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सरसों की बुवाई से पहले बीज शोधन ज़रूरी, बाविस्टिन या ट्राइकोर्मा से करें उपचार

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हाइलाइट्स

  • रनजोद सिंह के मुताबिक सरसों की बुवाई के लिए अक्टूबर सबसे बेहतरीन महीना है.
  • एक एकड़ खेत के लिए 1.5 से 2 किलो सरसों का बीज काफी बताया गया है.
  • बाविस्टिन या ट्राइकोर्मा से बीज उपचार पर फंगस और शुरुआती बीमारियों से बचाव का दावा है.
  • प्रति एकड़ 10 से 12 किलो सल्फर या 80 से 100 किलो जिप्सम की सलाह है.
  • उन्नत किस्मों में तेल की मात्रा 40 से 42 प्रतिशत तक मिलने की बात कही गई है.

Mustard Farming Tips: शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह ने सरसों की बुवाई को लेकर कुछ ज़रूरी सलाह दी है. उनके मुताबिक अक्टूबर का महीना इसके लिए सबसे अच्छा है. एक एकड़ में 1.5 से 2 किलो बीज काफी रहता है. बीज को बाविस्टिन या ट्राइकोर्मा से उपचारित करना चाहिए और बुवाई के समय प्रति एकड़ 10 से 12 किलो सल्फर देना चाहिए.

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किसान सरसों की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं. रनजोद सिंह का कहना है कि बंपर पैदावार और ज्यादा तेल के लिए शुरुआत सही होनी चाहिए. इसके लिए वे किस्म का चुनाव, खेत की तैयारी और खाद, तीनों पर पहले से ध्यान देने की बात करते हैं.

खेत की तैयारी कैसे करें?

रनजोद सिंह के मुताबिक बुवाई से पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करके उसे समतल कर लेना चाहिए. मिट्टी की जांच भी करवा लें. खेत में पर्याप्त नमी होना ज़रूरी है, ताकि बीज का जमाव अच्छे से हो सके.

बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा मिट्टी में मिलाने की सलाह भी दी गई है. उनका दावा है कि सही समय और सही नमी में बुवाई करने पर जमाव शानदार रहता है और पैदावार दोगुनी हो जाती है.

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किस्म और बीज उपचार पर ज़ोर

रनजोद सिंह ने पायनियर की उन्नत किस्म बोने का सुझाव दिया. उनके मुताबिक ये किस्में कम समय में पक जाती हैं, रोगों से बची रहती हैं और दाने मोटे होते हैं. इनमें तेल 40 से 42 प्रतिशत तक मिल जाता है. किस्म चुनाव हमेशा अपने क्षेत्र के मौसम और मिट्टी के अनुसार ही करने की सलाह दी जाती है .

बीज शोधन यानी बुवाई से पहले बीज को दवा से उपचारित करना बेहद ज़रूरी हैं. बाविस्टिन या ट्राइकोर्मा से उपचार करने पर फसल में फंगस और शुरुआती बीमारियां नहीं लगतीं. बीज 3 से 4 सेमी गहराई में ही बोएं. सही मात्रा में बीज डालने से पौधों को जगह और धूप पर्याप्त मिलती है.

सिंह का कहना है कि बीज दर और खाद का संतुलन रखने से फसल रोगों से बची रहती है. इससे कम लागत में ज्यादा कमाई हो सकती है.

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सल्फर से तेल पर क्या असर पड़ता है?

रनजोद सिंह सल्फर को सरसों के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्व बताते हैं. उनके मुताबिक इससे दानों में तेल का प्रतिशत बढ़ता है और दाने चमकदार बनते हैं. पौधे मजबूत होते हैं और उनमें ठंड व बीमारियों से लड़ने की ताकत आती है. इसलिए सल्फर डालना न भूलें. सल्फर की जगह जिप्सम भी डाला जा सकता है, मात्रा नीचे दी गई है.

एक नज़र में बुवाई का हिसाब

जानकारीमात्रा
बुवाई का महीनाअक्टूबर
बीज की मात्राएक एकड़ में 1.5 से 2 किलो
बीज उपचारबाविस्टिन या ट्राइकोर्मा
बुवाई की गहराई3 से 4 सेमी
सल्फर या जिप्समप्रति एकड़ 10 से 12 किलो सल्फर या 80 से 100 किलो जिप्सम

किसान इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों जैसे सही समय, सही नमी, उन्नत किस्म का चयन, मिट्टी की जांच और नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा का उपयोग करके अपनी फसल की पैदावार को बिना किसी अतरिक्त खर्चे के आसानी से बढ़ा सकते है. अधिक जानकारी के किसान बेझिझक अपने इलाके के कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें और उचित सलाह अवश्य लें.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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