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देश में 11 करोड़ किसानों की बनी Farmer ID, अब कर्ज से फसल बीमा तक मिलेंगे ये 5 फायदे

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हाइलाइट्स

  • सरकार ने तय समय से पहले 11 करोड़ फार्मर आईडी का लक्ष्य किया हासिल.
  • लक्ष्य की मूल समय-सीमा 31 मार्च 2027 थी, यानी करीब पांच महीने पहले काम पूरा हुआ.
  • फार्मर आईडी आधार आधारित 14 अंकों का डिजिटल नंबर है, जो एग्रीस्टैक से बनता है.
  • पीएम किसान, KCC, फसल बीमा, आपदा राहत और MSP खरीद में इसका इस्तेमाल बताया गया है.
  • आईडी खुद ऑनलाइन या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर आधार और खतौनी से बन सकती है.

नई दिल्ली : केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के तहत 11 करोड़ फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने का लक्ष्य पूरा हो गया है. यह काम 31 मार्च 2027 तक होना था, पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक 23 अक्टूबर 2026 की रात तक ही इसे हासिल कर लिया गया. यानी तय समय से करीब पांच महीने पहले.

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फार्मर आईडी 14 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जो किसान, उसकी जमीन के रिकॉर्ड और फसलों के डेटा को एक साथ जोड़ती है. मंत्री के मुताबिक इसकी मदद से पीएम किसान, KCC लोन, फसल बीमा, आपदा राहत और MSP खरीद का लाभ सीधे खाते में पहुंचेगा. बताया गया है कि इस व्यवस्था से 6 करोड़ से ज्यादा किसानों को अब तक सीधा लाभ दिया जा चुका है.

फार्मर आईडी क्या है और कैसे काम करती है?

यह आधार आधारित 14 अंकों का डिजिटल नंबर है. इसे एग्रीस्टैक सिस्टम से तैयार किया जाता है. एग्रीस्टैक में किसान की पहचान, उसकी जमीन का खसरा या खतौनी नंबर और बोई गई फसलों के रियलटाइम डिजिटल सर्वे का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर रहता है. मकसद यह है कि किसान को हर योजना या बैंक लोन के लिए बार-बार कागज जमा न करने पड़ें.

इस आईडी से बना डेटाबेस ‘किसान पंजी’ कहलाता है. एग्रीस्टैक में तीन रजिस्ट्री हैं. किसान पंजी उनमें से एक है. बाकी दो जियो डेटा पर आधारित गांव का नक्शा और बोई गई फसल की रजिस्ट्री हैं. एग्रीस्टैक डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी.

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आईडी से किसान को क्या-क्या मिलेगा?

बताए गए फायदे इस तरह हैं:

  1. सरकारी योजनाएं: पीएम किसान और कृषि सब्सिडी के लिए आईडी को प्राथमिक माध्यम बनाया जा रहा है. दावा है कि इससे फर्जी रजिस्ट्रेशन और दोहरे सत्यापन की समस्या खत्म होगी.
  2. लोन और KCC: बैंकों के पास जमीन और किसान का सत्यापित डेटा पहले से होगा. दावा है कि डिजिटल वेरिफिकेशन कुछ ही मिनटों में हो जाएगा.
  3. फसल बीमा: आपदा के बाद साफ रहता है कि किस खेत में कौन-सी फसल थी, इसलिए क्लेम की प्रक्रिया तेज होने की बात कही गई है.
  4. MSP खरीद: हर बार लंबे रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं रहती. सरकारी खरीद केंद्रों पर आईडी दर्ज करके खरीद पूरी की जाती है.
  5. खाद और बीज: जमीन और मिट्टी की सेहत का ब्योरा दर्ज होने से जरूरत के हिसाब से खाद-बीज मिलने की बात है. कालाबाजारी पर लगाम का दावा भी है.

आगे इस आईडी को समेकित उर्वरक प्रबंधन सिस्टम (iFMS) से जोड़ा जाएगा. उसके बाद किसान मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर खाद की उपलब्धता देख सकेंगे. सूत्रों के मुताबिक एग्रीस्टैक को एआई, सैटेलाइट डेटा और मौसम पूर्वानुमान से भी जोड़ा जाएगा. इससे समय पर मौसम की जानकारी, बुवाई के लिए फसल का चयन, व्यक्तिगत सलाह और बेहतर बाजार जैसे लाभ बताए गए हैं.

ऐसे बनवाएं अपनी फार्मर आईडी

जिस किसान की आईडी अभी नहीं बनी है, वह अपने राज्य के आधिकारिक कृषि या राजस्व पोर्टल पर जा सकता है. केंद्र सरकार के कृषि ऐप से भी रजिस्ट्रेशन हो सकता है. वहां आधार नंबर दर्ज करना होगा. फिर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से बायोमेट्रिक या डिजिटल eKYC पूरा करना होगा.

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ऑनलाइन करने में दिक्कत हो तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर जाया जा सकता है. वहां आधार कार्ड और जमीन की खतौनी साथ ले जाएं.

11 करोड़ किसानों में कौन-कौन?

कृषि मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 11 करोड़ आईडी में 26 फीसदी महिला किसान हैं. वहीं 81 फीसदी किसान सीमांत या छोटे हैं. उम्र के हिसाब से देखें तो 15 फीसदी रजिस्टर्ड किसान 70 साल या उससे ज्यादा के हैं और 7.5 फीसदी 30 साल से कम के. बाकी 77.5 फीसदी किसान 30 से 70 साल के बीच हैं.

इसे भी पढ़े – फार्मर आईडी क्या है और इसे कैसे बनवाये ?

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फार्मर ID से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs) 

फार्मर आईडी क्या होती है?

फार्मर आईडी आधार आधारित 14 अंकों का डिजिटल नंबर है, जो एग्रीस्टैक के जरिए बनता है. इसमें किसान की पहचान, जमीन का खसरा या खतौनी नंबर और बोई गई फसलों का डेटा एक जगह दर्ज रहता है.

फार्मर आईडी का 11 करोड़ का लक्ष्य कब पूरा हुआ?

लक्ष्य 23 अक्टूबर 2026 की रात तक पूरा कर लिया गया. मूल समय-सीमा 31 मार्च 2027 थी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक काम निर्धारित समय से पांच महीने पहले हो गया.

फार्मर आईडी कैसे बनवाएं?

राज्य के आधिकारिक कृषि या राजस्व पोर्टल अथवा केंद्र के कृषि ऐप पर आधार नंबर डालें. ओटीपी से बायोमेट्रिक या eKYC पूरा करें. ऑनलाइन में दिक्कत हो तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर भी आईडी बनवा सकते हैं.

फार्मर आईडी बनवाने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आधार कार्ड जरूरी है, क्योंकि आईडी आधार आधारित है. कॉमन सर्विस सेंटर पर आधार के साथ जमीन की खतौनी भी ले जानी होगी. ऑनलाइन में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा.

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फार्मर आईडी से किन योजनाओं का फायदा मिलेगा?

बताया गया है कि पीएम किसान, KCC लोन, फसल बीमा, आपदा राहत और MSP खरीद में इसका इस्तेमाल होगा. अब तक 6 करोड़ से ज्यादा किसानों को इस व्यवस्था से सीधा लाभ पहुंचाने की बात कही गई है.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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