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RH-1424 और RH-725 सरसों बीज की बिक्री शुरू, किसानों को 150 रुपये किलो में मिलेगा बीज

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Rewari : सरसों की खेती करने वाले किसान अब चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के बावल स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से उन्नत बीज (Mustard Seed) ले सकते हैं. यहां आरएच-1424 और आरएच-725 किस्मों का बीज 150 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक्री के लिए रखा गया है. बीज सुबह 9 बजे से शाम 4:30 बजे तक मिलेगा.

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बीज के साथ एजोटोबैक्टर और पीएसबी जैव उर्वरक भी 20 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर दिए जा रहे हैं. केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर यादव ने बुवाई में बीज की सही मात्रा रखने पर जोर दिया है.

बावल केंद्र पर क्या-क्या मिल रहा है?

केंद्र पर किसानों के लिए पहला सरसों का प्रमाणिक बीज RH-1424 और RH-725 और दूसरी तरफ दो जैव उर्वरक कम दाम में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाये जा रहे है .

सामानकीमतअन्य जानकारी
सरसों बीज (आरएच-1424, आरएच-725)150 रुपये प्रति किलोग्रामतीन किलोग्राम के पैकेट में
एजोटोबैक्टर जैव उर्वरक20 रुपये प्रति किलोग्रामनाइट्रोजन उपलब्ध कराने में मददगार
पीएसबी जैव उर्वरक20 रुपये प्रति किलोग्रामफास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाने में सहायक

ये किस्में किस इलाके के लिए हैं?

आरएच-1424 और आरएच-725 को दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की परिस्थितियों के अनुकूल बताया गया है. केंद्र ने इन्हीं दो किस्मों का बीज बिक्री के लिए रखा है. यानी इस इलाके के किसानों के लिए ये सीधे उनके अपने क्षेत्र के हिसाब से चुनी गई किस्में हैं.

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एक एकड़ में कितना बीज डालें?

क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर यादव ने दो स्थितियों के लिए अलग मात्रा बताई है. सिंचित क्षेत्रों में एक किलोग्राम प्रति एकड़ और वर्षा आधारित क्षेत्रों में 1.5 किलोग्राम प्रति एकड़. उनका जोर इस बात पर है कि बुवाई में मात्रा न कम हो, न ज्यादा.

इस हिसाब से तीन किलो का एक पैकेट सिंचित जमीन के तीन एकड़ के लिए काफी बैठता है. वर्षा आधारित जमीन में यही पैकेट दो एकड़ की जरूरत पूरी करेगा.

जैव उर्वरक से खेत को क्या फायदा?

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक एजोटोबैक्टर फसल तक नाइट्रोजन पहुंचाने में मदद करता है. पीएसबी का काम फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाना है. दोनों साथ मिलकर फसल की पोषक जरूरतें पूरी करने में सहायक होते हैं.

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खास बात ये है कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है. 20 रुपये किलो का रेट देखते हुए छोटे किसानों के लिए ये एक सस्ता विकल्प हो सकता है.

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प्रमाणित बीज पर जोर क्यों?

केंद्र ने किसानों से अपील की है कि बुवाई के लिए प्रमाणित और अनुशंसित बीज ही इस्तेमाल करें. बावल केंद्र का बीज विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्र से सीधे मिल रहा है, इसलिए किसान इसे इसी श्रेणी में रख सकते हैं.

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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