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रबी फसलों का MSP बढ़ा… गेहूं में 25, सरसों में 413 और कुसुम में 675 रुपये की बढ़ोतरी

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हाइलाइट्स

  • सीसीईए ने 2027-28 के लिए छह रबी फसलों का MSP बढ़ाया, गेहूं 2610 रुपये.
  • कुसुम में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी, नया रेट 7215 रुपये प्रति क्विंटल.
  • सरसों 413 रुपये बढ़कर 6613 और मसूर 390 रुपये बढ़कर 7390 रुपये हुई.
  • गेहूं किसानों को 2014-15 से 2025-26 तक 7.31 लाख करोड़ का MSP भुगतान हुआ.

Rabi Crops MSP Hike 2027-28: केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह फसलों का MSP बढ़ा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इसे आज मंजूरी दे दी है . गेहूं का भाव 25 रुपये बढ़कर 2610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, जबकि कुसुम में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़त के साथ रेट 7215 रुपये पहुंच गया.

सरसों में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये और चने में 83 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है. सरकार का कहना है कि इससे किसानों को लाभकारी मूल्य मिलेगा और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा.

किस फसल का कितना बढ़ा रेट?

नई दरों में रेपसीड-सरसों, मसूर और कुसुम की बढ़ोतरी गेहूं और चने के मुकाबले काफी बड़ी है. पिछले साल यानी 2026-27 के रेट से तुलना करें तो कुसुम में करीब 10 फीसदी का उछाल आया है. सरसों में यह आंकड़ा लगभग 6.7 फीसदी बैठता है. गेहूं में सिर्फ़ करीब 1 फीसदी.

फसलMSP 2026-27MSP 2027-28बढ़ोतरी (रुपये)करीब फीसदी*
गेहूं25852610251.0
जौ215022861366.3
चना58755958831.4
मसूर700073903905.6
सरसों-रेपसीड620066134136.7
कुसुम6540721567510.3

*सरकारी रेट के आधार पर निकाला गया अनुमानित हिसाब. सभी रेट रुपये प्रति क्विंटल.

यानी रुपये के हिसाब से तिलहन और मसूर में अनाज व चने से तेज बढ़त हुई है. प्रति किलो के हिसाब से देखें तो गेहूं का MSP 26.10 रुपये और सरसों का 66.13 रुपये बैठता है. पिछले साल की तुलना में यह फर्क किसान की जेब में साफ़ दिखेगा.

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लागत के मुकाबले किसान को कितना मार्जिन?

सरकार का कहना है कि ये दरें केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप हैं. उस घोषणा में MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखने की बात थी. इस पैमाने पर गेहूं की लागत 1264 रुपये क्विंटल आंकी गई है और मार्जिन 106 फीसदी बैठता है.

दूसरे छोर पर कुसुम है. इसकी उत्पादन लागत 4810 रुपये क्विंटल मानी गई है और MSP पर मार्जिन सिर्फ़ 50 फीसदी रहता है. चना (59%) और जौ (58%) भी इसी के आसपास हैं. वहीं सरसों-रेपसीड पर 96 फीसदी और मसूर पर 92 फीसदी का मार्जिन मिलता है.

ध्यान रहे कि यह लागत सिर्फ़ नकद खर्च नहीं है. इसमें किराए का मजदूर, बैल या मशीन का खर्च, पट्टे की जमीन का किराया, बीज-खाद, सिंचाई शुल्क, डीजल-बिजली, ब्याज और परिवार की मेहनत का अनुमानित मूल्य भी जोड़ा गया है.

गेहूं की सरकारी खरीद 65 फीसदी बढ़ी

सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद 3715 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई. इससे पहले 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 2254 लाख मीट्रिक टन थी. यानी करीब 65 फीसदी ज्यादा.

छह रबी फसलों की खरीद का आंकड़ा 3921 लाख मीट्रिक टन है, जो पहले के दशक में 2302 लाख मीट्रिक टन था. खास बात ये है कि दोनों अवधियों की लंबाई बराबर नहीं है. पहले दौर में 10 साल गिने गए हैं और ताजा दौर में 12 साल. तुलना करते वक्त यह फर्क याद रखना चाहिए.

गेहूं किसानों तक पहुंचे 7.31 लाख करोड़

2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं उत्पादक किसानों को MSP के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह रकम 2.56 लाख करोड़ रुपये थी. मतलब करीब 2.9 गुना.

छह रबी फसलों पर नजर डालें तो भुगतान 2.65 लाख करोड़ से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह लगभग 3.2 गुना है. हालांकि ये आंकड़े कुल भुगतान के हैं. इनसे यह साफ़ नहीं होता कि कितने किसानों तक यह रकम पहुंची.

दलहन-तिलहन पर सरकार का जोर क्यों?

सरकार ने कहा है कि हाल के सालों में अनाज के साथ दलहन और तिलहन को भी ऊंचे MSP के जरिये बढ़ावा दिया जा रहा है. इस बार की दरों में यही रुझान दिखता है. कुसुम, सरसों और मसूर, तीनों में रुपये के हिसाब से चना, जौ या गेहूं से कहीं बड़ी बढ़त हुई है.

गेहूं बोने वाले किसान के लिए बढ़त मामूली है. वहीं सरसों, मसूर या कुसुम की तरफ जाने वाले को ज्यादा रेट का भरोसा मिलेगा. हालांकि पैदावार और मंडी भाव भी कमाई तय करेंगे, इसलिए सिर्फ़ MSP देखकर फैसला करना ठीक नहीं होगा.

“Rabi Fasal MSP 2027-28″ के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):

रबी फसलों का नया MSP 2027-28 कितना है?

विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP 2610, जौ का 2286, चने का 5958, मसूर का 7390, रेपसीड-सरसों का 6613 और कुसुम का 7215 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है. ये सभी दरें सीसीईए की मंजूरी के बाद घोषित हुई हैं.

गेहूं का MSP कितना बढ़ा है?

गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. पिछले सीजन यानी 2026-27 में यह 2585 रुपये था. बढ़ोतरी करीब 1 फीसदी है, जबकि लागत के मुकाबले मार्जिन 106 फीसदी रखा गया है, जो सबसे ऊंचा है.

किस फसल के MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई?

कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इसका रेट 6540 रुपये से बढ़कर 7215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, यानी करीब 10 फीसदी का उछाल. दूसरे नंबर पर सरसों (413 रुपये) और तीसरे पर मसूर (390 रुपये) हैं.

जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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