हाइलाइट्स
- तिरुपति स्टार्च एंड केमिकल्स प्लांट में 14 से 19 फीसदी नमी वाली मक्का अक्टूबर में करीब 320 रुपये चढ़ी.
- सांगली में बिल्टी मक्का का भाव 2,725 रुपये से बढ़कर 22 अक्टूबर को 3,050 रुपये हुआ.
- खंडवा मंडी में 25,000 से 26,000 क्विंटल की आवक के बीच भाव 2,400 से 2,600 रुपये रहा.
- सोया DOC की कीमत इस महीने करीब 14,000 से 15,000 रुपये प्रति टन बढ़ी है.
- आकलन है कि बढ़िया क्वालिटी की मक्का जनवरी-फरवरी तक 3,400 से 3,600 रुपये की रेंज में पहुंच सकती है.
Maize Price : अक्टूबर में अच्छी क्वालिटी की मक्का के भाव चढ़े हैं, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में नई फसल की भारी आवक और ज्यादा नमी वाले माल पर दबाव बना हुआ है. मध्य प्रदेश के तिरुपति स्टार्च एंड केमिकल्स प्लांट में 14 से 19 फीसदी नमी वाली मक्का इस महीने करीब 320 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ी. महाराष्ट्र की सांगली मंडी में 22 अक्टूबर को भाव 3,050 रुपये तक पहुंच गया.
ऊपरी स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली भी दिखी है. प्लांट में मक्का का ताज़ा भाव 50 रुपये की गिरावट के साथ 2,500 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया. बाजार के आकलन में इसे बड़ी गिरावट का संकेत मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पोल्ट्री, फीड और एथेनॉल सेक्टर की मांग भाव को सहारा दे रही है.
मध्य प्रदेश में क्वालिटी का फर्क कितना बड़ा?
प्रदेश की मंडियों में आवक भारी है और भाव का दायरा बड़ा है . खंडवा में 25,000 से 26,000 क्विंटल की आवक के बीच भाव 2,400 से 2,600 रुपये रहा. गुना और खरगोन में निचला और ऊपरी भाव में 1,000 रुपये का फ़र्क़ है.
| मंडी | आवक (क्विंटल) | भाव (₹ प्रति क्विंटल) |
|---|---|---|
| खंडवा | 25,000 से 26,000 | 2,400 से 2,600 |
| भैरेंदा | 20,000 से 22,000 | 1,850 से 2,475 (25 रुपये की गिरावट) |
| गुना | 15,000 से 20,000 | 1,500 से 2,550 |
| खरगोन | 15,000 से 20,000 | 1,600 से 2,650 |
| टिमरनी | 16,000 से 17,000 | 2,200 से 2,650 |
| इटारसी | 10,000 से 15,000 | 2,200 से 2,525 (25 रुपये की गिरावट) |
| लुकवासा | 8,000 से 10,000 | 1,650 से 2,550 (50 रुपये की गिरावट) |
| कुंभराज | 20,000 | 1,600 से 2,500 |
ज्यादा नमी वाली सामान्य क्वालिटी की नई मक्का आवक के दबाव में है. कम नमी वाले अच्छे माल को प्लांट की खरीद का सहारा मिल रहा है. फिलहाल मक्का बाजार में यही सबसे अहम फर्क है.
पोल्ट्री फीड और एथेनॉल से मांग को सहारा
सोया DOC यानी तेल निकलने के बाद बची सोयाबीन खली की कीमत इस महीने करीब 14,000 से 15,000 रुपये प्रति टन बढ़ी है. इससे पोल्ट्री और फीड उद्योग की लागत काफी चढ़ गई. फीड फॉर्मूले में अब मक्का की तरफ रुझान ज्यादा दिख रहा है, जिससे अच्छी क्वालिटी की मक्का की मांग को अतिरिक्त सहारा मिला है.
एथेनॉल सेक्टर की खरीद भी मजबूत बताई जा रही है. चीनी की कीमतें काबू में रखने के लिए गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने पर सरकारी पाबंदी की खबर आई है. इससे बाजार में धारणा बनी है कि मक्का आधारित एथेनॉल की मांग को आगे और सहारा मिलेगा. पोल्ट्री, फीड, स्टार्च और एथेनॉल, चारों तरफ से औद्योगिक मांग बनी हुई है, इसलिए अच्छी क्वालिटी की मक्का में बड़ी कमजोरी नहीं दिख रही.
महाराष्ट्र, बिहार और दक्षिण भारत के भाव
सांगली मंडी में महीने की शुरुआत में बिल्टी मक्का का भाव करीब 2,725 रुपये प्रति क्विंटल था. 22 अक्टूबर को यह 3,050 रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 325 रुपये की तेजी. फीड और पोल्ट्री क्वालिटी की मक्का में भी भाव ऊंचे हैं. आजरा में नया भाव 3,190 रुपये, प्रीमियम चिक्स अहिरे में 3,150 रुपये (75 रुपये की बढ़त) और यूनिकॉर्न फीड में 3,140 रुपये रहा. बारामती, मंचर और टेंभुर्णी में 2,975 रुपये का भाव दिखा, जबकि CPF नेवासा में 50 रुपये और परख फुड्स भांडगांव में 25 रुपये की बढ़त रही.
बिहार में भाव 2,600 से 2,800 रुपये के बीच रहे. दालखोला फाइन में 2,670 से 2,800 रुपये और गुलाबबाग मीडियम मक्का में 2,640 से 2,670 रुपये (50 रुपये की बढ़त) का भाव दर्ज हुआ. दक्षिण भारत में गुंटूर रेडी लोडिंग 2,900 से 3,000 रुपये और कोप्पल 2,700 से 3,000 रुपये पर रहा. ताडीपत्री की नई मक्का 2,400 से 2,950 रुपये पर बिकी, जिसमें 50 रुपये की बढ़त है.
क्या 3,500 रुपये तक जा सकती है मक्का?
आकलन के मुताबिक बाजार में सबसे बड़ी खींचतान नई फसल की बढ़ती आवक और मजबूत औद्योगिक मांग के बीच है. आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश में आवक घटी और पोल्ट्री, स्टार्च व एथेनॉल प्लांटों की खरीद बनी रही, तो अच्छे माल में मजबूती जारी रह सकती है. बीच-बीच में 50 से 100 रुपये का उतार-चढ़ाव या मुनाफावसूली सामान्य मानी गई है.
यही मांग आगे भी रही तो जनवरी-फरवरी तक भाव 400 से 600 रुपये और बढ़ सकता है. तब बढ़िया क्वालिटी की मक्का 3,400 से 3,600 रुपये की रेंज में पहुंच सकती है. फिलहाल बाजार एकतरफा तेजी या मंदी के बजाय क्वालिटी के आधार पर चल रहा है.
अभी साफ़ नहीं है कि मध्य प्रदेश में आवक कब घटेगी. आगे का रुख इसी पर और प्लांटों की खरीद पर टिका रहेगा.
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