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गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगेगी लगाम, FCI ने दोगुनी की नीलामी की मात्रा, जानें राज्यवार आवंटन की पूरी जानकारी

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हाइलाइट्स

  • FCI की 4 नवंबर की साप्ताहिक नीलामी में 1.99 लाख टन गेहूं बिक्री के लिए रखा जाएगा.
  • 28 अक्टूबर की नीलामी में 1.01 लाख टन गेहूं पेश हुआ था.
  • पिछली नीलामी में 99,316 टन गेहूं बिका, यानी लगभग 98.3 फीसदी.
  • पंजाब का आवंटन 25,000 से बढ़कर 44,000 टन और हरियाणा का 23,000 टन हुआ.
  • MSME Welfare Association ने आरक्षित मूल्य और बिक्री की शर्तों की समीक्षा मांगी है.

FCI Wheat Auction: भारतीय खाद्य निगम (FCI) 4 नवंबर की साप्ताहिक नीलामी में 1.99 लाख टन गेहूं बिक्री के लिए रखेगा. यह मात्रा 28 अक्टूबर की पिछली नीलामी में पेश 1.01 लाख टन के मुकाबले लगभग दोगुनी है. गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी और सरकारी भंडार में घटते स्टॉक के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है.

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22 राज्यों के लिए जारी टेंडर में बताए गए राज्यों में सबसे ज्यादा गेहूं पंजाब के लिए रखा गया है. इसी बीच एक MSME संगठन ने नीलामी की शर्तों की समीक्षा के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री को पत्र लिखा है.

किस राज्य को कितना गेहूं मिलेगा?

30 और 31 अक्टूबर को जारी 22 राज्यों के नीलामी टेंडर में FCI ने कई राज्यों का आवंटन बढ़ाया है:

राज्यपिछली नीलामी (टन)इस बार (टन)
पंजाब25,00044,000
हरियाणा12,00023,000
उत्तर प्रदेश8,00014,000
मध्य प्रदेश6,00010,000
असम5,00012,000
दिल्ली5,00012,000
कर्नाटक5,00012,000
गुजरात4,5008,000
राजस्थान4,0008,000
तमिलनाडु और पुडुचेरी4,00010,200

पिछली नीलामी में 98.3 फीसदी गेहूं बिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 अक्टूबर की नीलामी में FCI ने 1.01 लाख टन गेहूं पेश किया था. इसमें से 99,316 टन बिक गया, जो पेश मात्रा का लगभग 98.3 फीसदी है. कई राज्यों में नीलामी के लिए रखा पूरा गेहूं बिक गया. इसे बाजार में गेहूं की मांग का संकेत माना गया है.

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नीलामी में व्यापारियों को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है. इस व्यवस्था का मकसद गेहूं को आटा मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स जैसे असली उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना है.

नीलामी की शर्तों पर क्या हैं आपत्तियाँ?

नीलामी की मात्रा बढ़ने से एक दिन पहले दिल्ली के MSME Welfare Association के अध्यक्ष आशीष गर्ग ने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखा. उन्होंने गेहूं के आरक्षित मूल्य, लॉट के आकार, खरीदारों के लिए मात्रा की सीमा और बिक्री की बाकी शर्तों पर दोबारा विचार करने की मांग की. उनका कहना है कि इससे आटा मिलों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और दूसरे पात्र खरीदारों को प्रतिस्पर्धी कीमत पर गेहूं मिल सकेगा.

गर्ग ने बोली लगाने वालों के वेरिफिकेशन को मजबूत करने और फर्जी बोली लगाने वालों पर कार्रवाई की भी मांग की है. उनका दावा है कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत कुछ बिक्री स्थितियों में FCI का गेहूं बाजार भाव से 20-30 फीसदी ज्यादा कीमत पर बिका. उनके मुताबिक सरकारी भंडार का असरदार इस्तेमाल हो तो कीमतों में गैरजरूरी बढ़ोतरी रुक सकती है और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.

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कीमतों पर असर कितना, अभी तय नहीं

बढ़ी हुई सप्लाई से गेहूं के दाम कितने नीचे आएंगे, यह अभी तय नहीं है. गेहूं का मौजूदा बाजार भाव और सरकारी भंडार की मौजूदा मात्रा भी सामने नहीं आई है. संगठन की मांगों पर खाद्य मंत्रालय या FCI की प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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