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राजस्थान मौसम: अगले 4-5 दिन सूखा, फिर 3 सितंबर से लौटेगी बारिश

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राजस्थान मौसम हाइलाइट्स

  • बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव क्षेत्र 24 घंटे में तेज होगा.
  • राज्य के अधिकांश भागों में अगले 4-5 दिन मानसून कमजोर रहेगा.
  • 3 सितंबर से पूर्वी-उत्तर-पूर्वी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू.
  • बीकानेर संभाग में सिर्फ 5-8 सितंबर के बीच छुटपुट बारिश के आसार.

Rajasthan Weather: राजस्थान में मानसून फिलहाल सुस्त पड़ गया है, लेकिन सितंबर की शुरुआत में बादल फिर सक्रिय होने वाले हैं. मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के मुताबिक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में आगामी 4-5 दिन कमजोर मानसून परिस्थितियां बनी रहेंगी. हालांकि उत्तर-पूर्वी और पूर्वी भागों में 3 सितंबर से बारिश का एक नया दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है.

असल में इस बदलाव के पीछे एक नया मौसमी सिस्टम जिम्मेदार है. उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और आसपास लगे पश्चिम बंगाल-उड़ीसा तट पर फिलहाल कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिसके अगले 24 घंटों में मजबूत होने की प्रबल संभावना है.

बंगाल की खाड़ी में कौन-सा नया सिस्टम बन रहा है?

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल जो कम दबाव का क्षेत्र (LOW) बना है, वह आगामी 24 घंटों में तीव्र होकर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया यानी WML का रूप ले सकता है. यही सिस्टम आगे चलकर राजस्थान के मौसम की दिशा तय करेगा.

दरअसल जब कोई सिस्टम वेल मार्क लो प्रेशर एरिया में बदलता है, तो उसकी नमी खींचने की ताकत बढ़ जाती है. इसी वजह से मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान में 3 सितंबर से बारिश लौटने का अनुमान जताया है.

अगले 4-5 दिन राजस्थान में कैसा रहेगा मौसम?

फिलहाल की तस्वीर साफ है – ज्यादातर राज्य में मानसून कमजोर बना रहेगा. यह स्थिति खासकर अगले 4 से 5 दिनों तक जारी रहने की संभावना है.

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बता दें कि यह कमजोर दौर पूरे राज्य को बराबर प्रभावित नहीं करेगा. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में 3 सितंबर से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी, जबकि पश्चिमी राजस्थान में सूखा दौर कुछ और दिन खिंच सकता है.

किस संभाग में कब और कितनी बारिश होगी

अलग-अलग इलाकों के लिए बारिश की तारीख और तीव्रता दोनों अलग हैं. एक नजर में पूरा शेड्यूल समझ लीजिए.

क्षेत्रअवधिअनुमान
भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर, उदयपुर संभाग4-7 सितंबरकहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश
पूर्वी व उत्तर-पूर्वी राजस्थान3 सितंबर सेबारिश का नया दौर शुरू
जोधपुर, बीकानेर संभाग (अधिकांश भाग)आगामी दिनों मेंकमजोर मानसून जारी
बीकानेर संभाग (छुटपुट स्थान)5-8 सितंबरहल्की-मध्यम बारिश

खास बात ये है कि पांच संभाग एक साथ बारिश की सूची में शामिल हैं. भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर – इन सभी जगह 4 से 7 सितंबर के बीच असर दिखेगा.

पश्चिमी राजस्थान का हाल अभी भी सूखा क्यों?

जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश भागों में आगामी दिनों में भी कमजोर मानसून परिस्थितियां जारी रहने की संभावना है. यानी यहां राहत की रफ्तार बाकी राज्य से धीमी रहेगी.

हालांकि पूरी तरह सूखा नहीं रहेगा. बीकानेर संभाग में 5 से 8 सितंबर के दौरान कुछ छुटपुट स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है. यानी बीकानेर में बारिश आएगी तो सही, लेकिन उसका दायरा बहुत सीमित रहेगा.

किसानों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा

अब सवाल ये है कि इस बदलते मौसम का सीधा असर किस पर पड़ेगा. जिन किसानों की फसल खरीफ सीजन में पानी पर निर्भर है, उनके लिए अगले 4-5 दिन का सूखा दौर चिंता की बात हो सकता है.

  • खड़ी फसल में सिंचाई का इंतजाम अगले कुछ दिन खुद ही करना पड़ सकता है.
  • 3 सितंबर के बाद पूर्वी राजस्थान के किसान बुवाई और छिड़काव का समय उसी हिसाब से तय करें.
  • बीकानेर-जोधपुर के किसानों को लंबे सूखे दौर के लिए पहले से तैयार रहना होगा.

शहरी इलाकों में भी बदलाव महसूस होगा. कोटा, भरतपुर और जयपुर जैसे शहरों में 4 सितंबर के बाद हल्की बारिश से उमस से राहत मिल सकती है, हालांकि भारी बारिश जैसी स्थिति फिलहाल नहीं बताई गई है.

पिछले हफ्ते के मुकाबले तस्वीर कैसे बदली?

बीते सप्ताह पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि पश्चिमी राजस्थान लगातार कमजोर मानसून से जूझ रहा था. अब यह पैटर्न कुछ हद तक दोहराया जा रहा है, बस बारिश का दौर आगे खिसक गया है.

यानी पूर्वी राजस्थान को फिर बारिश मिलेगी, लेकिन थोड़ी देरी से. पश्चिमी राजस्थान का संघर्ष जारी रहेगा, बस बीकानेर में एक छोटी राहत की खिड़की खुलेगी.

आगे क्या देखना जरूरी होगा

सबसे अहम बात यह है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम अगले 24 घंटों में कितना मजबूत होता है. अगर यह वेल मार्क लो प्रेशर एरिया में बदलता है, तो 3 सितंबर से शुरू होने वाली बारिश की तीव्रता और बढ़ सकती है.

जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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