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किसानों का ‘ड्रोन युग’ – अब खेतों में उड़ान भरेंगे आपके FPO के पायलट, हजारों ₹ की होगी बचत

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Smart Farming India: गाजियाबाद के रामप्रसाद अपने दो एकड़ गन्ने के खेत में यूरिया छिड़काव करने में हफ्ते भर लगा देते हैं। पहले खाद खरीदो, फिर मजदूर ढूंढो, और जब सब हो जाए तो बारिश की आफत। लेकिन अब उनके लिए एक ऐसा विकल्प तैयार हो रहा है जो सिर्फ समय और पैसे ही नहीं बचाएगा बल्कि उत्पादकता भी दोगुनी कर देगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं खेती में ड्रोन तकनीक (Drone Technology in Agriculture) की। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने तय किया है कि अब कृषक उत्पादक संघ (FPO) से जुड़े किसानों को ड्रोन पायलट बनाया जाएगा। यानी अब आपका खुद का किसान, आपके खेत पर आपका ड्रोन उड़ाएगा।

क्या है ये पूरी स्कीम?

यह कोई सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयार हो रही एक व्यावहारिक योजना है।दरअसल गाजियाबाद प्रशासन ने एक प्राइवेट AgriTech Solutions कंपनी के साथ मिलकर FPO से जुड़े किसानों को प्रशिक्षित करने का प्लान बनाया है। इसके तहत हर FPO से एक किसान को ड्रोन उड़ाने का प्रशेट प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण सरकारी मानकों वाले ड्रोन इंस्टीट्यूट से होगा, जिसमें DGCA सर्टिफिकेशन भी शामिल होगा।

ड्रोन पायलट बनने के बाद ये किसान अपने FPO के सदस्यों के खेतों में यूरिया, डीएपी और अन्य फर्टिलाइजर का Precision Farming तकनीक से छिड़काव करेंगे। यानी खेत का हर इंच समान रूप से खाद से लैस होगा, कोई हिस्सा छूटेगा नहीं। बात सिर्फ खाद छिड़काव तक ही सीमित नहीं – भविष्य में इसी ड्रोन से कीटनाशक और बीज बोने का काम भी लिया जाएगा।

क्यों जरूरी है खेती में ड्रोन तकनीक?

अभी तक की सिस्टम में क्या खामी है, यह हर किसान जानता है। 4 घंटे की मेहनत में एक एकड़ पर यूरिया डालना कोई आसान काम नहीं। और जब मजदूर की बात आती है तो लागत बढ़ जाती है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या है अनियमित छिड़काव। जब आप हाथ से या मशीन से खाद डालते हैं, तो कुछ जगह ज्यादा तो कुछ जगह कम हो जाती है। इससे फसल की ग्रोथ असमान होती है और उत्पादकता 15-20% तक घट जाती है।

Smart Farming India के तहत ड्रोन टेक्नोलॉजी यह समस्या पूरी तरह से खत्म कर देती है। क्योंकि ड्रोन GPS और AI की मदद से खेत का मैपिंग करता है और हर इंच पर समान मात्रा में खाद डालता है। रामप्रसाद की समझ में आएगा कि अब उसे मजदूर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बारिश आने से पहले ही पूरे खेत का छिड़काव हो जाएगा।

आर्थिक बचत की बात करें तो एक एकड़ में ड्रोन से छिड़काव कराने पर 100-150 रुपये की सीधी बचत होगी। लेकिन असली फायदा इससे कहीं ज्यादा है – फसल की क्वालिटी सुधरेगी, उपज बढ़ेगी, और समय बचेगा। एक अनुमान के मुताबिक, ड्रोन तकनीक से गेहूं की उपज 10-12% तक बढ़ सकती है, जो किसान की आय में 5,000-7,000 रुपये प्रति एकड़ का इजाफा है।

कैसे काम करेगा?

पूरा मॉडल FPO-आधारित है, जो भारत की नई कृषि नीति का सबसे मजबूत पक्ष है। जिला प्रशासन ने पहले ही एक AgriTech कंपनी से बात कर ली है। इस कंपनी की जिम्मेदारी होगी:

  1. ड्रोन खरीदना और मेंटेन करना
  2. किसानों को DGCA-अप्रूव्ड ट्रेनिंग देना
  3. FPO को टेक्निकल सपोर्ट देना

