Farmer ID : राजस्थान में अब कृषि योजनाओं का लाभ पाने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होने जा रही है. कृषि विभाग ने राज्य के 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार कर उनका रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. खाद की बिक्री को डिजिटल करने के बाद अब किसान को मिलने वाली कृषि योजनाओं का लाभ भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज होगा.
इसके लिए कृषि विभाग में जल्द ही एग्रीस्टैक कमिश्नरेट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सरकार के पास एक क्लिक पर यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किस किसान ने कब और किस योजना का लाभ लिया है.
फार्मर आईडी अनिवार्य क्यों की जा रही है?
राजस्थान में अब तक कृषि योजनाओं का लाभ बिना किसी एकीकृत रिकॉर्ड के मिलता रहा है. फार्मर आईडी अनिवार्य होने के बाद हर योजना का लाभ किसान की डिजिटल पहचान से जुड़ जाएगा.
दरअसल इसका सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता है. फार्मर आईडी से किसान का पूरा भूमि रिकॉर्ड जुड़ने से आसानी होगी, ऐसा कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल का कहना है.
एग्रीस्टैक कमिश्नरेट से क्या बदलेगा?
एग्रीस्टैक कमिश्नरेट बनने के बाद कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम होगा. यानी अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग-अलग रिकॉर्ड रखने का झंझट खत्म हो जाएगा.
इससे किसान की फार्मर आईडी उसके कृषि लाभों का आधार बनेगी. वहीं सरकार के पास किसान से जुड़ा एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा. यानी किसी भी किसान की योजना संबंधी पूरी जानकारी एक ही जगह मिल जाएगी.
अब तक कितने किसानों का रिकॉर्ड तैयार हुआ?
आंकड़ा बड़ा है और तेजी से बढ़ रहा है. कृषि विभाग ने अब तक राजस्थान के 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार कर ली है.
बता दें कि यह आंकड़ा राज्य के कुल किसानों का एक बड़ा हिस्सा है, हालांकि पूरे राज्य में कुल कितने किसान हैं और यह आंकड़ा उसका कितना फीसदी है, इसे लेकर फिलहाल इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं है.
खाद बिक्री का डिजिटलीकरण कहां-कहां शुरू हुआ?
कृषि विभाग ने डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत उर्वरक बिक्री से की है. DBT POS एप्लीकेशन का नया वर्जन 3.77 अब तक राज्य के 11 जिलों में शुरू किया जा चुका है.
इन जिलों में बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक शामिल हैं. इससे पहले दो चरणों में सात जिलों में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है.
| चरण | जिलों की संख्या | स्थिति |
|---|---|---|
| पहले दो चरण | 7 जिले | सफलतापूर्वक लागू |
| मौजूदा चरण | 11 जिले (बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, टोंक) | लागू हो चुका |
| कुल किसानों की फार्मर आईडी | 88.85 लाख | तैयार |
डिजिटल खाद बिक्री से किसानों को क्या फायदा होगा?
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल बोले- “डीलर किसान से निर्धारित दर से अधिक राशि भी नहीं वसूल सकेगा. हर उर्वरक बिक्री डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगी. इसके साथ अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा.”
यानी अब तक जो शिकायत आम रहती थी कि दुकानदार तय रेट से ज्यादा पैसे वसूल लेते हैं, वह डिजिटल रिकॉर्ड आने के बाद रुकने की उम्मीद है. हर लेनदेन का हिसाब सिस्टम में दर्ज रहेगा, इसलिए मनमानी की गुंजाइश कम होगी.
किसानों के लिए आगे क्या करना जरूरी है
फार्मर आईडी अनिवार्य होने की दिशा में कदम बढ़ने के बाद हर किसान के लिए यह जान लेना जरूरी है कि उसका रिकॉर्ड बना है या नहीं.
- जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी नहीं बनी, उन्हें जल्द बनवा लेनी चाहिए.
- खेत का भूमि रिकॉर्ड सही तरीके से आईडी से जुड़वाना जरूरी है, तभी योजनाओं का लाभ मिलेगा.
- खाद खरीदते वक्त डीलर से डिजिटल रसीद जरूर लें.
- अपने जिले में DBT POS व्यवस्था लागू हुई है या नहीं, यह पहले पता कर लें.
आगे किन जिलों में लागू होगी यह व्यवस्था?
फिलहाल 11 जिलों में DBT POS का नया वर्जन लागू हो चुका है और इससे पहले सात जिलों में यह व्यवस्था सफल रही है. यानी कुल 18 जिलों में अब तक डिजिटल खाद बिक्री व्यवस्था पहुंच चुकी है. बाकी बचे जिलों में यह व्यवस्था कब तक पहुंचेगी और एग्रीस्टैक कमिश्नरेट कब तक औपचारिक रूप से स्थापित होगा, इसे लेकर फिलहाल इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं है. कृषि विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द पूरी कृषि व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए.










