ताज़ा खबरें:

मानसून की सुस्ती से खेती पर संकट! खरीफ सीजन में धान, दाल, तिलहन और कपास की बुवाई में भारी गिरावट

Jagat Pal

Follow Us

Highlights:-

  • खरीफ फसलों की कुल बुवाई 23% घटी।
  • धान की बुवाई 8.65 लाख हेक्टेयर कम।
  • तिलहन में सबसे बड़ी 19.42 लाख हेक्टेयर की गिरावट।
  • कपास की बुवाई 15.70 लाख हेक्टेयर कम हुई।
  • केवल गन्ना और जूट-मेस्ता में मामूली बढ़ोतरी दर्ज।

Kharif Crop Data 2026: देश के कई हिस्सों में मानसून की धीमी शुरुआत अब खेती पर साफ दिखाई देने लगी है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान खरीफ फसलों की बुवाई पूरी रफ्तार से नहीं कर पा रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 25 जून 2026 तक की ताजा रिपोर्ट बताती है कि इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में करीब 23 फीसदी कम रही है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 25 जून 2026 तक देश में कुल 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था। यानी एक साल में 53.74 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हो सकी है। यह गिरावट किसानों के साथ-साथ कृषि बाजार और खाद्य उत्पादन के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।

kharif crop data 2026

धान, दाल और तिलहन की बुवाई पर सबसे ज्यादा असर

खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान की बुवाई इस बार भी मानसून की बेरुखी का सबसे बड़ा शिकार बनी है। रिपोर्ट के अनुसार 25 जून तक धान की बुवाई 25.75 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 34.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान बोया जा चुका था। यानी 8.65 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है।

दालों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कुल दलहन की बुवाई 14.92 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के 21.46 लाख हेक्टेयर से 6.53 लाख हेक्टेयर कम है। खासकर अरहर में 4.89 लाख हेक्टेयर और उड़द में 1.44 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुल्थी और मोठ जैसी कुछ फसलों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन इससे समग्र तस्वीर में ज्यादा बदलाव नहीं आया।

सबसे बड़ी चिंता तिलहन की है। तिलहन की कुल बुवाई 16.99 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल यह 36.41 लाख हेक्टेयर थी। यानी 19.42 लाख हेक्टेयर की भारी कमी दर्ज हुई। सोयाबीन की बुवाई अकेले 13.05 लाख हेक्टेयर कम हुई, जबकि मूंगफली में भी 6.42 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई।

---विज्ञापन---

कपास और मोटे अनाज भी प्रभावित, गन्ने ने दी राहत

कमजोर बारिश का असर कपास की खेती पर भी साफ दिखाई दिया। इस वर्ष 25 जून तक कपास की बुवाई 29.66 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 45.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोई गई थी। यानी 15.70 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई।

श्री अन्न (मोटे अनाज) की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में 4.23 लाख हेक्टेयर कम रही। इसमें मक्का की बुवाई 2.90 लाख हेक्टेयर और बाजरा 1.72 लाख हेक्टेयर कम रहा। हालांकि ज्वार में 0.68 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने कुछ राहत जरूर दी।

दूसरी ओर गन्ने की खेती में हल्की सकारात्मक तस्वीर सामने आई। गन्ने की बुवाई 57.31 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल से 0.67 लाख हेक्टेयर अधिक है। वहीं जूट एवं मेस्ता की बुवाई में भी 0.12 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई।

आगे की बारिश तय करेगी खेती और बाजार की दिशा

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में यदि मानसून सामान्य या तेज रहता है तो कई राज्यों में बुवाई की रफ्तार बढ़ सकती है। लेकिन यदि बारिश में देरी बनी रहती है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर खाद्यान्न, दालों, तिलहन और कपास की उपलब्धता तथा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

कई किसान फिलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जिन इलाकों में पर्याप्त नमी नहीं है वहां बुवाई टालनी पड़ रही है, जबकि कुछ किसानों ने पहली बुवाई के बाद दोबारा खेत तैयार करने की चिंता भी जताई है। ऐसे में मौसम की अगली चाल इस खरीफ सीजन की दिशा तय करेगी।

फिलहाल कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि कमजोर मॉनसून ने खेती की रफ्तार धीमी कर दी है। यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं होती, तो खरीफ उत्पादन के अनुमान और कृषि बाजार दोनों पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now