हाइलाइट्स
- मिट्टी का पीएच 7 से ऊपर हो तो फिटकरी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- पीएच 7 पर 1.5 किलो, 7.5 या 8 पर 2 किलो फिटकरी प्रति एकड़ लगती है.
- 2 किलो फिटकरी को 200 लीटर पानी में घोलकर पलेवा के समय खेत में चलाएं.
- घोल फसल की पत्तियों पर पड़ा तो फसल सूख सकती है.
- फिटकरी खाद नहीं है, इसे पीएच जाँचने के बाद सिर्फ मिट्टी में डालें.
Farming Tips: गेंहू और सरसों की बुवाई करने से पहले खेतों में फिटकरी का इस्तेमाल करने से उत्पादन में इजाफा होगा. यदि खेत की मिट्टी का PH लेवल यदि 7 से ऊपर हो, तो खेत में फिटकरी का इस्तेमाल किया जा सकता है. सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर के मुताबिक पीएच 7 पर 1.5 किलो, 7.5 या 8 पर 2 किलो और 8 से ऊपर होने पर 3 किलो तक फिटकरी प्रति एकड़ दी जा सकती है. घोल बुवाई से पहले पलेवा के समय खेत में चलाना है. धान की कटाई के बाद गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की तैयारी कर रहे किसानों के लिए यह जानकारी बेहद काम की है.
फिटकरी जो की आसानी से मार्केट में 40 से 50 रुपये प्रतिकिलो में मिल जाती है. प्रोफेसर सेंगर के मुताबिक फिटकारी के इस्तेमाल सही विधि और मात्रा से नहीं करने पर फ़ायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है. इसलिए किसानों को इसका इस्तेमाल करने से पहले सही जानकारी होना बेहद जरूरी है.
फिटकरी मिट्टी के Ph संतुलन में उपयोगी
प्रोफेसर सेंगर का कहना है कि किसान सालों से अधिक पैदावार के लिए डीएपी और यूरिया डालते आ रहे हैं. इससे मिट्टी का पीएच लेवल बढ़ता गया है. पीएच बढ़ने पर खाद डालने के बाद भी अच्छी पैदावार नहीं मिलती, क्योंकि मिट्टी जरूरी पोषक तत्व ले ही नहीं पाती.
पीएच मिट्टी के खारेपन या अम्लीयपन को नापने का पैमाना है और 7 का आंकड़ा बीच का माना जाता है. जिन खेतों में यह 7 से ऊपर, यानी साढ़े सात या 8 तक पहुंच गया है, वहां फिटकरी से पीएच घटाया जा सकता है.
पीएच के हिसाब से कितनी फिटकरी डालें?
| मिट्टी का पीएच | फिटकरी (प्रति एकड़) |
|---|---|
| 7 | 1.5 किलो |
| 7.5 या 8 | 2 किलो |
| 8 से ज्यादा | 3 किलो तक |
फिटकरी को पहले पाउडर बना लेना है, वरना घुलने में ज्यादा समय लगेगा. 2 किलो फिटकरी के लिए 200 लीटर पानी चाहिए और इसे अच्छी तरह घोलना है.
पलेवा के समय घोल कैसे चलाएं
खेत तैयार करते समय जब पलेवा दिया जाता है, तब यह घोल पूरे खेत में उसी तरह चलाना है जैसे सिंचाई का पानी चलाते हैं. यह काम बुवाई से पहले होना चाहिए, ताकि घोल पत्तियों पर न गिरे.
बिजाई करने के बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. जो किसान सिर्फ जड़ों में पानी देते हैं, यानी ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करते हैं, वे घोल को पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं. स्प्रिंकलर से सिंचाई करने वाले किसान इसका प्रयोग न करें, क्योंकि पत्तियों पर पड़ने से फसल सूख सकती है.
नोट – पलेवा बुवाई से ठीक पहले खेत में की जाने वाली पहली गहरी सिंचाई को कहते हैं।
फिटकरी से क्या मिलता है और क्या सावधानी जरूरी है?
प्रोफेसर सेंगर के अनुसार फिटकरी में पोटेशियम और सल्फर जैसे पोषक तत्व होते हैं. इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है, पीएच संतुलन में रहता है और उपज बढ़ती है.
फिटकरी खाद नहीं है और इसे खाद की तरह इस्तेमाल नहीं करना है. घोल सिर्फ मिट्टी में जाना चाहिए, फसल पर कभी नहीं. इसे डालने से पहले अपने खेत की मिट्टी का पीएच जाँच लें.
डिस्क्लेमर – फिटकरी का इस्तेमाल करने से पहले किसान स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से राय अवश्य ले लें .
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Video- Kheti Me Fitkari Dalne ke Fayde or Tarika
“खेतों में फिटकरी का इस्तेमाल” के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):
किन खेतों में फिटकरी डालनी चाहिए?
जिन खेतों की मिट्टी का पीएच लेवल 7 से ऊपर है, यानी साढ़े सात या 8 है. पीएच जाँचे बिना इसे डालना सही नहीं है.
खेत में फिटकरी कब डालनी चाहिए?
बुवाई से पहले, खेत तैयार करते समय पलेवा के दौरान डालना सबसे अधिक कारगर है। बुवाई के बाद ड्रिप से सिंचाई के वक्त भी डाल सकते है .
एक एकड़ में कितनी फिटकरी लगती है?
मात्रा मिट्टी के पीएच पर निर्भर है. पीएच 7 हो तो 1.5 किलो, 7.5 या 8 हो तो 2 किलो और 8 से ज्यादा हो तो 3 किलो तक फिटकरी प्रति एकड़ ली जा सकती है. पहले खेत का पीएच जरूर जाँच लें.
स्प्रिंकलर से सिंचाई करने वाले किसान फिटकरी डाल सकते हैं?
बुवाई के बाद स्प्रिंकलर वाले किसानों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए. घोल पत्तियों पर पड़ने से फसल सूख सकती है. घोल सिर्फ मिट्टी में पड़ना चाहिए, फसल पर नहीं.










