नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026: देश भर में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर (Sugar Price Hike) पर पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में राहत पहुंचाने के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। एक ओर 10 लाख टन कच्ची चीनी के शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति दी गई है, तो दूसरी ओर बल्क उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा को आधा कर दिया गया है। ये कदम ऐसे समय में आए हैं जब कई बाजारों में चीनी 65 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है और थोक भाव दो महीने में करीब 32 प्रतिशत तक चढ़ चुके हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है।
कई शहरों और राज्यों में कीमतें इससे कहीं ज्यादा चल रही हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात के बाजारों में खुदरा भाव 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। कुछ जगहों पर यह 65-70 रुपये प्रति किलो तक रिपोर्ट किया गया।
थोक बाजार में भी दिखा उछाल
महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतें 5,300 से 5,560 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्टरी भाव 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। दिल्ली और मुजफ्फरनगर के स्पॉट बाजार में थोक कीमतें 5,700-5,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर हैं। पिछले एक महीने में कीमतों में करीब 10 प्रतिशत और दो महीने में थोक भाव में लगभग 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
स्टॉक सीमा आधी, अब सिर्फ 15 दिन का भंडार
वाणिज्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति दी है। यह फैसला त्योहारी मांग बढ़ने से पहले घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के मकसद से लिया गया। इसके अलावा, उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने स्टॉक सीमा सख्त कर दी है।
एक सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक वे बल्क उपभोक्ता जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अधिकतम 15 दिनों का ही स्टॉक रख सकेंगे। इससे पहले यह सीमा 30 दिनों की थी। मिठाई, बिस्किट, सॉफ्ट ड्रिंक और अन्य खाद्य निर्माताओं पर यह नियम लागू होगा।
ISMA का दावा- कमी नहीं, पैनिक बाइंग है वजह
कीमतों में उछाल के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, चीनी वर्ष 2025-26 में सकल उत्पादन करीब 3.11 करोड़ टन रहने की संभावना है, लेकिन इसमें से करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर गन्ना इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट हो चुका है। सितंबर 2026 तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 43 लाख टन रहने का अनुमान है, जो घरेलू खपत के लगभग दो महीने के बराबर है।
त्योहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली) में मांग और बढ़ने वाली है, जिससे दबाव बना हुआ है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (आईएसएमए) ने स्पष्ट कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक है और नए सीजन की क्रशिंग सामान्य से 10-15 दिन पहले शुरू हो सकती है।
आईएसएमए के अनुसार, हालिया कीमत वृद्धि बाजार के बुनियादी कारकों से ज्यादा सट्टा और त्योहारी सीजन से पहले पैनिक बाइंग का नतीजा है।
शुगर कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल
शुगर कंपनियों के शेयरों पर भी इन घटनाक्रमों का असर दिखा। गुरुवार को बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर करीब 8 प्रतिशत तक चढ़े, जबकि श्री रेणुका शुगर्स, धामपुर शुगर मिल्स, बलरामपुर चिनी मिल्स और अन्य कंपनियों के शेयरों में 3 से 7 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। निवेशक ऊंची कीमतों से मिलों की रियलाइजेशन बेहतर होने की उम्मीद कर रहे हैं।
ड्यूटी फ्री चीनी आयात से राहत की उम्मीद
आयात की अनुमति से बाजार में कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। शून्य शुल्क पर आयातित कच्ची चीनी की लैंडेड लागत करीब 3,840 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है, जबकि घरेलू बिक्री कीमत इससे काफी ऊपर है। इससे इंपोर्टर्स को मार्जिन मिल सकता है और घरेलू आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। वैश्विक बाजार में भी भारत के आयात की खबर के बाद कच्ची चीनी की कीमतों में हलचल देखी गई।
सरकार के इन फैसलों से त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उद्योग और बाजार दोनों ही नजरें इस बात पर टिकाए हुए हैं कि आयातित चीनी कितनी तेजी से बाजार में आती है और स्टॉक सीमा का कितना असर पड़ता है। फिलहाल कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और आने वाले हफ्तों में इन कदमों का असली प्रभाव साफ होगा।










