PMDDY: भारत में किसानों का जीवन हमेशा से संघर्षों से भरा रहा है। कम आय, संसाधनों की कमी और मौसम की अनिश्चितता जैसे मुद्दों ने उनकी राह मुश्किल बनाई है। लेकिन अब भारत सरकार इन समस्याओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इन प्रयासों में सबसे अहम है पीएम धन धान्य योजना (PMDDY), जिसका लक्ष्य किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना और खेती को लाभकारी बनाना है। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
पीएम धन धान्य योजना से 100 जिलों में बदलाव
पीएम धन धान्य योजना के तहत सरकार ने देश के 100 चुनिंदा जिलों को चिह्नित किया है, जहाँ कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार की सबसे अधिक जरूरत है। इन जिलों में करीब 1.6 करोड़ किसानों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा, “कई राज्य ऐसे हैं जहाँ फसलों का उत्पादन अधिक है, लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहाँ उत्पादन कम है। एक ही राज्य के अंदर भी कुछ जिलों में उत्पादकता अन्य जिलों की तुलना में कम है।” इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की रणनीति बनाई है।
इस योजना में उत्पादकता बढ़ाने, ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराने, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और कटाई के बाद के प्रबंधन को बेहतर करने जैसे कदम शामिल हैं। खास बात यह है कि यह योजना खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले शुरू हो सकती है, जो आमतौर पर जून में मॉनसून के साथ शुरू होता है।
क्यों चुने गए ये 100 जिले? कृषि मंत्री ने दी यह वजह
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, इन जिलों का चयन “उत्पादकता अंतराल” को देखते हुए किया गया है। NITI आयोग के 2023 के अध्ययन के मुताबिक, देश के 40% कृषि क्षेत्रों में उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से 30% कम है। चौहान ने लोकसभा में बताया, “उदाहरण के लिए, बिहार के गया और महाराष्ट्र के विदर्भ में सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण उत्पादन 50% तक पिछड़ गया है। PMDDY ऐसे ही क्षेत्रों पर फोकस करेगी।”
अनेक सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ
किसानों को सहायता देने के लिए सरकार ने पीएमडीडीवाई को अन्य योजनाओं के साथ जोड़ने का फैसला किया है। इसमें बोरवेल, सोलर पंप, माइक्रो-इरिगेशन और बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को एक ही जगह से सारी सुविधाएँ मिलें, ताकि उन्हें सब्सिडी या सहायता के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े। यह एकीकृत दृष्टिकोण न केवल समय और संसाधनों की बचत करेगा, बल्कि किसानों के लिए सरकारी मदद को अधिक सुलभ भी बनाएगा।
किसानों की आमदनी में हुआ इजाफा
किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों का असर पहले से ही दिखने लगा है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के एक सर्वे के मुताबिक, 2012-13 में किसान परिवार की औसत मासिक आय 6,426 रुपये थी, जो 2018-19 में बढ़कर 10,218 रुपये हो गई। वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 75,000 ऐसे किसानों की कहानियाँ संकलित की हैं, जिन्होंने अपनी आय को दोगुना कर दिखाया। ये आंकड़े और उदाहरण इस बात का सबूत हैं कि सही संसाधन और समर्थन मिलने पर किसान अपनी स्थिति बदल सकते हैं।
विकास के सात रास्ते: आत्मनिर्भरता की नींव
किसानों की आय को दोगुना करने के लिए सरकार ने सात प्रमुख क्षेत्रों पर काम शुरू किया है। अशोक दलवई की अध्यक्षता वाली समिति ने इन स्रोतों को पहचाना है:
- फसलों और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना
- संसाधनों का बेहतर उपयोग और लागत में कमी
- फसलों की मात्रा में वृद्धि
- उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती
- किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना
- कृषि से गैर-कृषि व्यवसायों की ओर बढ़ना
ये कदम किसानों को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे, बल्कि उन्हें आधुनिक खेती की ओर प्रेरित भी करेंगे। उदाहरण के लिए, फल-सब्जियों या मसालों की खेती से किसान बाजार की मांग के हिसाब से अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था से लेकर खाद्य सुरक्षा तक
पीएम धन धान्य योजना का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगा, क्योंकि आय बढ़ने से किसानों की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी। साथ ही, उत्पादन बढ़ने से देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह योजना भारत जैसे कृषि-प्रधान देश के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है।
चुनौतियाँ: सफलता के रास्ते में रोड़े
हर बड़ी योजना की तरह, पीएमडीडीवाई के सामने भी कुछ चुनौतियाँ हैं। योजना का सही क्रियान्वयन, किसानों तक सही जानकारी पहुँचाना और स्थानीय प्रशासन की कमियाँ इसके रास्ते में बाधा बन सकती हैं। इनसे निपटने के लिए सरकार को जागरूकता अभियान चलाने, प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है।