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धनतेरस पहले सोना-चांदी धराशायी! एक दिन में चांदी ₹10,550 टूटी, जानिए गिरावट की 3 असली वजह

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नई दिल्ली 31 अक्टूबर 2026: दिवाली और धनतेरस से ठीक पहले भारतीय और वैश्विक बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार 30 अक्टूबर को तेज गिरावट (Gold-Silver Price Big Fall) दर्ज की गई। यह करेक्शन कुछ खरीदारों के लिए राहत का मौका भी माना जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय Comex पर कीमती धातुओं ने एक साथ कमजोरी दिखाई। गोल्ड $4,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया और सिल्वर $50 के नीचे आ गया।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी करेक्शन का हिस्सा है, लेकिन अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव बना रह सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार सोना-चांदी में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड शुक्रवार को 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर एक साल के निचले स्तर के करीब $3,875 से $3,910 प्रति औंस के दायरे में पहुंच गया। Comex पर दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट भी 3 प्रतिशत के आसपास कमजोर रहे।

सिल्वर में और भी ज़्यादा बड़ी गिरावट आई. सिल्वर का प्राइस 5.5 से 6 प्रतिशत तक गिरकर $49 के आसपास आ गया, जो नवंबर 2025 के बाद पहली बार $50 से नीचे था। अक्टूबर महीने में सिल्वर की गिरावट लगभग 17-18 प्रतिशत तक पहुंच गई।

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ग्लोबल मार्केट गोल्ड सिल्वर क्लोजिंग प्राइस

  • सोना $3875.65 -145.77 (3.62%) डॉलर प्रति औंस
  • चांदी $49.135 -3.032 (5.81%) डॉलर प्रति औंस

MCX पर सोना चांदी धड़ाम

भारत में MCX पर दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स लगभग ₹1.38 लाख से ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड हुए। दिनभर में कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में 2.5 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

सिल्वर फ्यूचर्स में और तेज बिकवाली हुई। यह ₹1.79 लाख से ₹1.84 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास आ गया, जिसमें दिनभर में ₹5,000 से ₹10,000 तक की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर में सिल्वर की कुल गिरावट ₹45,000 प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई।

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एमसीएक्स गोल्ड सिल्वर क्लोजिंग प्राइस

  • सोना ₹1,38,419 -4,177 (2.93%)
  • चांदी ₹1,78,900 -10,553 (5.57%)
  • कॉपर ₹1373.65 -20.80 (1.49%)

IBJA पर सोने चांदी का रेट

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी रिकॉर्ड तोड़ गिरावट दर्ज की गई । आज 24 कैरेट सोना ₹2,201 सस्ता होकर ₹1,40,054 प्रति 10 ग्राम रहा । वहीं चांदी ₹9,134 प्रति किलो सस्ती होकर ₹1,81,344 के स्तर पर आ गई ।

IBJA : सोना चांदी प्राइस 30 अक्टूबर 2026

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धातु / शुद्धता30 अक्टूबर 2026बदलाव
Gold 999₹1,40,054-₹2,201
Gold 995₹1,39,493-₹2,192
Gold 916₹1,28,289-₹2,017
Gold 750₹1,05,041-₹1,650
Gold 585₹81,932-₹1,287
Silver 999₹1,81,344-₹9,134
Platinum 999₹53,597-₹4,686

नोट – उपरोक्त कीमतें इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार है, कीमतों में 3% GST और मैकिंग चार्ज शामिल नहीं है.

रिकॉर्ड हाई से 22 से 50 फ़ीसदी की गिरावट

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार की यह गिरावट जनवरी 2026 के रिकॉर्ड हाई से काफी दूर है। उस समय गोल्ड लगभग $5,595 प्रति औंस और सिल्वर $120 से ऊपर पहुंच चुका था। मौजूदा स्तरों पर गोल्ड उस हाई से करीब 22 प्रतिशत और सिल्वर 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुका है।

सोने चांदी में गिरावट के 3 प्रमुख कारण

एक्सपर्ट्स और बाजार विश्लेषकों के अनुसार गिरावट के पीछे कई मैक्रो फैक्टर्स एक साथ सक्रिय थे।

पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी महंगाई आंकड़े थे। सितंबर के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई, जो मार्च के बाद सबसे तेज थी। वार्षिक आधार पर यह लगभग 3.6 प्रतिशत पहुंच गया। कोर PCE भी 3.1 प्रतिशत के आसपास रहा। इसके अलावा तीसरी तिमाही का GDP 3.4 प्रतिशत रहा, जो उम्मीदों से मजबूत था। इन आंकड़ों ने इस आशंका को मजबूत किया कि फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

