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चीनी का भाव आगे कहां जाएगा… एल नीनो से घाटे का डर, इस साल ग्लोबल स्तर पर 18% चढ़े दाम

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हाइलाइट्स

  • इस साल ग्लोबल चीनी कीमतें 18% चढ़ीं, कच्ची चीनी वायदा जुलाई से 25% से ज्यादा उछला.
  • 15 अक्टूबर से डीलर सिर्फ 1,000 क्विंटल चीनी 15 दिन तक रख सकेंगे.
  • महाराष्ट्र में उत्पादन 99 लाख टन से घटकर 80 लाख टन रहने का अनुमान है.
  • उत्तर प्रदेश की मिलों में भाव ₹4,630 तक, चेन्नई स्पॉट ₹5,113.50 पर पहुंचा.

Sugar Price: चीनी बाजार में इस वक्त दो तस्वीरें साथ चल रही हैं. ग्लोबल बाजार में एल नीनो के डर से इस साल चीनी 18% महंगी हुई है, और कच्ची चीनी का वायदा जुलाई से 25% से ज्यादा उछला है. वहीं भारत में सरकार ने 15 अक्टूबर से डीलरों की स्टॉक सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी है. उत्तर प्रदेश की मिलों में भाव ₹4,630 प्रति क्विंटल तक हैं.

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असल में दिक्कत आपूर्ति की है. डेटामार न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक साल की शुरुआत में चीनी की सप्लाई पर्याप्त थी, लेकिन मौसम का जोखिम बढ़ते ही तस्वीर बदल गई. विश्लेषकों को आशंका है कि इस हफ्ते शुरू हो रहे नए सीजन में दुनिया का चीनी बाजार घाटे में जा सकता है.

घरेलू मंडियों में चीनी कहां कितने पर बिक रही है?

ई मंडी रेट्स की 5 अक्टूबर की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश की मिलों में Chini ke Bhav मजबूत बने हुए हैं. देवबंद, टिकौला और शेरमऊ में चीनी ₹4,630 पर है. बलरामपुर की M31 डबल रिफाइंड ₹4,600 पर टिकी है. ₹4,500 से ₹4,630 का दायरा मजबूत सपोर्ट बना हुआ है.

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इलाका / ग्रेडभाव (₹)
UP मिल (देवबंद, टिकौला, शेरमऊ)4,630
बलरामपुर M31 डबल रिफाइंड4,600
महाराष्ट्र, M ग्रेड4,400-4,585
महाराष्ट्र, S/SS ग्रेड4,300-4,390
तिरुवन्नामलाई5,000
चेन्नई स्पॉट5,113.50

दक्षिण भारत सबसे ऊपर है. चेन्नई स्पॉट का भाव उत्तर प्रदेश की मिलों से करीब ₹483 ज्यादा बैठता है. यानी इलाके और ग्रेड के हिसाब से फर्क साफ दिख रहा है.

सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट में किया बदलाव

खाद्य मंत्रालय ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा कि 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर के चीनी डीलर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी ही रख सकेंगे. स्टॉक रखने की अनुमति सिर्फ 15 दिन की होगी. मकसद त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है.

Sugar Stock limit:-

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  • अगस्त: 4,000 क्विंटल की सीमा, 1 अगस्त से 30 नवंबर तक, स्टॉक अधिकतम 30 दिन.
  • 15 सितंबर से: सीमा घटकर 2,000 क्विंटल.
  • 15 अक्टूबर से: सीमा 1,000 क्विंटल, स्टॉक सिर्फ 15 दिन.
  • कोलकाता (विस्तारित महानगरीय क्षेत्र) और असम: 2,000 क्विंटल.

कोलकाता और असम को ज्यादा सीमा क्यों मिली?

मंत्रालय के अनुसार कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदकर पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक भेजता है. असम में भौगोलिक हालात और ट्रांसपोर्ट की चुनौतियां हैं.

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 1 से 15 अक्टूबर के लिए 14 लाख टन का बिक्री कोटा जारी हुआ है. इसमें महाराष्ट्र को करीब 4.39 लाख टन और उत्तर प्रदेश को करीब 4.17 लाख टन मिला है.

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क्या सच में सस्ती हो चुकी है चीनी?

मंत्रालय का दावा है कि अगस्त के हाई से औसत खुदरा दाम करीब 15% नीचे आ चुके हैं. आगे और नरमी की उम्मीद जताई गई है. मिल स्तर पर कीमतों में करीब 28% की गिरावट आई है, जो तीन हफ्ते से स्थिर है.

