हाइलाइट्स
- BPM (Q) 172 की औसत बीज उपज 2304 किलो, यानी करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.
- इस किस्म में तेल करीब 41.8% है और फसल लगभग 131 दिन में पकती है.
- राधिका की औसत उपज 17.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और इसमें तेल करीब 40.7% है.
- BPM (Q) 172 साल 2025 में और राधिका साल 2021 में जारी की गई.
Improved Varieties of Mustard : रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल सही किस्म का चयन करना है. भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर की किस्म BPM (Q) 172 की औसत उपज 2304 किलो यानी करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है. वहीं ‘राधिका’ की औसत उपज 17.88 क्विंटल है, जो की देरी से बुवाई और सिंचित खेतों के लिए उपयुक्त मानी जाती है.
दोनों किस्में अलग हालात के लिए बनी हैं. एक राजस्थान, यूपी, एमपी, उत्तराखंड और बिहार के सिंचित इलाकों के लिए है. दूसरी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के कुछ हिस्सों के लिए. यानी किस्म चुनने से पहले अपना जोन देखना जरूरी है.
BPM (Q) 172 में क्या खास है?
BPM (Q) 172 को DRMRCI 172 भी कहते हैं. यह सरसों की नई किस्म है, जिसे साल 2025 में आधिकारिक तौर पर जारी किया गया. इसकी औसत बीज उपज 2304 किलो प्रति हेक्टेयर है. बीज में तेल की मात्रा करीब 41.8% तक पाई जाती है.
फसल लगभग 131 दिन में पककर तैयार होती है. पौधों की औसत ऊंचाई करीब 191 सेंटीमीटर बताई गई है. खास बात ये है कि यह किस्म सफेद रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी है. इसमें माहू यानी चेपा का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है.
BPM (Q) 172 किन राज्यों के लिए है?
यह किस्म देश के जोन-3 के लिए बताई गई है. इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के जलवायु एवं सिंचित क्षेत्र आते हैं. इन राज्यों के किसान इसे अपने विकल्पों में रख सकते हैं.
हालांकि जोन में आने भर से उपज की गारंटी नहीं होती. जो आंकड़ा दिया गया है, वह औसत है. संस्थान ने खुद कहा है कि संभावित उपज खेत की स्थिति और फसल प्रबंधन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.
समय पर बुवाई छूट गई तो क्या करें?
ऐसे किसान ‘राधिका’ यानी DRMR 2017-15 पर विचार कर सकते हैं, बशर्ते सिंचाई की सुविधा हो. इसे भी भरतपुर के संस्थान ने विकसित किया है. इसे साल 2021 में अधिसूचित किया गया था. यह देश के जोन-2 के लिए जारी हुई है.
राधिका की औसत उपज 1788 किलो यानी 17.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. बीज में तेल करीब 40.7% होता है. फसल को पकने में 120 से 150 दिन लग सकते हैं. पौधे 191 से 204 सेंटीमीटर तक ऊंचे हो सकते हैं.
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राधिका में रोग-कीट का कितना खतरा?
संस्थान के मुताबिक राधिका में कई प्रमुख रोगों और कीटों का प्रकोप कम पाया गया है. इनमें अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा, सफेद रतुआ, तना सड़न, डाउनी मिल्ड्यू, पाउडरी मिल्ड्यू और माहू शामिल हैं. यानी छह में से हर एक पर असर कम बताया गया है.
फिर भी खेत की नियमित निगरानी जरूरी है. रोग या कीट दिखे तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही नियंत्रण के उपाय अपनाएं.
दोनों किस्मों में क्या अंतर है ?
आंकड़ों को आमने-सामने रखें तो तस्वीर साफ हो जाती है:
| मुख्य बिंदु | BPM (Q) 172 | राधिका (DRMR 2017-15) |
| औसत उपज (क्विंटल/हेक्टेयर) | करीब 23 (2304 किलो) | 17.88 (1788 किलो) |
| तेल की मात्रा | करीब 41.8% | करीब 40.7% |
| पकने का समय | लगभग 131 दिन | 120 से 150 दिन |
| पौधे की ऊंचाई | करीब 191 सेमी | 191 से 204 सेमी |
| जारी होने का साल | 2025 | 2021 |
| जोन | जोन-3 | जोन-2 |
उपज में BPM (Q) 172 आगे है. फर्क 2304 और 1788 किलो का है, यानी 516 किलो प्रति हेक्टेयर. प्रतिशत में यह करीब 29% ज्यादा बैठता है. तेल में भी करीब 1.1 प्रतिशत अंक की बढ़त है.
बीज कहां से मिलेगा?
BPM (Q) 172 का प्रामाणिक बीज भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईआरएमआर/डीआरएमआर), सेवर, भरतपुर से मिल सकता है. राधिका के प्रमाणित बीज के लिए संस्थान के अलावा नजदीकी बीज निगम केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र से भी संपर्क किया जा सकता है.
बीज खरीदने से पहले उपलब्धता और प्रमाणिकता की जानकारी जरूर लें. अब सवाल ये है कि आपके इलाके के लिए कौन-सी किस्म ठीक रहेगी. इसका जवाब जलवायु, मिट्टी, सिंचाई और बुवाई के समय पर टिका है.
बीज की कीमत और स्टॉक की जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी संस्थान या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें .
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“सरसों की उन्नत किस्में BPM (Q) 172 और राधिका” से संबंधित सवाल और उनके जवाब (FAQs) :
BPM (Q) 172 सरसों की उपज कितनी है?
BPM (Q) 172 की औसत बीज उपज 2304 किलो प्रति हेक्टेयर बताई गई है, यानी करीब 23 क्विंटल. इसके बीज में तेल करीब 41.8% होता है. फसल लगभग 131 दिन में तैयार होती है. असली उपज खेत की स्थिति और प्रबंधन पर निर्भर करेगी.
देर से बुवाई के लिए सरसों की कौन-सी किस्म अच्छी है?
देर से बुवाई के लिए DRMR 2017-15 यानी ‘राधिका’ किस्म उपयुक्त मानी गई है, बशर्ते सिंचाई की सुविधा हो. इसकी औसत उपज 17.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. यह जोन-2 के लिए जारी हुई है, जिसमें दिल्ली, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं.
BPM (Q) 172 किन राज्यों के लिए उपयुक्त है?
BPM (Q) 172 जोन-3 के लिए उपयुक्त है, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के जलवायु एवं सिंचित क्षेत्र आते हैं. यह किस्म साल 2025 में जारी हुई. इसमें सफेद रतुआ के प्रति प्रतिरोध और माहू का कम प्रकोप बताया गया है.
राधिका सरसों में कौन-से रोग कम लगते हैं?
राधिका में अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा, सफेद रतुआ, तना सड़न, डाउनी मिल्ड्यू, पाउडरी मिल्ड्यू और माहू का प्रकोप कम पाया गया है. इस किस्म की फसल 120 से 150 दिन में पकती है. फिर भी नियमित निगरानी जरूरी है. प्रकोप दिखे तो विशेषज्ञ से सलाह लें.
सरसों की इन किस्मों का बीज कहां मिलेगा?
BPM (Q) 172 का प्रामाणिक बीज सेवर, भरतपुर स्थित भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान से मिल सकता है. राधिका का प्रमाणित बीज संस्थान के अलावा नजदीकी बीज निगम केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र से भी लिया जा सकता है. खरीद से पहले प्रमाणिकता जांच लें.
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