हाइलाइट्स
- श्योपुरकलां से कोटा तक 93.22 किलोमीटर नई रेल लाइन प्रस्तावित.
- मार्ग पर कुल नौ स्टेशन होंगे, जिनमें सात नए स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है.
- फाइनल लोकेशन सर्वे के आधार पर बनी डीपीआर की लागत 2,376.84 करोड़ रुपये है.
- मार्ग पर 3 महत्वपूर्ण पुल, 32 बड़े पुल, 107 छोटे पुल और 59 रोड अंडरब्रिज प्रस्तावित हैं.
- नवंबर 2024 की कार्ययोजना में परियोजना को 2027-28 तक पूरा करने का लक्ष्य था.
Kota-Sheopur New Railway Line: राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच रेल कनेक्टिविटी को लेकर श्योपुर-कोटा नई रेल लाइन का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड तक पहुंच गया है. श्योपुरकलां से कोटा के बीच 93.22 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग बनाने की योजना है. इस रूट पर कुल 9 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं. परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में 2,376.84 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान रखा गया है.
इस रेल लाइन के बनने पर श्योपुर क्षेत्र के लोगों को कोटा से सीधा रेल संपर्क मिल सकेगा. फिलहाल परियोजना को रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है. प्रस्ताव भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि निर्माण कार्य को अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है.
104.96 से घटकर 93.22 KM हुआ रूट
श्योपुरकलां-कोटा रेल लाइन की लंबाई पहले 104.96 किलोमीटर प्रस्तावित थी. फाइनल लोकेशन सर्वे के बाद इसमें बदलाव किया गया और अब इसकी लंबाई 93.22 किलोमीटर निर्धारित की गई है. यानी शुरुआती प्रस्ताव की तुलना में रेल मार्ग 11.74 किलोमीटर छोटा हुआ है.
इस रूट में श्योपुरकलां और श्री कल्याणपुरा दो मौजूदा स्टेशन शामिल रहेंगे. इनके अलावा सात नए स्टेशन बनाने की योजना है. प्रस्तावित नए स्टेशनों के नाम इस प्रकार हैं:
- कन्हापुर
- खेड़ा
- पीपल्दा कलां
- इटावा
- दौलतपुरा
- बड़ौद
- सुल्तानपुर
इस तरह नए रेल मार्ग पर कुल 9 स्टेशन होंगे. पश्चिम मध्य रेलवे की परियोजना सूची में भी इस रेल लाइन की लंबाई 93.22 किलोमीटर और स्टेशनों की संख्या 9 दर्ज है.
पुल और अंडरब्रिज बनाने की भी योजना
परियोजना की DPR में 2,376.84 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित की गई है. निर्माण योजना में रेलवे ट्रैक के साथ कई तरह के पुल और अंडरब्रिज भी शामिल हैं. इसमें 3 बड़े महत्वपूर्ण पुल, 32 बड़े पुल और 107 छोटे पुल बनाने का प्रावधान है.
सड़क यातायात को जारी रखने के लिए 59 रोड अंडरब्रिज बनाने की योजना भी रखी गई है. इन निर्माण कार्यों का उद्देश्य रेल मार्ग के साथ सड़क आवागमन की व्यवस्था बनाए रखना है.
इस परियोजना की तैयारी कई साल पहले शुरू हुई थी. फाइनल लोकेशन सर्वे को 31 जनवरी 2023 को मंजूरी मिली थी. इसके बाद 7 मई 2023 को सर्वे का ठेका दिया गया. सर्वे पूरा होने पर 10 मई 2024 को DPR रेलवे बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजी गई थी.
रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार
श्योपुरकलां-कोटा रेल लाइन को वर्ष 2010-11 में उत्तर मध्य रेलवे की पिंक बुक में शामिल किया गया था. बाद में 29 मार्च 2022 को रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना का काम पश्चिम मध्य रेलवे को सौंप दिया.
नवंबर 2024 की कार्ययोजना में DPR की मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण के लिए 18 महीने का समय निर्धारित किया गया था. उस कार्ययोजना में परियोजना को 2027-28 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि, यह समय-सीमा रेलवे बोर्ड की मंजूरी, जमीन की उपलब्धता और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं पर निर्भर है. इसे निर्माण पूरा होने की पक्की तारीख नहीं माना जा सकता.
रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, संशोधित सर्वे में प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई 104.96 किलोमीटर से घटाकर 93.22 किलोमीटर की गई है. फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा करके प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजे गए हैं.
नई रेल लाइन बनने से इसके आसपास के कस्बों और गांवों को कोटा से रेल सुविधा मिलने की उम्मीद है. शिक्षा, इलाज और व्यापार के लिए कोटा आने-जाने वाले लोगों को एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिल सकता है. फिलहाल सबसे अहम कदम रेलवे बोर्ड की मंजूरी है. परियोजना की स्वीकृति और आगे की कार्रवाई के बाद ही निर्माण की स्थिति और समय-सीमा को लेकर तस्वीर साफ होगी.
सोर्स -सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, कोटा रेल मंडल










