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फसल नुकसान मुआवजा राशि: किसानों को 15 सितंबर तक मिलेगी 3501 करोड़ की राहत राशि

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मुंबई (Crop Loss Compensation) : महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2022 की फसलों को जुलाई माह में अतिव्र्ष्टि (Heavy Rain) और बाढ़ (Flood) के चलते फसलों को भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने किसानों को 3 हजार 501 करोड़ की मदद देने की घोषणा की है . ये राशि किसानों को 15 सितंबर को दी जाएगी. महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ से कुल 23 लाख 81 हजार 920 हेक्टेयर में लगे फसलों को नुकसान पहुंचा था. इस दौरान भारी बारिश से राज्य के 25 लाख 93 हजार किसान बुरी तरह प्रभावित हुए थे. इस योजना के तहत किसानों को तीन हेक्टेयर तक के नुकसान पर मुआवजा राशि का लाभ दिया जाएगा.

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15 सितंबर को भेजी जायेगी मुआवजा राशि

राज्य सरकार द्वारा बारिश और बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद राहत राशि का एलान किया है. कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार ने बताया कि “इस राशि का सीधा लाभ किसानों को दिया जाएगा, फसल मुआवजा राशि का हस्तान्तरण 15 सितंबर से किसानों के खाते में कर दिया जाएगा. जबकि मराठवाड़ा के उस्मानाबाद जिले को इससे बाहर रखा गया है. अगस्त महीने में पंचनामा की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब वास्तविक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू हो रही है.

सोयाबीन की फसलों को हुआ था अधिक नुकसान

मराठवाड़ा के साथ विदर्भ में अब सोयाबीन के रकबे में वृद्धि देखी गई है. लेकिन मराठवाड़ा में जैसे ही फसल बोई और अंकुरित हुई लेकिन ही लगभग एक महीने तक बारिश नहीं हुई ऐसे में सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. ज्यादातर किसानों को यह राशि सोयाबीन के नुकसान के लिए ही मिल रहे जरूरत के समय पैसा मिलने से किसान भी संतुष्ट हैं नज़र आरहे है.

किसानों को अब पहले से ज्यादा मिलेगा मुआवजा

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सहायता राशि बढ़ाने का फैसला किया था. इसके अनुसार कृषि योग्य खेती के लिए पूर्व की दर 6800 रुपए से बढ़ाकर 13,600 रुपए प्रति हेक्टेयर, बागवानी के लिए 13,500 रुपए से 27,000 रुपये और बारहमासी कृषि के लिए 18 हजार रुपए से बढ़ाकर 36,000 रुपए कर दी गई है.​

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जगत पाल पिछले 7 वर्षों से कृषि पत्रकारिता कर रहे हैं। वे मंडी भाव, सरकारी कृषि योजनाओं, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। 2019 में उन्होंने ई-मंडी रेट्स की शुरुआत की, जहाँ वे रोज़ाना देशभर की मंडियों के भाव और कृषि नीतियों का विश्लेषण प्रकाशित करते हैं। वे [गंधेली/हनुमानगढ़] से हैं और ग्रेजुएशन कर चुके हैं।

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