IMD अलर्ट- हाइलाइट्स
- ओडिशा में आज कहीं-कहीं बहुत ज़्यादा भारी बारिश की चेतावनी, कालाहांडी में 34 सेमी पानी गिरा
- बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र अगले 24 घंटे में उत्तर ओडिशा-बंगाल की ओर बढ़ेगा
- छत्तीसगढ़ में 23 से 25 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी
- नागालैंड-मणिपुर और ओडिशा के कई जिलों में अचानक बाढ़ का जोखिम भी बताया गया
IMD Weather Alert 23 August 2026: बंगाल की खाड़ी में बने एक निम्न दाब क्षेत्र ने पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. मौसम विभाग ने साफ कहा है कि आज, 23 अगस्त को ओडिशा में कहीं-कहीं बहुत ज़्यादा भारी बारिश हो सकती है, वहीं 26 अगस्त तक राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने वाला है. असल में बीते 24 घंटों में ही ओडिशा के कालाहांडी में 34 सेमी और त्रिपुरा के लम्बुचेरा इलाके में 22 सेमी तक पानी गिर चुका है, जो इस मौसमी सिस्टम की ताकत को साफ दिखाता है.
मौसम विभाग (IMD) की ताज़ा प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यह निम्न दाब क्षेत्र पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों के पास उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना है. यह 23 अगस्त की सुबह 05:30 बजे बना और सुबह 08:30 बजे भी उसी इलाके में बना रहा. खास बात ये है कि अगले 24 घंटों के दौरान इसके उत्तर ओडिशा और उससे सटे गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल से होते हुए उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है, यानी असर सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं रहेगा.
किन-किन राज्यों में कब तक अलर्ट
छत्तीसगढ़ में 23 से 25 अगस्त के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है. वहीं गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में 23-24 अगस्त और झारखंड में 23 से 27 अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. बिहार को भी छूट नहीं मिली है — यहां 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश का अलर्ट है, साथ ही 24 अगस्त को मध्यम से गंभीर स्तर की बिजली गिरने की गतिविधि की भी आशंका जताई गई है.
दरअसल इस पूरे सिस्टम के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है. मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर मध्य क्षोभमंडल स्तरों में एक चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है, उत्तरी हरियाणा और पूर्वोत्तर असम के आसपास भी ऐसी ही स्थितियां बनी हैं. इसके अलावा एक पश्चिमी विक्षोभ भी 30°N अक्षांश के उत्तर में सक्रिय है. इतने सारे सिस्टम एक साथ सक्रिय होने से ही मानसून इतना आक्रामक हो गया है.
पिछले 24 घंटे में कहां-कितनी बारिश दर्ज हुई
हरियाणा में भी बीते 24 घंटों में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज हुई है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, असम, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों में भी 7-11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई.
सबसे ज़्यादा बारिश वाले टॉप स्टेशन इस तरह रहे:
| राज्य/इलाका | स्टेशन | बारिश (सेमी) |
|---|---|---|
| ओडिशा | कालाहांडी | 34 |
| त्रिपुरा | लम्बुचेरा (पश्चिम) | 22 |
| हरियाणा | शहजादपुर | 14 |
| हिमाचल प्रदेश | मंडी | 11 |
| मध्य महाराष्ट्र | तामिनी-मुलशी घाट (पुणे) | 11 |
| छत्तीसगढ़ | मनेन्द्रगढ़ | 11 |
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?
राजधानी के लोगों के लिए भी राहत की खबर नहीं है. 23 अगस्त को दिल्ली में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम के बीच ज़्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. अधिकतम तापमान 33-35°C के बीच रहने का अनुमान है. 24 अगस्त को सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर हल्की बारिश संभव है, जबकि 25-26 अगस्त को आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा और तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 34-36°C तक पहुंच सकता है.
अचानक बाढ़ का खतरा किन जिलों में सबसे ज़्यादा?
मौसम विभाग ने 24 अगस्त तक के लिए अलग से फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ का जोखिम भी बताया है. यह जोखिम नागालैंड (कोहिमा, किफिरे, मोन, पेरेन, दीमापुर, वोखा, जुन्हेबोटो, तुएनसांग), मणिपुर (बिष्णुपुर, इंफाल ईस्ट-वेस्ट, चंदेल, चुराचांदपुर, सेनापति, उखरुल, तामेंगलोंग) और ओडिशा के बरगढ़, देवगढ़, क्योंझरगढ़, मलकानगिरी, मयूरभंज, नवापारा, नवरंगपुर, संबलपुर और सुंदरगढ़ जिलों में कम से मध्यम स्तर का बताया गया है. यानी इन इलाकों में सतह पर पानी बहने और जलभराव की स्थिति बन सकती है.
किसानों के लिए क्या सलाह दी गई है?
खेती के लिहाज़ से भी यह बारिश चुनौती लेकर आई है. ओडिशा में खरीफ धान, मक्का, दालों और सब्ज़ियों के खेतों से अतिरिक्त पानी तुरंत निकालने की सलाह दी गई है, वहीं छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी सोयाबीन, कपास और गन्ने के खेतों में जल निकासी का सही इंतज़ाम रखने को कहा गया है. हिमाचल प्रदेश में किसानों को खीरा, लौकी, करेला जैसी तैयार सब्ज़ियों की जल्द कटाई करने की सलाह दी गई है, ताकि बारिश से पहले फसल सुरक्षित रखी जा सके.
अगले एक हफ़्ते तक प्रायद्वीपीय भारत यानी दक्षिण के राज्यों में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है, लेकिन पूर्वी और मध्य भारत के लिए अभी राहत के आसार नहीं दिख रहे. मौसम विभाग ने साफ किया है कि जैसे-जैसे लीड पीरियड बढ़ता है, यानी पूर्वानुमान जितना आगे की तारीख का होता है, उसकी सटीकता उतनी ही कम होती जाती है — ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन और जिलेवार चेतावनियों पर लगातार नज़र बनाए रखने की सलाह दी गई है.










