धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना हाइलाइट्स
- जनजाति पशुपालकों को सिरोही नस्ल का एक बकरा और एक बकरी निशुल्क दी जाती है.
- TSP क्षेत्र के लाभार्थियों को यूनिट लगाने पर ₹50,000 से ₹1,00,000 तक सब्सिडी.
- एक जन आधार पर मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में 10 बकरियों का बीमा संभव.
- सिरोही बकरी एक बार में 2 से 3 बच्चे देती है, दूध भी ज़्यादा देती है.
Tribal Area Goat Farming Scheme : राजस्थान के जनजाति क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत पशुपालकों को सिरोही नस्ल की बकरी यूनिट लगाने में मदद दी जा रही है. इस योजना में जनजाति वर्ग के पात्र पशुपालकों को एक बकरा और एक बकरी बिल्कुल मुफ्त दी जाती है, वहीं TSP यानी आदिवासी क्षेत्र के पात्र लाभार्थियों को यूनिट लगाने पर ₹50,000 से लेकर ₹1,00,000 तक की सब्सिडी भी मिलती है.
असल में यह योजना केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रही है, और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के साथ मिलकर जनजाति पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद कर रही है. खास बात ये है कि इसमें दी जाने वाली बकरी की नस्ल भी खास तौर पर चुनी गई है, जो अपनी मज़बूती और अनुकूलनशीलता के लिए जानी जाती है.
सिरोही नस्ल की बकरी में ऐसा क्या खास है?
सिरोही नस्ल की बकरी का उद्गम मूल रूप से सिरोही जिले से माना जाता है, और इसी वजह से इसका नाम भी उसके मूलस्थल पर रखा गया है. यह बकरी कद-काठी में मज़बूत होती है और हर तरह की जलवायु में आसानी से रह सकती है.
जिले के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. जगदेव चौधरी ने बताया- “सिरोही नस्ल की बकरियों की डिमांड जिले के अलावा पूरे देश में होती है.” उन्होंने यह भी बताया कि इन बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी अच्छी होती है, जिससे इन्हें पालना अपेक्षाकृत आसान रहता है.
बकरी पालन से कमाई के कौन-कौन से रास्ते हैं?
बकरी पालन से पशुपालकों को कमाई के कई ज़रिए मिलते हैं. दूध और बकरियों की सीधी बिक्री के अलावा इनकी मेंगनी यानी गोबर भी खाद के रूप में इस्तेमाल होती है, जो दूसरे पशुओं की खाद के मुकाबले ज़्यादा उपजाऊ मानी जाती है.
इसके अलावा सिरोही नस्ल की बकरियों की डिमांड ज़्यादा होने से इनके अच्छे दाम भी आसानी से मिल जाते हैं. एक बकरी आमतौर पर एक बार में 2 से 3 बच्चे देती है, और अन्य नस्लों के मुकाबले दूध भी ज़्यादा देती है, जिससे इन्हें पालने का खर्च भी कम बैठता है.
किसे और कितना मिलेगा फायदा?
| लाभार्थी वर्ग | मिलने वाली सुविधा |
|---|---|
| जनजाति वर्ग के पशुपालक | एक बकरा और एक बकरी निशुल्क |
| TSP क्षेत्र के पात्र लाभार्थी | यूनिट लगाने पर ₹50,000 से ₹1,00,000 तक सब्सिडी |
| सभी पात्र पशुपालक | मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत बीमा सुविधा |
इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक के पास TSP क्षेत्र में वनाधिकार पट्टा या वहां निवास का प्रमाण होना ज़रूरी है. यानी सिर्फ जनजाति वर्ग से होना ही काफी नहीं, बल्कि तय क्षेत्र में निवास या पट्टे का प्रमाण भी दिखाना होगा.
आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
इस योजना के लिए आवेदन करने पर पशुपालक को कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होते हैं. इनमें जन आधार कार्ड, आदिवासी जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता विवरण और पट्टा-निवास प्रमाण पत्र शामिल हैं.
- जन आधार कार्ड
- आदिवासी जाति प्रमाण पत्र
- बैंक खाता विवरण
- वनाधिकार पट्टा या निवास प्रमाण पत्र
पात्र पशुपालक इन दस्तावेज़ों के साथ पशुपालन विभाग में आवेदन कर सकते हैं. फिलहाल आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया या किसी तय आवेदन पोर्टल की जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए इसके लिए स्थानीय पशुपालन विभाग कार्यालय से संपर्क करना बेहतर रहेगा.
बकरियों का बीमा कैसे होगा?
बकरी और अन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना का लाभ भी देती है. इसमें एक जन आधार कार्ड पर अधिकतम 10 बकरियों के बीमे की सुविधा पशुपालक को मिलती है.
इस बीमा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी वजह से बकरी की मृत्यु होने पर भी पशुपालक को इसका मुआवज़ा मिल जाता है. यानी बकरी यूनिट में हुए नुकसान की भरपाई का एक ज़रिया पशुपालकों के पास पहले से मौजूद रहता है, जिससे लंबे समय तक इस यूनिट से फायदा लिया जा सकता है.










