जयपुर : कृषि आयुक्तालय ने यूरिया-डीएपी जैसी खाद के साथ जिंक, सल्फर और कीटनाशक खरीदने (Fertilizer Tagging) के लिए किसानों को मजबूर करने पर सख्ती बढ़ा दी है. जांच अब सिर्फ़ दुकानदार तक सीमित नहीं रहेगी. थोक विक्रेता और उर्वरक कंपनियां भी दायरे में आएंगी. शिकायत मिलने पर 24 घंटे में प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी. अनियमितता की पुष्टि हुई तो लाइसेंस निरस्त हो सकता है.
किसानों की शिकायत क्या है?
विभाग के पास लगातार शिकायतें आ रही हैं कि यूरिया, डीएपी और दूसरे अनुदानित उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या अन्य कृषि उत्पाद जबरदस्ती थोपे जा रहे है. विभाग इसे जबरन टैगिंग कहता है. आसान भाषा में, खाद चाहिए तो साथ में दूसरा सामान भी लेना पड़ेगा.
कई जिलों से खाद आपूर्ति की शिकायतें भी आई हैं. इन्हीं के बीच कृषि आयुक्तालय ने उर्वरकों के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य न करने के निर्देशों की सख्ती से पालना कराने का आदेश जारी किया है.
थोक विक्रेता और कंपनियां भी जांच में
अब तक कार्रवाई का फोकस खुदरा दुकानदारों पर रहता था. नए आदेश में संबंधित थोक विक्रेताओं, उर्वरक निर्माताओं और आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भूमिका भी जांची जाएगी.
अनियमितता की पुष्टि होने पर विक्रेताओं और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. मामले की गंभीरता और कानूनी प्रावधानों के हिसाब से लाइसेंस निरस्त किया जाएगा. FIR दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकेगी.
सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल बनाने के निर्देश जारी
प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल बनाने के निर्देश हैं. ये दल उर्वरक कंपनियों, गोदामों, थोक और खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर नियमित और औचक जांच करेंगे. जांच में ये चीजें देखी जाएंगी:
- उर्वरकों की उपलब्धता और स्टॉक
- बिक्री के रिकॉर्ड और बिल
- दूसरे कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री के दस्तावेज
विभाग ने साफ किया है कि निरीक्षण, शिकायतों के निस्तारण और दोषियों पर कार्रवाई में ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी.
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शिकायत कहां करें किसान?
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल बोले- “अब तक 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है.” विभाग ने किसानों से अपील की है कि कालाबाजारी, तय कीमत से ज्यादा वसूली, जबरन टैगिंग या दूसरी गड़बड़ी की शिकायत अपने जिले के कृषि कार्यालय में दर्ज कराएं.
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