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CME FedWatch टूल के अनुसार दिसंबर हाइक की संभावना 70-75 प्रतिशत तक पहुंच गई। ऊंची ब्याज दरें नॉन-यल्डिंग एसेट्स जैसे सोना-चांदी की अवसर लागत बढ़ा देती हैं, जिससे निवेशक इनसे दूर भागते हैं।

दूसरा बड़ा कारक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल था। मध्य पूर्व में तनाव, खासकर ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों ने तेल कीमतों को ऊंचा रखा। ब्रेंट क्रूड अप्रैल के बाद के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गया। ऊंचा तेल महंगाई को बढ़ावा देता है और सेंट्रल बैंकों को हॉकिश रुख अपनाने पर मजबूर करता है।

तीसरा कारण वैश्विक टेक और AI स्टॉक्स में भारी बिकवाली था। इंटेल जैसी कंपनियों के कमजोर अर्निंग्स गाइडेंस और AI कैपेक्स को लेकर चिंताओं से नैस्डैक और सेमीकंडक्टर इंडेक्स में तेज गिरावट आई। कई निवेशकों को मार्जिन कॉल और लिक्विडिटी की जरूरत पड़ी, जिसके लिए उन्होंने गोल्ड और सिल्वर जैसी लिक्विड एसेट्स बेच दीं। सिल्वर पर अतिरिक्त दबाव औद्योगिक मांग की चिंताओं से भी पड़ा, क्योंकि सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में मांग धीमी पड़ने के संकेत मिले।

Anand Rathi, Lemonn, Choice Broking, UBS और Zaner Metals जैसे संस्थानों के विश्लेषकों ने इन्हीं कारकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि “Higher-for-Longer” रेट्स की थीम अभी प्रभावी है।

2026 के अंत तक कीमतों का अनुमान

हालिया गिरावट के बावजूद ज्यादातर बड़े बैंक और विश्लेषक 2026 के बाकी हिस्से में कुछ रिकवरी की उम्मीद जता रहे हैं। Reuters के अक्टूबर 2026 के पोल में 30 विश्लेषकों का मेडियन फोरकास्ट 2026 के लिए $4,495 प्रति औंस है। 2027 के लिए यह $4,650 तक बढ़ाया गया है। सेंट्रल बैंकों की खरीद और भारत-चीन से फिजिकल डिमांड को सपोर्टिंग फैक्टर माना जा रहा है।

प्रमुख बैंकों के टारगेट्स इस प्रकार हैं:

  • Bank of America Q4 औसत के लिए लगभग $4,000,
  • JPMorgan, CIBC और Commerzbank लगभग $4,500,
  • UBS और Deutsche Bank $4,600,
  • Goldman Sachs और Standard Chartered $4,650, तथा
  • Societe Generale $4,750 के आसपास।

कुछ अन्य संस्थान $4,900 से $5,100 तक के रेंज की बात कर रहे हैं। मेडियन टारगेट $4,500 के आसपास है। Amundi जैसे एसेट मैनेजर्स का मानना है कि सबसे खराब चरण बीत चुका है और कीमतें जल्द $4,500 के करीब लौट सकती हैं।

हालांकि ये अनुमान बदल सकते हैं। अगर महंगाई बनी रहती है या तेल कीमतें और चढ़ती हैं तो दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर फेडरल रिजर्व रेट हाइक से पीछे हटता है या सेंट्रल बैंक खरीद मजबूत रहती है तो रिकवरी तेज हो सकती है।

भारतीय निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या मतलब?

दिवाली सीजन में यह गिरावट कई खरीदारों के लिए राहत का मौका बन सकती है। जेवलर्स और ट्रेडर्स का कहना है कि मौजूदा स्तरों पर खरीदारी आकर्षक लग रही है, लेकिन आगे के अमेरिकी डेटा और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर नजर रखना जरूरी है। सिल्वर में ज्यादा अस्थिरता रहने की संभावना है क्योंकि यह औद्योगिक और निवेश दोनों डिमांड पर निर्भर करता है।

कुल मिलाकर, 30 अक्टूबर की गिरावट वैश्विक मैक्रो दबावों का नतीजा थी। सोना लंबे समय में सुरक्षित निवेश बना रह सकता है, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार फैसला लेना चाहिए और नवीनतम आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए।

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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