ही गोबर के कंडों से ट्राइकोडर्मा तैयार कर सकते हैं और मिट्टी के रोगों पर काबू पा सकते हैं. 28 किलो कंडों में 60 ग्राम शुद्ध कल्चर मिलाने के बाद करीब 28 से 30 दिन में ढेर हरा हो जाता है. फिर बुवाई से पहले 20 किलो प्रति एकड़ की दर से इसे मिट्टी में मिलाया जाता है.

फसलों में रोग से जितना कुल नुकसान होता है, उसका 50% से भी ज्यादा मिट्टी में पलने वाले रोगकारकों की वजह से होता है. इन्हीं से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा नाम की मित्र फफूंद इस्तेमाल होती है. यह सस्ता और जैविक तरीका है.

मिट्टी के रोग इतना नुकसान क्यों करते हैं?

वजह ये है कि रोगकारक मिट्टी में रहते हैं और बीज से लेकर जड़ तक हमला करते हैं. राईजोक्टोनिया, स्केलेरोशियम, स्केलेरोटोनिया, मक्रोफोमिना एपीथियम, फाइटोफथेरा और फ्यूजेरियम इनमें प्रमुख हैं.

इनसे बीज सड़न, आर्द्रगलन, मूल विगलन, अंगमारी और म्लानि रोग होते हैं. यानी फसल अंकुरण से लेकर बढ़वार तक खतरे में रहती है. फफूंद से होने वाले इन रोगों के नियंत्रण में ट्राइकोडर्मा बहुत उपयोगी बताया गया है.

ट्राइकोडर्मा आखिर करता क्या है?

ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद है, जिसकी अलग-अलग प्रजातियों से रोगों का जैविक नियंत्रण संभव है. मुख्य रूप से हरजीनियम और विरिडी प्रजातियां इस्तेमाल होती हैं. इसका प्रयोग बीजोपचार, जड़ोपचार और मृदा उपचार, तीनों में किया जाता है.

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घर पर ट्राइकोडर्मा कैसे बनाएं?

किसान घरेलू विधि में गोबर के उपलों यानी कंडों का इस्तेमाल करके ट्राइकोडर्मा बना सकते है. इसके लिए खेत में छायादार जगह चुनें और उपलों को कूटकर बारीक कर लें. इसमें 28 किलो या करीब 85 सूखे कंडे लगते हैं.

इसमें पानी मिलाकर हाथ से मिलाएं, जब तक ढेर गाढ़ा भूरा न दिखने लगे. फिर उच्च गुणवत्ता का 60 ग्राम ट्राइकोडर्मा शुद्ध कल्चर इसमें मिला दें. ढेर को पुराने जूट के बोरे से अच्छी तरह ढकें और बोरे के ऊपर से पानी से भिगो दें. बीच-बीच में बोरे पर पानी छिड़कते रहें, ताकि नमी बनी रहे.

12 से 16 दिन बाद ढेर को फावड़े से नीचे तक पलटकर मिला दें. फिर से बोरे से ढकें और पानी का छिड़काव जारी रखें.

30 दिन में कैसे बदलता है ढेर?

समयक्या दिखता है
12-16 दिनढेर को फावड़े से पलटने का समय
18-20 दिनढेर पर हरे रंग की फफूंद दिखने लगती है
28-30 दिनढेर पूरी तरह हरा, मृदा उपचार के लिए तैयार

खास बात ये है कि अगली बार नया ढेर बनाने के लिए तैयार ट्राइकोडर्मा का थोड़ा हिस्सा बचाकर रखा जा सकता है. इससे हर बार नया कल्चर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

तीन बातें जरूरी हैं. पहली, जगह छायादार हो, ताकि ढेर में सही नमी बनी रहे. दूसरी, तापमान 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहे. तीसरी, ढेर को समय-समय पर पलटते रहें.

खेत में कब और कितना डालें?

तैयार ट्राइकोडर्मा को बुवाई से पहले 20 किलो प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिला दें. बुवाई के बाद पहली निराई-गुड़ाई के समय भी इसे जमीन में मिलाया जा सकता है.

“ट्राइकोडर्मा बनाने की विधि” से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल – जवाब (FAQs)

ट्राइकोडर्मा कितने दिन में तैयार हो जाता है?

घरेलू विधि से ट्राइकोडर्मा का ढेर करीब 28 से 30 दिन में पूरी तरह हरा दिखने लगता है. हरी फफूंद 18-20 दिन बाद दिखनी शुरू होती है. 12 से 16 दिन पर ढेर को पलटना जरूरी है. हरा होने के बाद इसे मृदा उपचार में इस्तेमाल करें.

ट्राइकोडर्मा प्रति एकड़ कितना डालना चाहिए?

बुवाई से पहले घर पर तैयार ट्राइकोडर्मा को 20 किलो प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिलाया जाता है. बुवाई के बाद पहली निराई-गुड़ाई के समय भी इसे भूमि में मिलाया जा सकता है. इसे मृदा उपचार की तरह इस्तेमाल करें.

गोबर के कंडे से ट्राइकोडर्मा कैसे बनाते हैं?

छायादार जगह पर 28 किलो कंडों को कूटकर बारीक करें, पानी मिलाकर गाढ़ा भूरा ढेर बनाएं और उसमें 60 ग्राम शुद्ध कल्चर मिलाएं. ढेर को जूट के बोरे से ढककर पानी छिड़कते रहें. 12-16 दिन बाद पलटें, फिर 28-30 दिन में तैयार.

ट्राइकोडर्मा किन रोगों में काम आता है?

ट्राइकोडर्मा मृदा जनित फफूंद रोगों के नियंत्रण में काम आता है, जिनमें बीज सड़न, आर्द्रगलन, मूल विगलन, अंगमारी और म्लानि प्रमुख हैं. ये रोग राईजोक्टोनिया, फाइटोफथेरा और फ्यूजेरियम जैसे रोगकारकों से होते हैं. इसका प्रयोग बीज, जड़ और मिट्टी उपचार में होता है.

ट्राइकोडर्मा बनाने के लिए कितना तापमान जरूरी है?

ट्राइकोडर्मा बनाने के लिए 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान जरूरी है. साथ में जगह छायादार होनी चाहिए, ताकि ढेर में नमी बनी रहे. ढेर को समय-समय पर पलटते रहना भी जरूरी है. बोरे पर पानी छिड़कते रहने से नमी कायम रहती है.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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