हाइलाइट्स
- महाराष्ट्र में थोक भाव 4,030 से घटकर 3,475 रुपये प्रति 100 किलो रहा.
- दिल्ली में करीब 10.5% और चंडीगढ़ में 8.1% सस्ता हुआ प्याज, बिहार-मेघालय में असर कम.
- सरकार 123 शहरों में 2 लाख टन से ज्यादा बफर स्टॉक का प्याज उतार चुकी.
- महाराष्ट्र में खुदरा भाव सिर्फ 1.5% गिरे, यानी थोक के मुकाबले राहत कम.
महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का औसत थोक भाव 16 सितंबर के 4,030 रुपये से गिरकर 3 अक्टूबर को 3,475 रुपये प्रति 100 किलो पर आ गया. यानी करीब दो हफ्ते में 13% की गिरावट. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से खरीफ प्याज की नई आवक बढ़ी है. सरकारी बफर स्टॉक से बिक्री ने भी त्योहारी सीजन में कीमतों को ठंडा किया है .
महाराष्ट्र में खुदरा राहत थोड़ी कम दिखी है. वहां रिटेल भाव 1.5% नीचे आए, जबकि कई राज्यों में प्याज की कीमत (Onion Price) 1 रुपये से 21 रुपये प्रति किलो तक घटी है.
थोक मंडी में कितना सस्ता हुआ प्याज?
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में प्याज का औसत थोक भाव 16 सितंबर को 4,030 रुपये प्रति 100 किलो था. 3 अक्टूबर तक यह 3,475 रुपये पर आ गया. यानी 555 रुपये प्रति क्विनटल जो की प्रति किलो करीब 5.55 रुपये बैठती है.
मंत्रालय के आंकड़े एक नजर में:
| पैमाना | आंकड़ा |
|---|---|
| महाराष्ट्र में थोक भाव (16 सितंबर) | 4,030 रुपये प्रति 100 किलो |
| महाराष्ट्र में थोक भाव (3 अक्टूबर) | 3,475 रुपये प्रति 100 किलो |
| थोक में गिरावट | करीब 13% |
| महाराष्ट्र में खुदरा गिरावट | 1.5% |
| बफर स्टॉक से निकासी | 2 लाख टन से ज्यादा |
| कवर हुए शहर | 123 |
नई फसल की आवक ने बदला बाजार का रुख
इसकी सबसे बड़ी वजह सप्लाई में सुधार है. मंत्रालय के मुताबिक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों से खरीफ प्याज की ताजा आवक रफ्तार पकड़ रही है. मंडियों में माल बढ़ता है तो भाव पर दबाव आना स्वाभाविक है.
खास बात ये है कि यह गिरावट त्योहारी सीजन में आई है. इन दिनों रसोई का बजट सबसे ज्यादा मायने रखता है, इसलिए प्याज की नरमी आम घरों के लिए राहत की खबर है. हालांकि यह राहत हर शहर में एक जैसी नहीं है.
सरकार ने बफर स्टॉक से कितना प्याज उतारा?
बता दें कि बुधवार तक सरकार बफर स्टॉक से 2 लाख टन से ज्यादा प्याज 123 शहरों में उतार चुकी है. मंत्रालय के मुताबिक इस बिक्री से उपलब्धता सुधरी है और त्योहारी सीजन में दाम ठंडे पड़े हैं. असल में बफर स्टॉक का मकसद ही ऐसे वक्त बाजार को सहारा देना है.
ज्यादा खपत वाले बाजारों तक बड़ी मात्रा पहुंचाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक लगाने की योजना है. रेल से माल पहुंचा तो दूर-दराज के शहरों में भी सप्लाई तेज हो सकती है.
दिल्ली-चंडीगढ़ में ज्यादा राहत, बिहार-मेघालय में कम
कीमतों में सुधार हर जगह बराबर नहीं रहा. मंत्रालय के मुताबिक कई राज्यों में खुदरा रेट 1 रुपये से 21 रुपये प्रति किलो तक गिरे. उत्तर भारत के बाजारों में सबसे ज्यादा करेक्शन दिखा, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर के कुछ बाजारों में असर बेहद कम रहा.
- दिल्ली: करीब 10.5% की गिरावट.
- चंडीगढ़: करीब 8.1% की गिरावट.
- बिहार: करीब 0.6% की गिरावट.
- मेघालय: 0.57% की गिरावट.
यानी उत्तर और पूर्वोत्तर के बाजारों के बीच करीब 10 फीसदी का फासला है. हालांकि रेल रैक से बाकी बाजारों में माल पहुंचाने की योजना आगे तस्वीर बदल सकती है.
आम रसोई के बजट पर क्या असर?
महाराष्ट्र के आंकड़े देखें तो थोक में 13% गिरावट के मुकाबले खुदरा में सिर्फ 1.5% कमी आई है. यानी थोक मार्केट की नरमी का पूरा फायदा अभी ग्राहकों को नहीं मिल पाया है . आने वाले दिनों में खुदरा भाव और नीचे आएंगे या नहीं, यह फिलहाल तय नहीं है.










