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सरसों भाव में तेजी पर लगेगा ब्रेक या फिर बनेगा नया रिकॉर्ड? जाने

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हाइलाइट्स

  • जयपुर में सरसों 50 रुपये बढ़कर 8950 रुपये रही, बाकी प्रमुख बाजारों में गिरावट आई
  • सलोनी प्लांट में 100 रुपये की गिरावट, भाव 9650 से 9700 रुपये रहे
  • मौजूदा सरसों स्टॉक करीब 33 लाख टन, आगे मासिक क्रशिंग 7/8 लाख टन रहने की संभावना
  • जयपुर सरसों के लिए 8900 रुपये अहम स्तर, इसके नीचे और करेक्शन की आशंका जताई गई

कमोडिटी मार्केट : सरसों के भाव (Mustard Price) में ऊपरी स्तरों से गिरावट आई है. 8 अक्टूबर को जयपुर सरसों 50 रुपये बढ़कर 8950 रुपये प्रति क्विंटल रही, लेकिन भरतपुर लोकल, मुरैना मंडी और गोयल कोटा प्लांट में 91 से 100 रुपये की कमजोरी दिखी. सलोनी प्लांटों में भाव 100 रुपये तक घटे. इस कमजोरी के पीछे मुख्य कारण सोयाबीन की नरमी और मिलों की सीमित खरीद को वजह बताया जा रहा है.

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सुबह बाजार में तेजी का माहौल था, पर शाम होते-होते मुनाफावसूली और मिलों की कमजोर खरीद हावी हो गई. दूसरी तरफ सरसों खल की मजबूती, करीब 33 लाख टन का अनुमानित स्टॉक और नई फसल की बुआई को लेकर चिंता बाजार को नीचे सहारा दे रही है.

सरसों बाज़ार भाव

जयपुर सरसों 50 रुपये तेज और सलोनी प्लांट भाव 100 रुपये नीचे रहे.

बाजारभाव (रुपये प्रति क्विंटल)बदलाव
जयपुर सरसों8950+50
भरतपुर लोकल सरसों8450-91
मुरैना मंडी 42% कंडीशन सरसों8400-100
गोयल कोटा प्लांट सरसों8750-100
शमसाबाद आगरा और दिगनेर आगरा सलोनी9700-100
अलवर9675-100
मुरैना9675-100
कोटा9650-100

गिरावट की वजह क्या बताई गई?

कृषि व्यापार की रिपोर्ट के मुताबिक सोयाबीन में ऊपरी स्तरों पर आई कमजोरी और खाद्य तेलों में सुस्त ग्राहकी का असर सरसों पर पड़ा. इसी वजह से मिलों ने नई सरसों की खरीद सीमित कर दी, और दिन के ऊँचे स्तरों पर बाजार टिक नहीं पाया.

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सरसों खल की मजबूती को नीचे सहारा देने वाला अहम कारण बताया गया है. खल के भाव मजबूत रहने से क्रशिंग को भी सहारा मिल रहा है.

स्टॉक, क्रशिंग और बुआई

मौजूदा सरसों स्टॉक करीब 33 लाख टन रहने का अनुमान है. अगले पाँच महीनों में औसत क्रशिंग करीब 7/8 लाख टन प्रति माह रहने की संभावना जताई गई है. क्रशिंग इसी रफ्तार से चली तो आने वाले महीनों में स्टॉक तेजी से घट सकता है, और आगे उपलब्धता को लेकर बाजार में चिंता है.

नई फसल को लेकर भी नज़र बनी हुई है. प्रतिकूल मौसम के कारण आगामी सीजन में बुआई प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. बुआई में देरी हो और उसके बाद गर्म मौसम रहे, तो उत्पादन और पैदावार पर असर पड़ सकता है.

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यानी बाजार की दिशा सिर्फ़ 33 लाख टन के स्टॉक से तय नहीं होगी. नई फसल का रकबा, मौसम और संभावित उत्पादन भी इसमें भूमिका निभाएँगे. बुआई कमजोर रही तो लंबी अवधि में सरसों को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है.

आगे 8900 और 9000 रुपये पर नज़र

कल शाम की गिरावट संकेत देती है कि 8900 से 9000 रुपये के आसपास बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ रहा है. जयपुर सरसों के लिए फिलहाल 8900 रुपये का स्तर अहम है. भाव इस स्तर के आसपास टिका तो तेजी फिर लौट सकती है. इसके नीचे लगातार कमजोरी आई तो कुछ और करेक्शन देखने को मिल सकता है.

कम जोखिम चाहने वाले किसान या व्यापारी कुछ माल निकाल सकते हैं, जबकि ज्यादा जोखिम उठाने वाले होल्ड कर सकते हैं और मंडियों में 9000 व सलोनी प्लांट में 10,000 रुपये होने तक इंतजार कर सकते हैं.

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अभी साफ़ नहीं है कि जयपुर में 8900 रुपये का स्तर पर टिक पाएगा या नहीं. नई फसल की बुआई कितनी होगी और मौसम कैसा रहेगा, यह भी तय नहीं है. बाजार की अगली दिशा इन्हीं बातों पर निर्भर रहेगी.

डिस्क्लेमर : ई मंडी रेट्स (eMandiRates) पर उपलब्ध मंडी भाव, कीमतों और बाजार से संबंधित जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री या व्यापारिक निर्णय लेने की सलाह न समझें। किसी भी व्यापारिक सौदे से पहले अपने विवेक, बाजार की परिस्थितियों और अन्य आवश्यक पहलुओं का आकलन अवश्य करें। इस जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी लेन-देन या व्यापार से होने वाले लाभ अथवा हानि के लिए ई मंडी रेट्स किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगा।

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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