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Agriculture Budget 2023: मछली पालकों के लिए 6 हजार करोड़ का निवेश, कृषि ऋण का लक्ष्य 20 लाख करोड़ किया

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Agriculture Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फ़रवरी को आम बजट पेश करते हुए कहा कि पशुपालन और मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मत्स्य संपदा से जुड़ी नई उपयोजना में 6000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे देश में मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और इस योजना से देश के लाखों मछली पालन से जुड़े किसानों को लाभ पहुंचेगा।

कृषि ऋण का लक्ष्य 20 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाएगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज प्रस्तुत किए बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए अनेक घोषणाओं का ऐलान किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में कृषि से जुड़े स्टार्ट अप्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए युवा उद्यमियों द्वारा कृषि-स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एग्रीकल्चर एक्सीलेटर फंड बनाया जाएगा। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन पर ध्यान देते हुए कृषि लोन लक्ष्य को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। इससे किसानों को ऋण लेने में आसानी होगी।

कृषि सेक्टर के लिए सरकार स्टोरेज क्षमता बढ़ाएगी। कृषि क्रेडिट का लक्ष्य बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। सालाना आधार पर इसमें 11.1% की बढ़ोतरी होगी। कॉटन के लिए PPP प्रोग्राम के तहत सरकार प्लान कर चुकी है।  इससे किसानों को अपनी उपज को स्टोर करने और उनकी उपज के लिए बेहतर कीमतों का एहसास करने में मदद मिलेगी। अगले 5 वर्षों में कवर न किए गए गांवों में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों, प्राथमिक मत्स्य समितियों और डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की सुविधा प्रदान करेगी।

श्री अन्न योजना की शुरुआत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुरुआती भाषण में किसानों और फसलों का जिक्र कर दिया। बुधवार को उन्होंने देश में मोटे अनाज के उत्पादन के लिए देश में “श्री अन्न योजना” की शुरुआत करने की घोषणा की । इस योजना के जरिये देश में मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ाने पर बल दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि कम लागत में ज्यादा उत्पादन होगा और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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