हर FPO से एक किसान चुना जाएगा जो 12-15 दिन की ट्रेनिंग लेगा। इस ट्रेनिंन में ड्रोन के पार्ट्स, उड़ान नियम, सुरक्षा मानक और खाद डालने की तकनीक सिखाई जाएगी। ट्रेनिंग पूरी होने पर उसे Remote Pilot Certificate मिलेगा। अब यह किसान अपने FPO के सदस्यों से प्रति एकड़ 200-250 रुपये लेकर ड्रोन सर्विस देगा। इससे उसकी भी आय होगी और FPO के सदस्यों को सस्ती सेवा मिलेगी।

टेक्निकली बात करें तो जो ड्रोन इस्तेमाल होंगे, वे 10 लीटर तक लोड ले जा सकते हैं और 15-20 मिनट में 2-3 एकड़ का छिड़काव कर सकते हैं। इनमें multispectral cameras लगी होंगी जो फसल की हेल्थ भी चेक कर सकेंगी। यानी ड्रोन सिर्फ खाद डालेगा नहीं, बल्कि बताएगा भी कि खेत के किस हिस्से को कितनी खाद चाहिए।

कब से शुरू होगी योजना ?

यह योजना अभी प्लानिंग स्टेज में है, लेकिन तेजी से आगे बढ़ रही है। जिला प्रशासन और कंपनी के बीच पहली दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। CDO अभिनव गोपाल के मुताबिक, “अगले 15 दिनों में हम FPO प्रतिनिधियों और कंपनी के बीच फाइनल मीटिंग करेंगे।” इस मीटिंग में ड्रोन खरीद, मेंटेनेंस कॉस्ट और सेवा शुल्क पर अंतिम निर्णय होगा।

अगर सब ठीक रहा तो इसी रबी सीजन से गेहूं की फसल में यूरिया छिड़काव के लिए ड्रोन उड़ते दिखेंगे। फेज वन में 10-12 FPO को शामिल किया जाएगा, जिससे हज़ारों किसान सीधे लाभान्वित होंगे।

कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) से कई किसान जुड़े होते हैं और मिलकर कृषि या पशुपालन का कार्य करते हैं। प्रत्येक एफपीओ सेे जुड़े एक किसान को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। ड्रोन का प्रशिक्षण देने वाले शिक्षण संस्थान से वार्ता की गई है। जल्द ही एफपीओ और कंपनी के अधिकारियों के बीच अंतिम दौर की बैठक की जाएगी, इसमें ड्रोन खरीदने सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद ड्रोन के माध्यम से खेतों में यूरिया का छिड़काव कराने का कार्य शुरू कराया जाएगा।

– अभिनव गोपाल, सीडीओ

वैश्विक संदर्भ में भारतीय कृषि का ड्रोन क्रांति

दुनिया भर में Precision Agriculture का बाजार 2024 में 9.5 बिलियन डॉलर का है, जो 2030 तक 18 बिलियन तक पहुंचेगा। भारत इसमें सिर्फ 2% का योगदान देता है, जबकि हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा किसान समुदाय है। चीन में पहले ही 40,000 किसान ड्रोन पायलट हैं, जो 30% खेती का काम ड्रोन से करते हैं। हमारे लिए यह न केवल तकनीक, बल्कि रोजगार का भी साधन बन सकता है।

चुनौतियां और सफलता के मंत्र

लेकिन यह प्रोजेक्ट बिना चुनौतियों के नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती है किसानों का डर। कई किसान सोचते हैं कि ड्रोन से खाद डालने से फसल जल जाएगी या टेक्नोलॉजी समझ में नहीं आएगी। इसके लिए जरूरी है:

  • हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग: क्लासरूम से ज्यादा खेत में प्रैक्टिकल
  • सब्सिडी मॉडल: केंद्र सरकार 50% तक सब्सिडी दे रही है, इसे FPO तक पहुंचाना जरूरी है
  • मेंटेनेंस सपोर्ट: ड्रोन टूटे तो फौरन रिपेयर की सुविधा
  • डेटा सिक्योरिटी: किसान के खेत का डेटा सुरक्षित रहे, यह भरोसा जरूरी है

सफलता का मंत्र सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट भी जरूरी है। जब किसान खुद का बेटा या पड़ोसी ड्रोन उड़ाता देखेगा, तभी यह क्रांति सफल होगी।

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नमस्ते! मैं जगत पाल ई-मंडी रेट्स का संस्थापक, बीते 7 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती-किसानी, मंडी भाव की जानकारी में महारथ हासिल है । यह देश का पहला डिजिटल कृषि न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो बीते 7 सालों से निरन्तर किसानों के हितों में कार्य कर रहा है। किसान साथियों ताजा खबरों के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद

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