हाइलाइट्स
- सरकार के मुताबिक प्रदेश में 3.73 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 1.04 लाख मैट्रिक टन DAP उपलब्ध
- एनपीके का 95 हजार और एसएसपी का 2.09 लाख मैट्रिक टन स्टॉक बताया गया
- जमाखोरी और कालाबाजारी पर नजर रखने के लिए 744 उर्वरक निरीक्षकों को जिम्मेदारी
- मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा, खाद की कमी किसी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी
Rajasthan Fertilizer: रबी की बुआई से पहले राजस्थान सरकार ने खाद का स्टॉक और वितरण खंगाला है. सरकार के मुताबिक प्रदेश में 3.73 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 1.04 लाख मैट्रिक टन DAP उपलब्ध है. मंगलवार को जयपुर में हुई टास्क फोर्स की बैठक में जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए 744 उर्वरक निरीक्षकों को जिम्मेदारी दी गई.
बता दें कि बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की. उन्होंने अधिकारियों को साफ कहा कि किसानों को मांग के हिसाब से, समय पर खाद मिले. सरकार का दावा है कि सप्लाई लगातार जारी है.
प्रदेश में किस खाद का कितना स्टॉक है?
सरकारी जानकारी के मुताबिक यूरिया का स्टॉक सबसे ज्यादा है. इसके बाद एसएसपी, DAP और एनपीके आते हैं. पूरा ब्योरा नीचे टेबल में है.
| उर्वरक | उपलब्ध स्टॉक (मैट्रिक टन) |
|---|---|
| यूरिया | 3,73,000 |
| एसएसपी | 2,09,000 |
| DAP | 1,04,000 |
| एनपीके | 95,000 |
जमाखोरी, कालाबाजारी पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए सख़्त निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि रबी बुआई के दौरान खाद की कमी किसी तरह बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए.
केंद्र से मिले उर्वरक आवंटन को समय पर जिलों तक पहुंचाना है. आपूर्तिकर्ता कंपनियों से लगातार सप्लाई भी पक्की करनी है. वहीं जिलों में स्टॉक और असल मांग की लगातार समीक्षा होगी. कमी की आशंका दिखे तो तुरंत आपूर्ति बढ़ाई जाएगी.
744 निरीक्षक रखेंगे नजर
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता के लिए हर वितरण केंद्र पर कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी की मौजूदगी पक्की की जा रही है. 744 उर्वरक निरीक्षकों को जमाखोरी, कालाबाजारी, टैगिंग और अवैध भंडारण पर निगरानी और कार्रवाई का जिम्मा मिला है.
प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल ने बताया कि ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के तहत बनी समितियां भी नियमित निगरानी कर रही हैं. यानी अब निगरानी की कई परतें हैं.
जिलों तक खाद कैसे पहुंचेगी?
भारत सरकार राज्यों को माहवार और कंपनीवार उर्वरक आवंटन करती है. इसी के आधार पर राजस्थान सरकार जिलों की असल मांग का आकलन कर जिलेवार सप्लाई योजना बना रही है. जहां मांग ज्यादा है, वहां समय रहते कदम उठाने के निर्देश हैं.
बैठक में शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा और आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल मौजूद रहे. इफको, कृभको, आईपीएल, सीएफसीएल, एनएफएल और एचयूआरएल जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.
क्या किसानों को अब खाद की किल्लत नहीं होगी?
अब सवाल ये है कि कागज पर दिख रहा स्टॉक खेत तक कितना पहुंचेगा. सरकार का दावा है कि सप्लाई जारी है, पर यह दावा अभी जमीन पर परखा जाना बाकी है.
किसान अधिकृत विक्रेता से ही खाद लें और पक्का बिल जरूर मांगें. शिकायत हो तो अपने ब्लॉक या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें.










