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Desi Cow Subsidy: देसी गाय पालने वालों को हर महीने मिलेंगे ₹900, 15 नवंबर से शुरू होगी योजना

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हाइलाइट्स

  • मध्य प्रदेश सरकार देसी गाय पालने वाले पशुपालकों को हर महीने अधिकतम 900 रुपये देगी.
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव 15 नवंबर 2026 को बिरसा मुंडा जयंती पर योजना शुरू करेंगे.
  • पहले चरण में 100 गांवों से पांच-पांच, यानी कुल 500 पशुपालक चुने जाएंगे.
  • सरकार ने योजना के लिए सालाना 40 करोड़ रुपये का बजट रखने की योजना बनाई है.
  • ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों की जानकारी साझा नहीं हुई, अनजान वेबसाइट पर पैसा जमा न करें.

Desi Cow Subsidy: मध्य प्रदेश सरकार देसी गाय पालने वाले पशुपालकों को हर महीने अधिकतम 900 रुपये की आर्थिक मदद देने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री मोहन यादव बिरसा मुंडा जयंती के मौके पर 15 नवंबर 2026 को इस योजना की शुरुआत करेंगे.

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पहले चरण में 100 गांवों के 500 पशुपालकों को लाभ मिलेगा. सालभर में एक पात्र पशुपालक को 10,800 रुपये तक मिल सकते हैं. शुरुआत सीमित स्तर पर हो रही है, इसलिए हर पशुपालक को इसका फायदा नहीं मिलेगा.

पहले चरण में किन पशुपालकों को मिलेगा लाभ?

सरकार ने शुरुआत के लिए 100 गांव चुने हैं. ये ऐसे गांव हैं, जहां देसी नस्ल की गायों की संख्या ज्यादा है. हर गांव से पांच पशुपालकों का चयन होगा, इस हिसाब से कुल 500 पशुपालक योजना में शामिल होंगे.

पात्र पशुपालकों को हर महीने अधिकतम 900 रुपये दिए जाएंगे. सरकार ने इस पहल के लिए सालाना 40 करोड़ रुपये का बजट रखने की योजना बनाई है.

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चारे और देखभाल पर होगा खर्च

योजना से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किसान गाय के चारे, दाने और देखभाल पर कर सकेंगे. इससे पशुपालन के खर्च का कुछ बोझ कम हो सकता है. शुरुआत में सिर्फ़ चुनिंदा पशुपालकों को मदद मिलेगी, बाकी किसानों को अगले चरण का इंतजार करना होगा.

आवेदन कैसे करना होगा?

15 नवंबर को योजना शुरू होने के बाद आवेदन और पात्रता की पूरी जानकारी सामने आने की उम्मीद है. सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों का ब्योरा साझा नहीं किया है.

ऐसे में किसान किसी अनजान वेबसाइट पर आवेदन करने या पैसे जमा करने से बचें.

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मध्य प्रदेश की देसी गायों के इलाके

राज्य में देसी गायों की कई खास नस्लें पाई जाती हैं:

  • महाकौशली: जबलपुर, मंडला और डिंडोरी के आसपास
  • मालवी: इंदौर, उज्जैन और शाजापुर जैसे इलाके
  • निमाड़ी: खंडवा, खरगोन और बड़वानी
  • केनकथा: बुंदेलखंड के सागर, पन्ना और छतरपुर
  • गाओलाओ: छिंदवाड़ा और महाराष्ट्र की सीमा से लगे इलाके

सरकार इन स्थानीय नस्लों को बचाने और पशुपालकों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है.

चयन किस आधार पर होगा और पात्रता की शर्तें क्या होंगी, यह साफ़ नहीं है. बाकी पशुपालकों को योजना कब मिलेगी, इस पर भी जानकारी नहीं दी गई है. जैसे ही योजना की विस्तृत जानकारी सामने आएगी आपको खबर के माध्यम से ई मंडी रेट्स पर दे दी जाएगी.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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