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Cold Wave: गेहूं की पत्तियां पीली हो रही है ? ये है असली कारण और इलाज, जानें एक्सपर्ट सलाह

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Gehu Me Pilapan: दोस्तों, इस समय राजस्थान, हरियाणा और पंजाब समेत पूरे उत्तरी भारत में पड़ रही कड़ाके की सर्दी में किसानों के बीच एक ही बात की चिंता है और वो है उनकी गेहूं में पीलापन । जनवरी की शुरुआत के साथ ही सर्दी जोर पकड़ चुकी है और खेतों में गेहूं की निचली पत्तियां पीली हो रही हैं। इसे देखकर ऐसा लग रहा है मानो फसल में कोई बीमारी आ गई हो। लेकिन हकीकत ये है कि ये कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ठंड का असर है। किसानों की चिंता भी जायज़ है, लेकिन इसका समाधान भी आसान है। आइए, जानते हैं गेहूं की पत्तियों में पीलेपन का कारण और उपचार।

क्या है गेहूं की पत्तियों के पीले होने का असली कारण?

किसान साथियों इस समय अत्यधिक Cold Wave पड़ रहा है। ऐसे में जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है, तो मिट्टी में सूक्ष्मजीव गतिविधि (Microbial Activity) कम हो जाती है। जिसके कारण पौधे का जो नाइट्रोजन ग्रहण (Nitrogen Uptake) होता है, वो धीमा पड़ जाता है।

गेहूं का पौधा नाइट्रोजन को उपलब्ध रूप में, यानी नाइट्रेट में बदलता है। लेकिन नाइट्रोजन तत्व बहुत ही गतिशील होता है। जब पौधे को नाइट्रोजन कम मिलता है, तो ये तत्व निचली पत्तियों से ऊपरी पत्तियों की ओर चला जाता है। इसलिए निचली पत्तियां पीली हो जाती हैं और ऊपरी वाली हरी रहती हैं। ये एक प्राकृतिक प्रोसेस है, कोई बीमारी नहीं।

बीमारी नहीं, तो फिर क्यों हो रहा है पीलापन?

कई किसान भाई सोच रहे हैं कि ये कोई बीमारी तो नहीं? तो आपको बता दें, ये बिल्कुल भी बीमारी नहीं है। Plant Physiology की बात करें तो जब पौधे को तनाव (स्ट्रेस) होता है, तो वो अपने जरूरी पोषक तत्वों को ऊपर की ओर भेजता है, ताकि नई पत्तियां और तनों का विकास बेहतर हो सके। ये पौधे का अपना सर्वाइवल मैकेनिज्म (Survival Mechanism) है।

जैसे ही तापमान थोड़ा बढ़ेगा और सूरज की रोशनी मिलेगी, माइक्रोबियल एक्टिविटी नॉर्मल हो जाएगी और नाइट्रोजन अपटेक बेहतर हो जाएगा । जिसके बाद ये पौधे समय के साथ अपने आप ठीक हो जाएंगे।

गंभीर स्थिति में क्या करें? एक्सपर्ट सलाह

अगर आपके खेत में समस्या आपको कुछ ज़्यादा ही गंभीर लग रही है और बहुत ज्यादा पत्तियां पीली हो रही हैं, तो आप एक छिड़काव कर सकते हैं। आप इसके लिए 2 प्रतिशत यूरिया का घोल तैयार करें। इसके लिए 20 ग्राम यूरिया को प्रति लीटर पानी में घोल लें और इसका छिड़काव गेहूं की फसल पर करें। ये तुरंत असर दिखाएगा और पौधे को राहत मिलेगी।

लेकिन ध्यान रखें, ये सिर्फ तब करें जब समस्या गंभीर हो। हल्के पीलापन के लिए इंतज़ार करना बेहतर है।

अत्यधिक ठंड से कैसे बचाएं गेहूं और अन्य फसलों को?

Winter Crop Protection के लिए कुछ सरले उपाय हैं:

  • हल्की सिंचाई: ठंड के दिनों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पानी तापमान को नियंत्रित करता है।
  • धुआं करें: खेतों के किनारे (मेड़) पर पुराने पत्ते, खरपतवार जलाकर धुआं करें। इससे पाले का असर काफी कम पड़ेगा।

पत्ता झड़ने और धब्बे की समस्या? ये है इलाज

कई बार पाले के साथ-साथ Fungal Disease भी हो जाती है। अगर पत्ता झड़ रहा हो या पत्तों पर धब्बा दिखाई दे, तो आपको फफुंदनाशक का छिड़काव करना चाहिए।

  • डायथेन एम-45: इसकी 2 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे पाले का असर कम हो जाता है और फसल को बचाया जा सकता है।

कौन-कौन सी फसलों को हो रहा है नुकसान?

आपको पता होना चाहिए कि गेहूं को Cold Weather फायदा पहुंचाता है, मगर कई फसलें इससे प्रभावित भी हो रही हैं:

  • दलहन: मूंग, मसूर को ठंड और पाले से नुकसान हो सकता है।
  • आलू और टमाटर: इस समय का वातावरण आलू और टमाटर की फसल के लिए बहुत घातक है। Late Blight Disease लगने से पूरी फसल गल सकती है।
  • चना, मसूर: इन फसलों को भी अत्यधिक ठंडक से नुकसान हो सकता है।

किसानों के लिए कुछ जरूरी प्रैक्टिकल टिप्स

  1. गेहूं में हल्का पीलापन दिखे तो घबराएं नहीं, इंतज़ार करें।
  2. गंभीर स्थिति में ही यूरिया का छिड़काव करें।
  3. ठंड से बचाव के लिए हल्की सिंचाई और धुआं करना न भूलें।
  4. आलू, टमाटर की फसल पर खास नजर रखें, समय पर फफुंदनाशक छिड़कें।
  5. डायथेन एम-45 हर किसान के पास रखना चाहिए इस मौसम में।

गेहूं में पीलेपन के कुछ अन्य कारण भी हो सकते है, जिसके लिए आप इस वीडियो को देखें… इस वीडियो में आप हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से कृषि वैज्ञानिक डॉ ओमप्रकाश बिश्नोई से जानिए, गेहूं में पीलापन क्यों आता है | इसे कैसे ठीक करें, कौन सी खाद डाले या स्प्रे करें|

अंतिम सलाह

दोस्तों, गेहूं में पीलापन को लेकर घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं। ये कोई बीमारी नहीं, बल्कि मौसमी असर है। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। बस थोड़ा धैर्य रखें और जरूरत पड़ने पर ही रसायनों का इस्तेमाल करें। अपनी फसल को नियमित देखते रहें और सही समय पर सही कदम उठाएं।

नमस्ते! मैं जगत पाल ई-मंडी रेट्स का संस्थापक, बीते 7 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती-किसानी, मंडी भाव की जानकारी में महारथ हासिल है । यह देश का पहला डिजिटल कृषि न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो बीते 7 सालों से निरन्तर किसानों के हितों में कार्य कर रहा है। किसान साथियों ताजा खबरों के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद

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