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Onion Price Hike: चीनी के बाद प्याज ने निकाले आंसू…35 रुपये वाली प्याज हुई 65 की, सरकार खोलेगी बफर स्टॉक

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Onion Price Hike: त्योहारी सीजन से पहले रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है. जो प्याज के दाम कुछ दिन पहले तक 30-35 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वह अब रिटेल मार्केट में 60-65 रुपये तक पहुंच गई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक प्याज का औसत रिटेल प्राइस करीब 42 रुपये प्रति किलो रहा, जो महीनेभर पहले के मुकाबले करीब 19-20 फीसदी ज्यादा है.

दिक्कत अकेले प्याज की नहीं है. चीनी भी रिटेल में 65 रुपये प्रति किलो या उससे ऊपर पहुंच चुकी है, और महीनेभर में इसमें करीब 15 फीसदी का उछाल आया है. दोनों चीजें रोजाना की जरूरत हैं.

हाइलाइट्स

  • दिल्ली-NCR में प्याज 60-65 रुपये प्रति किलो तक बिक रही.
  • नासिक में एक महीने में प्याज के दाम 70 फीसदी से ज्यादा उछले.
  • चीनी रिटेल में 65 रुपये किलो, महीनेभर में करीब 15% महंगी.
  • सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की तैयारी में.

कहां-कहां लगा दाम का झटका

रिपोर्ट्स के मुताबिक असर पूरे देश में फैला है. दिल्ली-NCR से लेकर नासिक और चेन्नई तक प्याज की कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ है.

मोर्चाकीमत / बढ़ोतरी
दिल्ली-NCR रिटेल60-65 रुपये प्रति किलो
औसत रिटेल प्राइस (देशभर)करीब 42 रुपये प्रति किलो
एक महीने में औसत बढ़ोतरी19-20 फीसदी
नासिक में एक महीने का उछाल70 फीसदी से ज्यादा
पहले का भाव30-35 रुपये प्रति किलो

खास बात ये है कि नासिक का आंकड़ा सबसे चौंकाने वाला है. नासिक देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में गिना जाता है. वहां का भाव आगे चलकर बाकी शहरों के रेट तय करता है.

प्याज अचानक इतनी महंगी क्यों हुई?

सरकार की सफाई साफ है – कमी की वजह से नहीं. सरकार का कहना है कि देश में प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष के लगभग बराबर है.

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सरकार के मुताबिक आने वाले महीनों की घरेलू डिमांड पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. साथ में यह भी कहा गया कि अगस्त-सितंबर में आमतौर पर प्याज के दाम चढ़ते ही हैं. इसकी वजह मौसम और सप्लाई चेन से जुड़ी परिस्थितियां बताई गई हैं.

यानी यह मौसमी उछाल है, ऐसा सरकार का पक्ष है. लेकिन उपभोक्ता के लिए वजह से ज्यादा मायने रेट रखता है.

सरकार बफर स्टॉक क्यों खोल रही है

अचानक आए इस उछाल को देखते हुए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की तैयारी कर रही है. मकसद उन शहरों में सप्लाई पहुंचाना है जहां कमी के चलते दाम सबसे तेजी से चढ़े हैं.

दरअसल बफर स्टॉक का काम ही यही है. जब मंडी में आवक घटती है और कीमत भागने लगती है, तो सरकारी स्टॉक बाजार में उतारकर रेट काबू में लाया जाता है. असर आमतौर पर कुछ दिनों में दिखने लगता है.

बफर स्टॉक कब से और कितनी मात्रा में जारी होगा, इस पर फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं है.

चीनी के दाम पर सियासत क्यों गरमाई?

चीनी विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा बन गई है. आरोप यह लगाया गया कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल होने से देश में चीनी की सप्लाई घट रही है, और उसी से दाम चढ़े हैं. चीनी की कीमतों पर सरकार का रुख

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे इथेनॉल वजह नहीं है.

वहीं इंडस्ट्री का पक्ष भी सामने आया है. इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर बोले- “भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है, मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. बाजार की शॉर्ट टर्म सेंटीमेंट से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जाएगा.”

चीनी महंगी होने की असल वजहें क्या बताई गईं

शिरगांवकर ने तीन-चार ठोस वजहें गिनाईं. इनमें इथेनॉल का नाम नहीं है.

  • मौसम के कारण गन्ने की पैदावार कम रहना.
  • महाराष्ट्र में क्रशिंग दर का ज्यादा होना.
  • यूपी में गन्ने की किस्मों से जुड़ी समस्याएं.
  • त्योहारी सीजन के चलते डिमांड में तेजी.

अब सवाल ये है कि इन वजहों में कौन-सी जल्दी ठीक हो सकती है. डिमांड वाली दिक्कत त्योहार बीतते ही अपने आप घट जाती है. लेकिन पैदावार और किस्मों वाली समस्या अगले सीजन तक खिंच सकती है.

आम परिवार की जेब पर कितना असर

गणित सीधा है. जो परिवार महीने में 5 किलो प्याज खरीदता था, उसे 35 रुपये के भाव पर करीब 175 रुपये देने पड़ते थे. अब 65 रुपये के भाव पर वही 5 किलो 325 रुपये का पड़ेगा – यानी 150 रुपये ज्यादा.

चीनी को भी जोड़ लें तो बोझ और बढ़ता है. त्योहारों में मिठाई, खीर और हलवे की खपत वैसे भी ऊपर जाती है. आलू, प्याज और टमाटर जैसी रोजाना काम आने वाली सब्जियों के दाम चढ़ना पूरे किचन बजट को हिला देता है.

कब तक मिलेगी राहत? मिलेगी

राहत की सबसे नजदीकी उम्मीद बफर स्टॉक से है. जैसे ही सरकारी प्याज शहरों की मंडियों में उतरेगी, रिटेल रेट पर दबाव कम होना चाहिए. वहीं सरकार का अपना कहना है कि अगस्त-सितंबर का यह उछाल मौसमी है, यानी नई फसल की आवक के साथ स्थिति सुधरने की गुंजाइश बनती है. चीनी पर इंडस्ट्री ने शॉर्ट टर्म चिंताएं दूर करने का भरोसा दिया है. लेकिन दाम कब तक और कितने नीचे आएंगे, इसे लेकर फिलहाल इस पर कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है.

नमस्ते! मैं जगत पाल ई-मंडी रेट्स का संस्थापक, बीते 7 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती-किसानी, मंडी भाव की जानकारी में महारथ हासिल है । यह देश का पहला डिजिटल कृषि न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो बीते 7 सालों से निरन्तर किसानों के हितों में कार्य कर रहा है। किसान साथियों ताजा खबरों के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद

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