हाइलाइट्स
- पलामू में आलू लगाने का सही समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर माना जाता है.
- कुछ उन्नत किस्मों से कट्ठे में चार क्विंटल तक पैदावार का लक्ष्य रख सकते हैं.
- पलामू, गढ़वा, लातेहार के किसान सी-40 उगाते रहे हैं, अब कुफरी किस्मों पर जोर.
- खेत में पानी जमा होने से कंद सड़ने और रोग का खतरा बढ़ सकता है.
Aalu ki kheti : झारखंड के पलामू में किसान आलू की बुआई (Potato Farming) के लिए खेत तैयार करने में जुटे हैं. जुताई चल रही है, मिट्टी तैयार की जा रही है और बीज का इंतज़ाम हो रहा है. जिले में आलू लगाने का उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक माना जाता है. पलामू जिले के कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक सही किस्म और देखभाल से पैदावार बढ़ाई जा सकती है.
किसान आमतौर पर आलू की खेती में पारंपरिक किस्में लगाते आए हैं, लेकिन इस बार बेहतर उत्पादन (Bumper Harvest) देने वाली नई किस्मों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. डॉ. कुमार ने कहा कि आलू की कुछ उन्नत किस्मों (Improved varieties) से एक कट्ठे में 4 क्विंटल तक उत्पादन का लक्ष्य रखा जा सकता है. कट्ठा बिहार-झारखंड में चलने वाली ज़मीन की स्थानीय माप है और इलाके के हिसाब से इसका आकार अलग हो सकता है. असल उपज मिट्टी, मौसम और खेती की तकनीक पर निर्भर करेगी.
आलू के लिए कैसी मिट्टी चाहिए?
डॉ. कुमार ने बताया कि आलू के लिए भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त होती है. खेत में पानी जमा हो जाए तो कंद सड़ सकते हैं और फसल में रोग का खतरा बढ़ जाता है.
बुआई से पहले खेत की अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. तैयारी के दौरान गोबर की सड़ी खाद डालने और उर्वरकों का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह के हिसाब से करने की सलाह दी.
सी-40 से कुफरी तक का बदलाव
पलामू, गढ़वा और लातेहार के कई किसान लंबे समय से C-40 नाम से जानी जाने वाली आलू की किस्म उगा रहे हैं. किसानों के अनुभव में इससे उत्पादन अपेक्षाकृत कम मिलता है. कुछ किसान C-1 किस्म भी लगाते हैं.
अब किसानों को कुफरी श्रृंखला की उन्नत किस्मों की तरफ़ ले जाने की कोशिश हो रही है, ताकि कम ज़मीन में ज़्यादा उत्पादन मिल सके. डॉ. कुमार ने बताया कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) आलू की उन्नत किस्में विकसित करने और बेहतर उत्पादन तकनीक पर काम करता है.
बीज कहाँ मिलेगा ?
पटना के पास फुलवारी शरीफ में कृषि अनुसंधान केंद्र है. डॉ. कुमार के मुताबिक वहाँ और कृषि विज्ञान केंद्रों से किसानों को बीज तथा तकनीकी जानकारी मिल जाएगी. पलामू के किसान आरा के कृषि विज्ञान केंद्र से उन्नत किस्मों के बीज लाने की तैयारी कर रहे हैं.
विशेषज्ञ की सलाह है कि बीज खरीदने से पहले किस्म का नाम, उसकी उपज क्षमता और पलामू की जलवायु के अनुकूल होने की जानकारी ज़रूर ले लें.
बुआई के बाद की देखभाल
बुआई के बाद खेत में इन कामों पर ध्यान देने को कहा गया है:
- समय पर सिंचाई
- खरपतवार पर नियंत्रण
- पौधों पर मिट्टी चढ़ाना
- ज़रूरत से ज़्यादा पानी न देना, और रोग के लक्षण दिखें तो कृषि विशेषज्ञ से सलाह तुरंत ले लेनी चाहिए
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विशेषज्ञ का कहना है कि प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर उत्पादन और आमदनी बेहतर हो सकती है. फिलहाल इन केंद्रों पर कुफरी की कौन-सी किस्में उपलब्ध है और कीमत इत्यादि की जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों पर संपर्क करें.










