हाइलाइट्स
- सामान्य धान का MSP 72 रुपये बढ़कर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल हुआ
- ग्रेड-ए धान का MSP भी 72 रुपये बढ़कर 2,461 रुपये प्रति क्विंटल
- यूपी में करीब 500 क्रय केंद्र, पिछले साल से लगभग 50 ज्यादा
- पिछले साल 62.30 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 103.83 लाख टन खरीद हुई
UP Paddy MSP Hike : उत्तर प्रदेश में धान बेचने वाले किसानों को इस बार पिछले साल से ज्यादा दाम मिलेगा. केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य धान का MSP 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये हो गया है. सरकार द्वारा प्रदेश में करीब 500 क्रय केंद्रों पर अक्टूबर के तीसरे हफ्ते से धान की खरीद (Paddy Procurement 2026) की तैयारी की जा रही है.
बता दें कि खरीद का लक्ष्य 62.30 लाख टन रखा गया है. हालांकि अंतिम खरीद नीति जारी होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है. नीति को जल्द कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है.
धान का MSP कितना बढ़ा?
सामान्य धान का MSP 72 रुपये की बढ़त के साथ 2,441 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. ग्रेड-ए धान में भी इतनी ही 72 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और यह 2,461 रुपये पर पहुंचा है.
| किस्म | नया MSP (रुपये/क्विंटल) | बढ़त |
|---|---|---|
| सामान्य धान | 2,441 | 72 रुपये |
| ग्रेड-ए धान | 2,461 | 72 रुपये |
यूपी में 500 क्रय केंद्र, पिछले साल से कितने ज्यादा?
प्रदेश में करीब 500 क्रय केंद्र खोलने का प्रस्ताव है. पिछले साल के मुकाबले यह संख्या लगभग 50 ज्यादा है. यानी पिछले साल करीब 450 केंद्र थे .
खरीद 15 अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी है. सरकार चाहती है कि ज्यादा किसान अपने नजदीकी केंद्र पर ही धान बेच सकें. इसके लिए केंद्रों पर जरूरी इंतजाम समय से पूरे करने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
पिछले साल लक्ष्य से कितनी ज्यादा हुई खरीद?
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 62.30 लाख टन खरीद का लक्ष्य था. असल खरीद 103.83 लाख टन रही. यानी लक्ष्य से करीब 41.53 लाख टन ज्यादा, जो लगभग 67% की बढ़त है.
इस बार भी लक्ष्य 62.30 लाख टन ही रखा गया है. अब सवाल ये है कि क्या पिछली बार की तरह खरीद लक्ष्य से काफी आगे जाएगी. यह अभी तय नहीं है. अंतिम नीति आने पर लक्ष्य में आंशिक बदलाव भी संभव है.
धान बेचने के लिए पंजीकरण कैसे होगा?
किसानों का पंजीकरण और सत्यापन किया जाएगा. सरकार का जोर है कि केंद्रों पर पंजीकरण, सत्यापन और तौल की व्यवस्था समय से पूरी हो. मकसद ये है कि किसान को केंद्र पहुंचकर कागजी प्रक्रिया की वजह से इंतजार न करना पड़े.
किसानों की खरीद से जुड़ी जानकारी समय से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं. किसान अपने नजदीकी केंद्र या जिला खाद्य एवं रसद कार्यालय से संपर्क करें.
भुगतान कब और कैसे मिलेगा?
धान बेचने के बाद किसानों को समय से ऑनलाइन भुगतान कराने की व्यवस्था की जा रही है. भुगतान की समय सीमा अभी साफ नहीं है.
अधिकारियों को सभी खरीद केंद्रों की निगरानी करने के निर्देश मिले हैं. किसानों की शिकायतों का समय से निस्तारण करने को भी कहा गया है. शिकायत करनी हो तो केंद्र प्रभारी या जिला अधिकारियों तक बात पहुंचाई जा सकती है.
कौन-कौन सी एजेंसियां खरीदेंगी धान?
धान खरीद में खाद्य एवं रसद विभाग के साथ छह एजेंसियों की भूमिका रहेगी. इनमें PCF (प्रादेशिक कोआपरेटिव फेडरेशन), PCU (उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन), मंडी परिषद, नेफेड, NCCF और भारतीय खाद्य निगम (FCI) शामिल हैं.
सभी एजेंसियों को अपने-अपने क्रय केंद्रों पर जरूरी इंतजाम समय से पूरे करने के निर्देश दिए जा रहे हैं. खास बात ये है कि किसान को अपने इलाके का केंद्र किस एजेंसी के पास है, यह पहले से पता कर लेना चाहिए.
अभी ये साफ नहीं है कि खरीद नीति कैबिनेट से कब पास होगी. केंद्रों की अंतिम संख्या, लक्ष्य में बदलाव और बाकी व्यवस्थाएं नीति जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी. जल्द ही इसकी आधिकारिक सूचना विभाग द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में जारी कर दी जाएगी.
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