हाइलाइट्स
- मुख्यमंत्री फडणवीस ने 3.27 लाख किसानों के लोन खातों में 3,161 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.
- योजना के तहत अब तक कुल 13,276 करोड़ रुपये बांटे गए, 15.86 लाख किसानों को फायदा.
- कुल योजना करीब 56 लाख किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की है.
- लाभ के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी, नाम आप्ले सरकार सेवा केंद्र पर देख सकते हैं.
Punyashlok Ahilyadevi Holkar Farmers Loan Waiver Scheme: महाराष्ट्र सरकार ने किसान ऋण माफी योजना के तीसरे चरण में 3.27 लाख किसानों के लोन खातों में 3,161 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को इसकी शुरुआत की. इस किस्त के बाद योजना में कुल 13,276 करोड़ रुपये बंट चुके हैं, जिसका फायदा अब तक 15.86 लाख किसानों के खातों को मिला है.
असल में पैसा किसानों के हाथ में नहीं, सीधे उनके कर्ज खातों में जा रहा है. NDTV मराठी के मुताबिक यह राशि पात्र किसानों के ऋण खातों में जमा हुई. योजना का नाम ‘अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्ज मुक्ति योजना’ है.
तीसरी किस्त में किसे कितना मिला?
तीसरी किस्त में 3,161 करोड़ रुपये जारी हुए, जिससे 3.27 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचा. औसत निकालें तो यह रकम प्रति किसान करीब 96,500 रुपये बैठती है. हालांकि यह सिर्फ मोटा हिसाब है, हर किसान की माफी अलग हो सकती है.
वहीं ज्यादा ब्याज वाले खातों के लिए सहकारी ऑडिट भी चलाई जा रही है.
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| तीसरी किस्त की राशि | 3,161 करोड़ रुपये |
| तीसरी किस्त के लाभार्थी | 3.27 लाख से ज्यादा किसान |
| अब तक कुल जारी राशि | 13,276 करोड़ रुपये |
| अब तक लाभ पाने वाले किसान | 15.86 लाख |
| कुल योजना | 36,585 करोड़ रुपये |
| कुल लक्षित किसान | करीब 56 लाख |
अब तक कितना पैसा बंटा, कितना बाकी?
सितंबर 2026 तक 13,276 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर हो चुके हैं. कुल योजना 36,585 करोड़ रुपये की है. यानी अब तक करीब 36% रकम बांटी गई है और लगभग 23,300 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है.
किसानों की संख्या में भी यही तस्वीर है. करीब 56 लाख लक्षित किसानों में से 15.86 लाख को लाभ मिला है, यानी लगभग 28%.
योजना की शुरुआत कैसे हुई थी?
जुलाई में सरकार ने घोषणा की थी कि पहले चरण में करीब 17 लाख किसानों के खातों में 13,000 करोड़ रुपये जमा किए जाएंगे. इसके बाद 24 सितंबर को मुख्यमंत्री के बयान से कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया जा रहा है.
खास बात ये है कि इस विस्तार से वे किसान भी राहत पाएंगे, जो 2016-17 की माफी योजना में शामिल नहीं हो सके थे.
बैंकों पर इस माफी का क्या असर पड़ता है?
कमर्शियल लेंडर्स के लिए इस योजना का मुख्य तरीका सीधा नकद भुगतान है. जब सरकार बकाया या नॉन-परफॉर्मिंग फसल लोन चुकाने के लिए फंड जमा करती है, तो बैंक इसे नकद वसूली के रूप में दर्ज करते हैं.
इसके बाद कृषि से जुड़े NPA घटते हैं और उनसे जुड़े लोन प्रोविजन, यानी कर्ज के लिए अलग रखी गई रकम, जारी हो जाती है. यानी बैंकों की बैलेंस शीट पर सीधा असर पड़ता है.
लाभ लेने के लिए क्या जरूरी है?
योजना का फायदा लेने के लिए आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य है. पात्र मृत किसानों के वारिसों को भी लाभ मिलता है, जिसके लिए एग्री स्टेक पोर्टल का रास्ता है. आधार से जुड़ी गड़बड़ी हो तो पहले उसे ठीक कराना समझदारी होगी.
सूखा प्रभावित इलाकों के लिए अलग निर्देश हैं. वहां ऋण वसूली पर रोक और पुनर्गठन के निर्देश दिए गए हैं.
अपना नाम कैसे देखें?
लाभार्थी किसान अपना नाम आप्ले सरकार सेवा केंद्र या आधिकारिक पोर्टल पर देख सकते हैं. इसके लिए यूनिक नंबर या आधार नंबर से सर्च करना होगा.
आगे क्या तय होना बाकी है?
अब तक 36,585 करोड़ रुपये की योजना का करीब एक-तिहाई हिस्सा बंटा है. चौथी किस्त कब आएगी और कितनी होगी, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. ज्यादा ब्याज वाले खातों का सहकारी ऑडिट भी जारी है.
अब सवाल ये है कि बाकी करीब 40 लाख किसानों तक पैसा कब पहुंचेगा. इसका जवाब आने वाली किस्तों से मिलेगा.
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