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USDA रिपोर्ट: ग्लोबल कॉटन स्टॉक 15 साल के निचले स्तर पर, भारत में उत्पादन बढ़ेगा या घटेगा? देखें पूरी डिटेल

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USDA कॉटन आउटलुक रिपोर्ट 2026 : अमेरिकी कृषि विभाग यानी USDA (United States Department of Agriculture) ने अगस्त 2026 के लिए अपनी लेटेस्ट कॉटन और वूल आउटलुक रिपोर्ट जारी की है, और इसमें आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 2026/27 सीजन के लिए ग्लोबल कॉटन बैलेंस और तंग होने वाला है। वजह साफ है – तीन साल में पहली बार दुनिया भर में मिलों की कॉटन खपत, उत्पादन से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

उत्पादन घटा, खपत बढ़ी

USDA के अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में कॉटन का उत्पादन 117.6 मिलियन बेल रहेगा। यह पिछले सीजन यानी 2025/26 के मुकाबले 4.3 मिलियन बेल कम है।

दूसरी तरफ मिलों की खपत बढ़कर 122.9 मिलियन बेल तक पहुंचने का अनुमान है। यानी मांग और सप्लाई का फासला साफ दिख रहा है।

ग्लोबल स्टॉक 15 साल के निचले स्तर पर

ग्लोबल एंडिंग स्टॉक 69.7 मिलियन बेल रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन से 5.1 मिलियन बेल यानी 7% कम है।

यह आंकड़ा 2011/12 के बाद सबसे कम है। स्टॉक-टू-यूज रेश्यो भी गिरकर 57% पर आने का अनुमान है, जो 2010/11 के बाद सबसे निचला स्तर होगा।

कौन सा देश कितना कॉटन बनाएगा

प्रमुख उत्पादक देशों की तस्वीर मिलाजुला रही है। चीन का उत्पादन घटने की उम्मीद है, जबकि भारत अकेला ऐसा बड़ा उत्पादक है जहां बढ़ोतरी दिख रही है। नीचे टेबल में पूरा ब्योरा देखिए।

देशअनुमानित उत्पादन (मिलियन बेल)बदलाव
चीन33.56% कम
भारत24.01% ज्यादा
ब्राजील18.25
अमेरिका13.6
पाकिस्तान5.1
ऑस्ट्रेलिया3.0

भारत के लिए यह अच्छी खबर है। जब बाकी बड़े उत्पादक देशों का उत्पादन घट रहा है, भारत का बढ़ना उसकी पोजिशन को मजबूत कर सकता है।

लगातार चौथे साल बढ़ेगी खपत

अब बात मिलों की खपत की। लगातार चौथे साल ग्लोबल कॉटन की खपत बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। किन देशों में कितनी खपत होगी, यह देखिए –

देशअनुमानित मिल खपत (मिलियन बेल)
चीन42.0
भारत26.5
पाकिस्तान10.2

चीन खपत के मामले में सबसे आगे है, लेकिन भारत भी पीछे नहीं है। और यहां दिलचस्प बात यह है कि भारत उत्पादन में भी आगे बढ़ रहा है और खपत में भी – दोनों मोर्चों पर।

ट्रेड में क्या बदला, भारत का एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा

ग्लोबल कॉटन ट्रेड 43.8 मिलियन बेल रहने का अनुमान है। 2025/26 में यह आंकड़ा 45.6 मिलियन बेल था — यानी ट्रेड वॉल्यूम में गिरावट साफ है।

ब्राजील 15.3 मिलियन बेल के साथ सबसे बड़ा निर्यातक बना रहेगा। भारत के लिए भी एक अच्छी खबर है — उसका एक्सपोर्ट बढ़कर 1.5 मिलियन बेल होने का अनुमान है।

इस रिपोर्ट का असर किस पर पड़ेगा

अब सवाल यह है कि इसका असर किसे झेलना पड़ेगा। घटता ग्लोबल स्टॉक और बढ़ती मांग का सीधा मतलब है — कॉटन की कीमतों पर ऊपर की तरफ दबाव बन सकता है।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री, किसान और ट्रेडर — तीनों के लिए यह आंकड़े अहम हैं। भारतीय किसानों के लिए बढ़ता उत्पादन और एक्सपोर्ट दोनों पॉजिटिव संकेत हैं, लेकिन ग्लोबल सप्लाई टाइट होने से घरेलू कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

Cotton की कीमतों की बात करें तो इस समय किसानों को अच्छे भाव मिल रहे है। हरियाणा की आदमपुर मंडी के आज के ताज़ा भाव यहाँ देखें

आगे क्या?

फिलहाल के लिए इतना साफ है कि 2026/27 सीजन कॉटन मार्केट के लिए आसान नहीं रहने वाला। जो टेक्सटाइल कारोबार से जुड़े हैं, उन्हें कच्चे माल की सोर्सिंग की योजना पहले से बनानी होगी। किसानों के लिए यह मौका भी हो सकता है, क्योंकि उत्पादन बढ़ने के साथ मांग भी बनी हुई है। USDA की अगली मासिक रिपोर्ट में तस्वीर और साफ होगी।

नमस्ते! मैं जगत पाल ई-मंडी रेट्स का संस्थापक, बीते 7 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती-किसानी, मंडी भाव की जानकारी में महारथ हासिल है । यह देश का पहला डिजिटल कृषि न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो बीते 7 सालों से निरन्तर किसानों के हितों में कार्य कर रहा है। किसान साथियों ताजा खबरों के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद

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