Mustard Price: सरसों की बढ़ती कीमतों के कारण मंडियों में घट रही आवक, ये है कारण

कृषि मंडी न्यूज़ 18 अप्रैल 2021 ( Mustard Price Latest Breaking News) : देश में इस बार सरसों की कीमतों (Mustard Price) में आई जबरदस्त तेजी आर्थिक मंदी से जूझ रहे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है । सरसों की हर रोज बढ़ती कीमतों के कारण अब स्थिति ये बन गई है की किसानों ने अपनी सरसों की फसल को अनाज मंडियों में लाना कम कर दिया हो और अधिकांश किसान अपनी सरसों को अपने घर में ही स्टोर कर रहे है। इसके पीछे किसानों का कहना है की सरसों जब आठ हजार रुपये क्विंटल हो जायेगी तब वो इसे बेचेंगे ।

इस बार सरसों का भाव (Mustard Price) बढ़ने से किसानों के वारे न्यारे होते दिखाई दे रहे हैं। सरसों की कीमतों को लेकर किसानों का कहना है कि यदि भाव में इसी प्रकार बने रहे तो अगले सीजन यानि 2021-22 में गेहूं का रकबा घट जाएगा और सरसों के रकबे में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

यहाँ देखें : मंडी भाव अप्रैल 2021: सरसों में तेजी बरकरार, जाने आज के ताजा रेट

किसानों को इस बार सरकारी रेट पर नही बेचनी पड़ी सरसों

भारत सरकार द्वारा इस बार सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4650 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि अनाज मंडियों में सीजन 2021 की सरसों की आवक शुरू होते ही नई सरसों का रेट 4800 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल का था। जिसके कारण किसानों को इस बार अपनी सरसों की फसल को सरकारी रेट पर बेचने की जरूरत ही नही पड़ी। वर्तमान में नई सरसों का ताजा भाव समर्थन मूल्य से 1500 से 2000 रुपये अधिक मिल रहा है। सरसों के ऊँचे भावों के चलते इस बार आलम यह था की बहुत से किसानों ने तो अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ही नही करवाया। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो इस बार सरसों की प्राइवेट खरीद बड़ा रिकार्ड बनाने वाली है।

सरसों का भाव सबसे ज्यादा कहां है ?

अभी तक हमें मिली जानकारी के मुताबिक सरसों का भाव सबसे ज्यादा राजस्थान में है। सूत्रों के मुताबिक इस बार सरसों के भाव राजस्थान की जयपुर मंडी में अब तक सबसे ज्यादा ₹7215 प्रति क्विंटल तक दर्ज किये जा चुके है। जबकि हरियाणा में आदमपुर मंडी सबसे तेज ₹6650 रुपये सरसों बिक चुकी है। मिडिया में छपी रिपोर्ट की माने तो इस बार जल्द ही सरसों की कीमतें ₹8000/- क्विंटल के आकड़े को छू सकती है।

जाने ! क्यों बढ़ रहे है सरसों के भाव ?

ये है सरसों महंगी होने का मुख्य कारण : जानकारों का मानना है कि इस बार सरकार ने विदेशों से पाम ऑयल के आयात पर रोक लगा दी है। देश में इसका इस्तेमाल रिफाइंड बनाने में किया जाता है। पाम ऑयल के आयात पर लगे प्रतिबंध के कारण सरसों तेल की मांग वृद्धि हुई जिसके चलते सरसों की कीमतों में तेजी का दौर बना हुआ है। इसके अलावा तेल उद्योग के जानकारों के मुताबिक सस्ता और मिलावट मुक्त होने के कारण सरसों तेल की भारी मांग है।

पिछले हफ्ते से मंडियों में घट गई सरसों की आवक

दिन-प्रतिदिन सरसों की कीमतों में आ रहे उछाल के कारण कृषि उपज मंडियों में सरसों की आवक कमजोर होती जा रही है। किसानों ने सरसों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरसों को बेचना बंद कर दिया है। जो किसान सरसों को मंडियों में बेचने के लिए लेकर जा रहे है वो पूरी सरसों ना ले जाकर अपनी जरूरत के मुताबिक कुछ हिस्सा ही लेकर जा रहे है। किसानों को उम्मीद है की सरसों की कीमतों में और तेजी आएगी उसके बाद ऊँचे दाम पर ही वो अपनी सरसों बेचेंगे। 

सरकार को भी हो रहा है फायदा

सरसों की कीमतों में आई इस तेजी से ना सिर्फ किसानों को लाभ मिल रहा है बल्कि इसके कारण सरकार को भी करोड़ों रुपये का बेनिफिट हो रहा है। जी हाँ बिना सरकारी खरीद किए भी प्रति क्विंटल सरसों खरीद पर मार्केट कमेटी को मार्केट फीस मिल रही है। बड़ी बात यह है कि इस बार सरकार को सरसों खरीद के लिए कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार अभी हेफेड व बाबा रामदेव के लिए सरसों की खरीद नहीं हुई है। अप्रैल के लास्ट तक सरसों की प्राइवेट खरीद निश्चित तौर पर रिकार्ड तोड़ेगी और सरसों की कीमतों में तेजी भी देखने को मिल सकती है।

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