खास बात ये है कि स्टॉक सीमा अगस्त के मुकाबले 75% घटाई जा चुकी है. सरकार का मानना है कि इससे जमाखोरी, सट्टेबाजी और कृत्रिम कमी की कोशिशों पर रोक लगेगी. मिलों, डीलरों और थोक-खुदरा व्यापारियों से कहा गया है कि एक्स-मिल गिरावट का फायदा तुरंत ग्राहकों तक पहुंचाएं.

ब्राजील में बारिश से कितना घटेगा निर्यात?

दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील में अत्यधिक बारिश से गन्ने की कटाई और पेराई प्रभावित हुई है. वायसाला एक्सवेदर के कृषि मौसम विज्ञानी डोनाल्ड कीनी के अनुसार पिछले एक महीने में कुछ प्रमुख क्षेत्रों में बारिश सामान्य से चार गुना तक रही.

ग्रुपो जोस पेसोआ के जोस पेसोआ का अनुमान है कि ब्राजील का चीनी निर्यात करीब 20 लाख टन घट सकता है. आगे भी भारी बारिश की आशंका है. इसलिए हो सकता है कि मिलें नवंबर का नुकसान दिसंबर तक पेराई चलाकर भी पूरा न कर पाएं.

भारत और थाईलैंड में उत्पादन का क्या हाल है?

भारत में कमजोर मानसून के कारण चीनी उत्पादन का अनुमान अब करीब 3 करोड़ टन लगाया जा रहा है. महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित है. WISMA के अनुसार 2026/27 में राज्य का उत्पादन 99 लाख टन से घटकर 80 लाख टन रह सकता है, यानी करीब 19 लाख टन कम.

ग्रीन पूल कमोडिटी स्पेशलिस्ट्स के CEO एडर वीटो के मुताबिक पिछले सरप्लस के बाद स्टॉक घट रहा है. अगली फसल भी कमजोर रही तो कमी पूरी करने की भारत की क्षमता सीमित रह सकती है. वहीं उत्तर प्रदेश की कई मिलें मध्य अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, जो पिछले साल से करीब 10 दिन पहले है.

थाईलैंड के सबसे बड़े गन्ना क्षेत्र उत्तर-पूर्व में बारिश 30 साल के औसत की सिर्फ करीब दो-तिहाई रही. अगले सीजन में उत्पादन कम से कम 17% घटकर 1 करोड़ टन से नीचे जा सकता है. चुकंदर पर भी मार है. एक्सपाना के अनुसार फ्रांस में उत्पादन कम से कम 1980 के बाद के सबसे कमजोर स्तर की ओर बढ़ रहा है.

क्या चीनी के दाम और चढ़ेंगे?

सिटी रिसर्च का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में चीनी करीब 20% महंगी हो सकती है. वजह प्रतिकूल मौसम और आधिकारिक आंकड़ों से कम बताया जा रहा भंडार है. ISO के अनुसार 2026/27 में दुनिया में 20 लाख टन चीनी की कमी रह सकती है.

सट्टा निवेश भी आ चुका है. चीनी वायदा में ओपन इंटरेस्ट रिकॉर्ड स्तर पर है और हेज फंडों की पोजीशन कई साल में सबसे तेजी वाली है. राबोबैंक के कार्लोस मेरा के मुताबिक कीमतें वाजिब स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं.

हालांकि ब्रेक भी लग सकता है. Czarnikow के स्टीफन गेल्डार्ट के अनुसार बदलती पसंद, फॉर्मूले में बदलाव और GLP-1 वजन घटाने वाली दवाओं से लंबे समय में मीठे की मांग प्रभावित हो सकती है. घरेलू बाजार पर ई मंडी रेट्स का आकलन है कि त्योहारी मांग और ग्लोबल घाटे के कारण गिरावट की गुंजाइश सीमित है. नई पेराई से आवक बढ़ेगी, पर महाराष्ट्र में सूखे और कम रिकवरी से मध्यम अवधि का रुख मजबूत बना हुआ है.

आगे की तस्वीर अभी तय नहीं है. ब्राजील में बारिश कब थमेगी, भारत की अगली फसल कितनी रहेगी और 15 अक्टूबर के बाद स्टॉक सीमा का असर मंडी भाव पर कितना दिखेगा, इन तीनों पर नजर रहेगी. बड़ी खरीद या सौदे से पहले अपनी लोकल मंडी का भाव जरूर मिला लें.

(डिस्क्लेमर : निवेश से पहले सर्टिफाइड सलाहकार से सलाह लें. किसी भी प्रकार के नफे या नुकसान की ई मंडी रेट्स की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी.)

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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