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गेहूं की अगेती बुवाई के लिए ICAR-IIWBR ने सुझाई 9 किस्में, होगी बंपर पैदावार

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गेहूं की अगेती बुवाई-हाइलाइट्स

  • ICAR-IIWBR, करनाल ने गेहूं और जौ की बुवाई 1 से 15 नवंबर के बीच पूरी करने को कहा.
  • उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के सिंचित खेतों के लिए DBW 187 समेत 9 किस्में सुझाई गई हैं.
  • मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर-कोटा क्षेत्र के लिए 8 किस्में बताई गई हैं.
  • पराली वाले खेत में हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर से सीधी बुवाई की सलाह है.
  • दूसरे क्षेत्र की किस्म बोने से फसल में रोग का खतरा बढ़ सकता है.

Wheat Sowing: भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR), करनाल ने रबी सीजन के लिए किसानों को नई कृषि सलाह जारी की है. संस्थान ने इलाके की जलवायु और सिंचाई की सुविधा के हिसाब से गेहूं और जौ बोने को कहा है. बुवाई 1 से 15 नवंबर, यानी नवंबर के पहले पखवाड़े में पूरी करने की सलाह दी गई है.

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सही समय पर सही किस्म बोने से अंकुरण अच्छा रहता है और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है. संस्थान ने अगेती बुवाई के लिए अलग-अलग क्षेत्रों की किस्में भी सुझाई हैं.

आपके इलाके के लिए कौन सी किस्म?

संस्थान ने दो क्षेत्रों के लिए सिंचित खेतों में अगेती बुवाई की किस्में बताई हैं.

क्षेत्र:-उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के लिए सुझाई गई किस्में: DBW 187, DBW 303, WPC 1270, DBW 327, DBW 332, PWD 872, DBW 370, DBW 371, DBW 372

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क्षेत्र: मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान के उदयपुर और कोटा क्षेत्र के लिए सुझाई गई किस्में: DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW 1399 (MP 1399), PWD 906, HD 3463, JW 543

DBW 187, DBW 303 और DBW 327 दोनों क्षेत्रों की सूची में हैं. दूसरे क्षेत्र की किस्मों को नवंबर के पहले सप्ताह तक की अगेती बुवाई के लिए बताया गया है.

दूसरे इलाके की किस्म क्यों न बोएं?

संस्थान की सलाह है कि किसान अपने इलाके के लिए सुझाई गई किस्में ही बोएं. दूसरे क्षेत्र की किस्म लगाने से फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है. बीज हमेशा भरोसेमंद जगह से प्रमाणित ही खरीदें. बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जाँच कराना भी फायदेमंद रहेगा.

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पराली वाले खेत में क्या करें?

खेत में पराली बची हो तो हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर मशीन से बिना पराली हटाए सीधी बुवाई की जा सकती है. इससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती. संस्थान ने किसानों को पराली न जलाने की सलाह भी दी है.

ये भी पढ़े – गेहूं में कल्ले बढ़ाने के उपाय, सरसों की खली से लेकर सिंचाई तक जानें सही तरीका

बुवाई में देरी से क्या नुकसान?

देर से बोई गई फसल पकते समय ज्यादा गर्मी की चपेट में आ सकती है. इससे दाने बनने और पैदावार पर असर पड़ सकता है.

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सिंचाई और खाद पर भी ध्यान देने को कहा गया है. जरूरत से ज्यादा खाद और पानी खर्च करने से बचें और सिंचाई समय पर, जरूरत के हिसाब से करें. इससे पानी बचेगा और लागत कम रखने में मदद मिलेगी. खरपतवार और रोगों से बचाव के उपाय भी सही समय पर करने को कहा गया है.

ये भी पढ़े – मूंगफली के बाद गेहूं की खेती, HD-2932, पूसा तेजस या HI-1544 में से कौनसी किस्म चुनें? जानिए

(डिस्क्लेमर : खेती या पशुपालन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले स्थानीय कृषि/पशु विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें.)

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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