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Sugar Price Hike : त्योहारी सीजन से पहले चीनी का रेट पहुंचा आसमान में, 20% तक बढ़े दाम

Jagat Pal

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Sugar Price Hike : घर में मिठाई बनानी है और चीनी का दाम सुनकर चौंक गए? आप अकेले नहीं हैं। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि सरकार को खुद कदम उठाने पड़ रहे हैं। सरकार और इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

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घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें सीमित मात्रा में बिना ड्यूटी चीनी का इंपोर्ट और थोक व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक लिमिट शामिल है। वजह साफ है – त्योहारी सीजन से पहले कीमतें बेकाबू हो रही हैं।

कीमतों में क्यों आया गैर-जरूरी उछाल

नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी पूरी तरह गैर-जरूरी है। इसलिए नियंत्रण के लिए कदम उठाना जरूरी हो गया है।

सूत्र के मुताबिक जिन विकल्पों पर विचार चल रहा है, उनमें स्टॉक लिमिट घटाना, सीमित इंपोर्ट की इजाजत, ड्यूटी में कटौती और मिलों के मासिक बिक्री आवंटन में बदलाव- सब शामिल है। सरकार किसी एक उपाय पर दांव नहीं लगाना चाहती।

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कोल्हापुर में 20% का उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर भाव

महाराष्ट्र का कोल्हापुर देश के प्रमुख चीनी व्यापार केंद्रों में गिना जाता है। यहां थोक चीनी की कीमतें अगस्त की शुरुआत से करीब 20% बढ़कर रिकॉर्ड 5,350 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एक दूसरे सरकारी सूत्र ने बताया कि यह उछाल ऐसे वक्त हुआ है जब अनुमानों के मुताबिक अगले सीजन की चीनी आने तक घरेलू सप्लाई मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। तो फिर दाम क्यों बढ़े?

मुंबई से लेकर हनुमानगढ़ तक, हर जगह अलग तस्वीर

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मुंबई के थोक बाजार में चीनी फिलहाल 5,000 से 5,090 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रही है। जून में यही भाव करीब 3,800 रुपये था। कारोबारियों के मुताबिक कम बारिश और आगे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को हवा दी है।

स्थानीय किराना संचालक कृष्ण कुमार ने इस पर अपनी बात रखी। उनके मुताबिक राजस्थान के नोहर-रावतसर-हनुमानगढ़ और हरियाणा के ऐलनाबाद-सिरसा इलाके में चीनी का रेट 6,200 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तक बोला जा रहा है।

उनका कहना है कि इस रेट पर भी माल मुश्किल से मिल रहा है। आशंका जताई कि थोक व्यापारी स्टॉक बढ़ाकर कालाबाजारी कर सकते हैं। उनकी सीधी मांग है – सरकार तुरंत स्टॉक लिमिट तय करे, वरना त्योहारी सीजन में दाम और ऊपर जा सकते हैं।

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सप्लाई कम, सिर्फ इंपोर्ट से राहत की उम्मीद

व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय बाजार में सप्लाई कम पड़ रही है। बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन ने रॉयटर्स को बताया कि स्थानीय स्तर पर सप्लाई की कमी है, और त्योहारी सीजन के दौरान सिर्फ इंपोर्ट ही सप्लाई बढ़ाकर कीमतें काबू में ला सकता है।

भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। इसलिए इंपोर्ट को लेकर लिया गया कोई भी फैसला सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहेगा।

त्योहारों की मांग, सप्लाई पर बढ़ता दबाव

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग हर साल बढ़ती है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली इन सबमें मिठाई और कन्फेक्शनरी की खपत आसमान छूती है।

नतीजा? घरेलू सप्लाई पर सीधा दबाव पड़ता है। यही वजह है कि सरकार किसी एक उपाय पर निर्भर रहने की बजाय कई नीतिगत विकल्पों पर एक साथ काम कर रही है।

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इंपोर्ट ड्यूटी घटाना – 10 साल में सबसे बड़ा बदलाव

सरकार विदेशी चीनी को भारतीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर भी विचार कर रही है। यह कोई मामूली फैसला नहीं होगा।

भारत पिछले करीब 10 सालों से चीनी के बड़े आयात पर निर्भर नहीं रहा है। अगर आयात की इजाजत मिलती है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देश की नीति में एक बड़ा मोड़ साबित होगा।

गन्ने का गणित भी बदल सकता है

यह अपडेट रॉयटर्स की एक और रिपोर्ट के कुछ ही दिनों बाद आया है। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा घटाने पर विचार कर रहा है।

अगर ऐसा होता है तो चीनी बनाने के लिए ज्यादा गन्ना उपलब्ध होगा। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ने और कीमतें नीचे आने में मदद मिल सकती है। अभी यह साफ नहीं है कि सरकार किन उपायों को आखिरकार लागू करेगी – अगले कुछ हफ्तों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

आगे क्या ?

फिलहाल के लिए घर के बजट पर नजर रखनी होगी। अगर आप त्योहारी सीजन के लिए चीनी का स्टॉक करना चाहते हैं, तो जल्दी फैसला लेना समझदारी हो सकती है। सरकार का अगला ऐलान इंपोर्ट ड्यूटी और स्टॉक लिमिट, दोनों पर असर डाल सकता है – इस पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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