Maize Price Report : कल यानी मंगलवार को मक्के के भाव में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखी गई। बिहार के गुलाब बाग से लेकर मध्य प्रदेश की इटारसी तक, हर मंडी में (Corn Market India) मक्के के भाव 20 से 40 रुपए तक टूटे हैं। जिन व्यापारियों ने सोचा था कि निर्यात मांग बाजार को संभाल लेगी, उनके सपने एक बार फिर चकनाचूर हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कमी ने भारतीय मक्का को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया है और घरेलू मांग भी इस कदर ठप्प है कि स्टॉक होल्डर्स का धैर्य जवाब देने लगा है।
बिकवाली का दबाव: स्टॉकिस्ट्स अब ‘पकड़ो-छोड़ो’ मूड में
मंडियों का माहौल बता रहा है कि जो लंबे समय से मक्का का स्टॉक पकड़े बैठे थे, वो अब धीरे-धीरे हार मानने लगे हैं। Commodity Market News के सूत्रों का कहना है कि इटारसी जैसी बड़ी मंडी में करीब 7,000 से 8,000 बोरियों की भारी आवक दर्ज हुई, जो बताती है कि स्टॉकिस्ट्स अब घबराहट में माल उतार रहे हैं।
भरपूर स्टॉक और सीमित मांग की ये जोड़ी बाजार के लिए जहर साबित हो रही है। जब मांग नहीं है, तो कीमतों को ऊपर उठाने वाला कोई कारक नहीं बचता। इसी वजह से दिसंबर महीने के अंत से शुरू हुई ये गिरावट जनवरी में भी थमने का नाम नहीं ले रही।
ये रहा मंगलवार को मंडियों का हाल
Mandi Bhav पर नजर डालें तो मंगलवार को गुलाब बाग मंडी में मक्का ₹20 टूटकर 2,070 रुपए प्रति क्विंटल रहा। दिल्ली में भाव 2,250 रुपए, छिंदवाड़ा में 1,855 रुपए, तिरुपति स्टार्च प्लांट इंदौर पर 1,770 रुपए और राजकोट में 1,750 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए।
लेकिन सबसे ज्यादा दबाव मध्य प्रदेश की इटारसी मंडी में दिखाई दिया। यहां भाव 30 से 40 रुपए टूटकर ₹1,600 प्रति क्विंटल के बीच आ गए। ये कीमतें पहाड़ जैसे भारी स्टॉक के नीचे दबती जा रही हैं। पूर्वी भारत में तो खरीदारों की सक्रियता इतनी कमजोर थी कि कुछ जगहों पर खरीदारी लगभग ठप्प जैसी स्थिति रही।
निर्यात मार्ग बंद, घरेलू मांग भी खोखली
Agriculture News India के विश्लेषकों का कहना है कि खरीफ सीज़न की शुरुआती पिटाई के बाद जो उम्मीद निर्यात से जगी थी, वो जल्दी ही धरी की धरी रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की कीमतें कम होने से भारतीय मक्का प्रतिस्पर्धा में हार गया और निर्यात मांग घट गई है।
इससे भी बुरी खबर ये है कि घरेलू मोर्चे पर भी मांग का कोई ठोस सहारा नहीं मिल रहा। औद्योगिक क्षेत्र और इथोल (Ethanol Blending) से जुड़ी मांग इस समय काफी कमजोर बनी हुई है। जब दोनों ही मोर्चों से सपोर्ट नहीं मिल रहा, तो बाजार का नीचे गिरना स्वाभाविक है।
कब तक जारी रहेगा ये संकट? – एक्सपर्ट्स की राय
Food Inflation India को देखते हुए ये गिरावट किसी राहत से कम नहीं है। मंडी मार्केट मीडिया का मानना है कि जब तक निर्यात मांग और घरेलू मांग में कोई ठोस सुधार नहीं आता या एक्सपोर्ट से सहारा नहीं मिलता, तब तक मक्का बाजार में तेजी की उम्मीद कम ही है।
ऑल ओवर देखा जाए तो फिलहाल बिहार सहित अन्य राज्यों में आने वाले दिनों में मक्के की कीमतें स्थिर से कमजोर दायरे में बनी रह सकती हैं और हल्का-फुल्का करेक्शन आगे भी देखने को मिल सकता है। लेकिन लंबी अवधि में देखा जाए तो मार्च के अंतिम सप्ताह में बाजार की स्थिति बदलती हुई नजर आ रही है, लेकिन इसमें अभी काफी समय बाकी है।
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FAQs
Q1: कल (13 Jan 2026) मक्का के भाव में कितनी गिरावट आई?
A: बिहार और मध्य भारत की मंडियों में 20-30 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। इटारसी मंडी में तो 30-40 रुपए की बड़ी गिरावट दिखी।
Q2: मक्का बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
A: निर्यात मांग में कमी और घरेलू औद्योगिक मांग का कमजोर होना। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने से भारतीय मक्का प्रतिस्पर्धा खो रहा है।
Q3: मक्का बाजार में तेजी की उम्मीद कब तक है?
A: कमोडिटी मार्केट मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक निर्यात या घरेलू मांग में ठोस सुधार नहीं होता, तब तक तेजी की संभावना कम है। मार्च के अंतिम सप्ताह से स्थिति बदल सकती है।
डिस्क्लेमर
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