हाइलाइट्स
- देशभर में खरीफ बुवाई 105.7 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंची, पिछले साल से 1.5% कम.
- धान का रकबा 3.2% घटकर 40.51 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया.
- मक्का की बुवाई 4.1% घटी, उड़द में 12.2% की बड़ी बढ़त दर्ज हुई.
- सामान्य 110.45 मिलियन हेक्टेयर के मुकाबले अब तक 96% बुवाई पूरी.
Kharif Sowing Area: देशभर में इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले धीमी रही है. कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक किसानों ने करीब 105.7 मिलियन हेक्टेयर में खरीफ फसलें बो दी थीं, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 107.3 मिलियन हेक्टेयर था. यानी कुल बुवाई रकबे में 1.5% की गिरावट दर्ज हुई है.
असल में यह गिरावट किसी एक फसल तक सीमित नहीं है. धान, मक्का, मूंग और सोयाबीन जैसे प्रमुख तिलहन समेत कई फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में कम रहा है. हालांकि दलहन और कुछ मोटे अनाज की बुवाई में इस बार बढ़त भी देखने को मिली है.
धान और मक्का की बुवाई कितनी घटी?
खरीफ सीजन की सबसे बड़ी फसल धान का रकबा इस बार 3.2% घटकर 40.51 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 41.83 मिलियन हेक्टेयर था. वहीं मक्का की बुवाई में भी 4.1% की गिरावट आई, और यह घटकर 8.95 मिलियन हेक्टेयर रह गई.
बता दें कि पिछले साल मक्के का रकबा 9.33 मिलियन हेक्टेयर था. यानी दोनों ही प्रमुख फसलों में इस साल किसानों का रुझान कुछ कम रहा है.
दलहन में क्यों आई बढ़त?
दलहन यानी पल्सेज़ की बात करें तो कुल रकबा इस बार 1.3% बढ़कर 11.36 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 11.21 मिलियन हेक्टेयर था. खास बात ये है कि इसकी सबसे बड़ी वजह उड़द और तुअर की बुवाई में आई तेजी रही.
उड़द का रकबा तो पिछले साल के मुकाबले 12.2% तक बढ़ गया, जबकि तुअर में भी 0.9% की बढ़त दर्ज हुई. हालांकि मूंग की बुवाई 3.6% घट गई, जिसकी भरपाई उड़द और तुअर की बढ़त ने कर दी.
| फसल | रकबा 2026 (मिलियन हेक्टेयर) | रकबा 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| धान | 40.51 | 41.83 | -3.2% |
| मक्का | 8.95 | 9.33 | -4.1% |
| उड़द | 2.44 | 2.17 | +12.2% |
| तुअर | 4.39 | 4.34 | +0.9% |
| सोयाबीन | 12.14 | 12.28 | -1.2% |
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तिलहन और नकदी फसलों का क्या हाल है?
तिलहन का कुल रकबा 0.2% घटकर 18.84 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया. इसकी बड़ी वजह सोयाबीन में आई गिरावट है, जो खरीफ सीजन की सबसे बड़ी तिलहन फसल मानी जाती है. सोयाबीन का रकबा 1.2% घटकर 12.14 मिलियन हेक्टेयर रह गया.
हालांकि मूंगफली की बुवाई में 1.2% की बढ़त दर्ज हुई, और यह 4.88 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच गई. वहीं नकदी फसलों में जूट का रकबा 1.7% बढ़ा, जबकि गन्ने में 0.7% और कपास में 0.3% की मामूली गिरावट आई.
- सोयाबीन: 12.14 मिलियन हेक्टेयर (-1.2%)
- मूंगफली: 4.88 मिलियन हेक्टेयर (+1.2%)
- गन्ना: 5.84 मिलियन हेक्टेयर (-0.7%)
- कपास: 10.85 मिलियन हेक्टेयर (-0.3%)
- जूट: 0.63 मिलियन हेक्टेयर (+1.7%)
मोटे अनाज में किस फसल ने चौंकाया?
मोटे अनाज यानी कोर्स सीरियल्स का कुल रकबा 1.9% घटकर 17.64 मिलियन हेक्टेयर रह गया. हालांकि इसमें भी सभी फसलों की स्थिति एक जैसी नहीं रही. बाजरा का रकबा 2.1% बढ़कर 6.47 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच गया, जबकि ज्वार की बुवाई में सबसे ज़्यादा 6.4% की बढ़त दर्ज हुई.
यानी मक्का में गिरावट के बावजूद बाजरा और ज्वार जैसी फसलों ने किसानों का रुझान अपनी तरफ खींचा है. अब सवाल ये है कि आने वाले दिनों में यह ट्रेंड बना रहेगा या नहीं, क्योंकि खरीफ सीजन की बुवाई अब लगभग पूरी होने की तरफ है.
कुल बुवाई सामान्य स्तर से कितनी पीछे है?
कृषि मंत्रालय के मुताबिक खरीफ की बुवाई अब पूरी होने के करीब है, और अब तक किसानों ने सामान्य 110.45 मिलियन हेक्टेयर के मुकाबले करीब 96% रकबे में बुवाई पूरी कर ली है. यानी कुल मिलाकर बुवाई का दायरा सामान्य स्तर के काफी करीब है, भले ही पिछले साल के मुकाबले कुछ कमी दिखी हो.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि आने वाले हफ्तों में बाकी बचा रकबा किन फसलों के लिए और किन राज्यों में बोया जाएगा, इस पर आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. अगली रिपोर्ट में यह देखना अहम होगा कि क्या धान और मक्का का रकबा आखिरी आंकड़ों में कुछ रिकवर करता है.










